एक राष्ट्र-एक चुनाव देश की जरूरत, गंभीरता से सोचा जाना चाहिए: PM मोदी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 26, 2020   18:02
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एक राष्ट्र-एक चुनाव देश की जरूरत, गंभीरता से सोचा जाना चाहिए: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह इसलिए संभव हो सका, क्‍योंकि 130 करोड़ भारतीयों का सरकार के इन स्‍तंभों में भरोसा था और यही भरोसा समय के साथ और मजबूत हुआ। कर्तव्‍य पालन के महत्‍व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि कर्तव्‍य पालन को अधिकारों, गरिमा और आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने वाले महत्‍वपूर्ण कारक की तरह लिया जाना चाहिए

केवडिया (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को ‘‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’’ (वन नेशन, वन इलेक्शन) को केवल विचार-विमर्श का मुद्दा नहीं बल्कि देश की जरूरत बताया और कहा कि इस बारे में गंभीरता से सोचा जाना चाहिए। मोदी यहां वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पीठासीन अधिकारियों के 80वें अखिल भारतीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। दो दिन का यह सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ था जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, ‘‘वन नेशन, वन इलेक्शन सिर्फ चर्चा का विषय नहीं है बल्कि ये भारत की जरूरत है। हर कुछ महीने में भारत में कहीं न कहीं चुनाव हो रहे होते हैं। इससे विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में वन नेशन, वन इलेक्शन पर गहन मंथन आवश्यक है।’’ उन्होंने कहा कि इसमें पीठासीन अधिकारी काफी मार्गदर्शन कर सकते हैं और अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लोकसभा, विधानसभा या पंचायत चुनावों के लिए केवल एक मतदाता सूची का उपयोग किए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए रास्ता बनाना होगा। हम इन सब पर समय और पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं?’’ उन्होंने संसद और विधानसभाओं के डिजिटलीकरण पर भी बल दिया और इस दिशा में कदम उठाने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘ डिजिटाइजेशन को लेकर संसद में और कुछ विधानसभाओं में कुछ कोशिशें हुई हैं लेकिन अब पूर्ण डिजिटाइजेशन का समय आ गया है।’’ प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान के मूल्‍यों का प्रसार किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि जिस तरह ‘‘केवाईसी- नो योर कस्‍टमर’’ डिजिटल सुरक्षा की कुंजी है, उसी तरह ‘‘केवाईसी-नो योर कांस्टिट्यूशन’’, संवैधानिक सुरक्षा की बड़ी गारंटी हो सकता है। मोदी ने कहा कि हमारे कानूनों की बहुत सरल और आम जन के समझ में आने वाली होनी चाहिए ताकि वे हर कानून को ठीक से समझ सकें। उन्‍होंने कहा कि पुराने पड़ चुके कानूनों को निरस्‍त करने की प्रक्रिया भी सरल होनी चाहिए। उन्‍होंने सुझाव दिया कि एक ऐसी प्रक्रिया लागू की जाए जिसमें जैसे ही हम किसी पुराने कानून में सुधार करें, तो पुराना कानून स्‍वत: ही निरस्‍त हो जाए। आपातकाल का उल्‍लेख करते हुए मोदी ने कहा कि 1970 का यह प्रयास सत्‍ता के विकेन्‍द्रीकरण के प्रतिकूल था लेकिन इसका जवाब भी संविधान के भीतर से ही मिला। 

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उन्होंने कहा, ‘‘संविधान में सत्‍ता के विकेन्‍द्रीकरण और उसके औचित्‍य की चर्चा की गई है। आपातकाल के बाद इस घटनाक्रम से सबक लेकर विधायिका, कार्यपालिका और न्‍यायपालिका आपस में संतुलन बनाकर मजबूत हुए।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि यह इसलिए संभव हो सका, क्‍योंकि 130 करोड़ भारतीयों का सरकार के इन स्‍तंभों में भरोसा था और यही भरोसा समय के साथ और मजबूत हुआ। कर्तव्‍य पालन के महत्‍व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि कर्तव्‍य पालन को अधिकारों, गरिमा और आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने वाले महत्‍वपूर्ण कारक की तरह लिया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान की बहुत सारी विशेषताएं हैं, लेकिन उनमें से एक विशेषता कर्तव्‍य पालन को दिया गया महत्‍व है। महात्‍मा गांधी इसके बहुत बड़े समर्थक थे। उन्‍होंने पाया कि अधिकारों और कर्तव्‍यों के बीच बहुत निकट संबंध है। उन्‍होंने महसूस किया कि जब हम अपना कर्तव्‍य पालन करते हैं, तो अधिकार खुद-ब-खुद हमें मिल जाते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने ‘छात्र संसदों’ के आयोजन का सुझाव दिया, जिनका मार्गदर्शन और संचालन खुद पीठासीन अधिकारियों द्वारा किया जाए।





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नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


26 जनवरी को सरकार की परेड में नहीं डालेंगे बाधा, रिंग रोड में करेंगे ट्रैक्टर रैली: किसान नेता

  •  अनुराग गुप्ता
  •  जनवरी 20, 2021   12:31
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26 जनवरी को सरकार की परेड में नहीं डालेंगे बाधा, रिंग रोड में करेंगे ट्रैक्टर रैली: किसान नेता

किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि हम 26 जनवरी को सरकार की परेड में बाधा नहीं डालेंगे। हम उनसे कहेंगे कि ट्रैक्टर रैली के लिए रिंग रोड ठीक रहेगा क्योंकि ट्रैक्टर बहुत ज़्यादा होंगे।

नयी दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच बुधवार को किसान संगठनों के नेताओं की दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ मुलाकात होने वाली है। इस मुलाकात में गणतंत्र दिवस के मौके पर (26 जनवरी) किसान संगठनों की ट्रैक्टर रैली से जुड़े मार्गों और उनके इंतजामों पर चर्चा होगी।  

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इस मुलाकात से पहले किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि हम हम 26 जनवरी को सरकार की परेड में बाधा नहीं डालेंगे। दरअसल, किसानों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधिकारियों से वार्ता के लिए विज्ञान भवन पहुंचा है। इसी बीच किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि हम 26 जनवरी को सरकार की परेड में बाधा नहीं डालेंगे। हम उनसे कहेंगे कि ट्रैक्टर रैली के लिए रिंग रोड ठीक रहेगा क्योंकि ट्रैक्टर बहुत ज़्यादा होंगे।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


वार्ता से पहले प्रदर्शनकारी किसान नेता ने कहा, सरकार का अभी भी समाधान निकालने का नहीं बना मन

  •  अनुराग गुप्ता
  •  जनवरी 20, 2021   12:14
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वार्ता से पहले प्रदर्शनकारी किसान नेता ने कहा, सरकार का अभी भी समाधान निकालने का नहीं बना मन

सरकार-किसान वार्ता से पहले सिंधु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान नेता का कहना है कि आज की बैठक भी पहले जैसे ही होगी। बैठक से हमें कोई उम्मीद नहीं।

नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर 55 दिनों से किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई 40 किसान संगठन कर रहे हैं और यही संगठन सरकार के साथ वार्ता में भी शामिल हैं। बता दें कि सरकार-किसान संगठनों के बीच बुधवार को दसवें दौर की वार्ता होनी है। हालांकि, अभी तक हुई वार्ता में कोई समाधान नहीं निकला है। 

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सरकार-किसान वार्ता से पहले सिंधु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान नेता का कहना है कि आज की बैठक भी पहले जैसे ही होगी। बैठक से हमें कोई उम्मीद नहीं। दरअसल, समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए किसान नेता ने कहा कि आज की बैठक भी पहले जैसे ही होगी। बैठक से हमें कोई उम्मीद नहीं है। जब भी बैठक होती है हम इसलिए जाते हैं कि सरकार हमारे साथ बैठक कर इसका हल निकाले। लेकिन हल निकालने का सरकार का अभी भी मन नहीं बना है। 

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उल्लेखनीय है कि किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह तीनों कृषि कानूनों को वापस लें। जबकि सरकार बार-बार यही कह रही है कि वह कानूनों को वापस नहीं लेने वाली लेकिन कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है। हालांकि अब तक नौ दौर की वार्ता हो चुकी है और किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।





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संविधान को जानें: क्या आप अपने कर्तव्यों से वाकिफ हैं ? जानिए क्या होते हैं मौलिक कर्तव्य

  •  अनुराग गुप्ता
  •  जनवरी 20, 2021   12:03
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संविधान को जानें: क्या आप अपने कर्तव्यों से वाकिफ हैं ? जानिए क्या होते हैं मौलिक कर्तव्य

अनुच्छेद 51(क) के तहत 11 मौलिक कर्तव्य हैं। 42वें संविधान संशोधन के जरिए 10 अधिकारों को जोड़ा गया था जबकि 11वें मौलिक कर्तव्य को 86वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान में शामिल किया गया था और यह संशोधन साल 2002 में हुआ था।

नयी दिल्ली। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है और संविधान के तहत भारत के नागिरकों को कुछ मौलिक अधिकार दिए गए हैं लेकिन अक्सर लोग मौलिक अधिकारों को ही बात करते हैं। जबकि संविधान में मौलिक कर्तव्यों का भी उल्लेख किया गया है। मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों की एक-दूसरे के बिना कल्पना नहीं की जा सकती है। जहां पर अधिकार हैं वहीं पर कर्तव्य भी होंगे और आज हम अपनी नई सीरीज संविधान को जानें में मौलिक कर्तव्यों के बारे में आपको बताएंगे। जिसकी जानकारी देश के हर एक नागरिक को होनी चाहिए। 

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आपको बता दें कि भारत के संविधान में पहले मौलिक अधिकारों का ही उल्लेख था लेकिन साल 1976 में सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से मौलिक कर्तव्यों को संविधान में जोड़ा गया था। मौलिक कर्तव्यों को संविधान के भाग-4 (क) में अनुच्छेद 51(क) में परिभाषित किया गया है।

अनुच्छेद 51(क) के तहत भारत के हर एक नागरिक के कर्तव्य इस प्रकार से हैं:-

- भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करें।

- स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को ह्दय में संजोए रखें एवं उनका पालन करें।

- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें।

- देश की रक्षा करें और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें। 

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- भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित सभी भेदभाव से परे हों, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।

- हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्व समझें और उसका परिरक्षण करें।

- प्राकृतिक पर्यावरण की (जिसके तहत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं) रक्षा करें और उसका संवर्धन करें। इसके अतिरिक्त प्राणिमात्र के प्रति दया का भाव रखें।

- वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।

- सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें। 

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- व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊचाइयों को छू ले।

- 6 से 14 साल तक की उम्र के बीच अपने बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना। यह कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा जोड़ा गया।

आपको जानकारी दे दें कि अनुच्छेद 51(क) के तहत 11 मौलिक कर्तव्य हैं। 42वें संविधान संशोधन के जरिए 10 अधिकारों को जोड़ा गया था जबकि 11वें मौलिक कर्तव्य को 86वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान में शामिल किया गया था और यह संशोधन साल 2002 में हुआ था।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


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