Patna High Court ने दुष्कर्म प्रयास की सजा रद्द की, महिला की लज्जा भंग का दोषी माना

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पटना उच्च न्यायालय ने बेगूसराय के वर्ष 2010 के एक मामले में आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से बरी करते हुए महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी ठहराया। न्यायमूर्ति संदीप कुमार की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दुष्कर्म के प्रयास को सिद्ध करने के लिए नाकाफी थे। अदालत ने आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई 13 वर्ष से अधिक की अवधि को सजा मानकर उसे 25 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया।

पटना उच्च न्यायालय ने एक विधवा से दुष्कर्म के प्रयास के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला करने का दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दुष्कर्म के प्रयास को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। न्यायमूर्ति संदीप कुमार की एकल पीठ ने आठ अक्टूबर को मोहम्मद ऐनुल हक की आपराधिक अपील पर फैसला सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376/511 के तहत दुष्कर्म के प्रयास की दोषसिद्धि रद्द कर दी।

हालांकि, धारा 448 के तहत घर में अनधिकृत प्रवेश के अपराध में उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी। अदालत ने धारा 354 के तहत महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला करने का दोष भी माना। मामला फरवरी 2010 में बेगूसराय जिले में हुई घटना से जुड़ा है।

आरोप के अनुसार, आरोपी रात में विधवा के घर में घुसा, दीया बुझाया और उसके ऊपर लेट गया, उसकी चीख दबाने के लिए महिला का मुंह बंद कर दिया। महिला के शोर मचाने पर ग्रामीण पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि पीड़िता की गवाही आरोपी के घर में घुसने, दीया बुझाने और उसके ऊपर लेटने के संबंध में विश्वसनीय है।

हालांकि, दुष्कर्म के प्रयास को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। कपड़े उतारने या यौन संबंध बनाने के लिए प्रवेश का प्रयास करने जैसी गतिविधि भी साबित नहीं हुई। अदालत ने आरोपी की उम्र, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने और 13 वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहने ध्यान में रखते हुए दोनों अपराधों की सजा उसके द्वारा पहले ही काटी जा चुकी कारावास की अवधि तक सीमित कर दी।

साथ ही, उसे आठ सप्ताह के भीतर 25,000 रुपये जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया। यह राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। जुर्माना नहीं भरने पर उसे छह महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा।

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