• वोटों के ‘सियासी सौदागरों’ ने स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक अल्पसंख्कों को धोखा दिया: नकवी

केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को कांग्रेस पर परोक्ष तौर पर निशाना साधते हुए अल्पसंख्यकों को उनके वोटों के ‘‘सियासी सौदागरों’’ से आगाह किया और दावा किया कि ऐसे लोगों ने धर्मनिरपेक्षता का नकाब पहन रखा है।

मुंबई। केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को कांग्रेस पर परोक्ष तौर पर निशाना साधते हुए अल्पसंख्यकों को उनके वोटों के ‘‘सियासी सौदागरों’’ से आगाह किया और दावा किया कि ऐसे लोगों ने धर्मनिरपेक्षता का नकाब पहन रखा है। महाराष्ट्र के लिए भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रशिक्षण शिविर और राज्य कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए नकवी ने कहा कि आजादी के बाद पिछले 75 वर्षों के दौरान, ‘‘अल्पसंख्यक वोटों के सियासी सौदागरों ने अल्पसंख्यकों को धोखा देने के लिए अपने राजनीतिक शतरंज की बिसात पर 75 चालें चलीं।’’

इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार के खिलाफ संयुक्त मोर्चा ने किया प्रदर्शन, पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर साधा निशाना

राज्यसभा में उपनेता ने कहा, ‘‘भय का माहौल बनाना, असहिष्णुता का हौआ खड़ा करना, धर्म का जाल बुनना और अफवाहें फैलाना अल्पसंख्यक समुदायों का राजनीतिक शोषण करने का उनका पुराना फॉर्मूला है।’’ नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यकों को ‘‘ऐसे सियासी सौदागरों से सावधान रहना चाहिए जो अल्पसंख्यक वोटों को हथियाने के लिए धर्मनिरपेक्षता का नकाब पहनकर घूम रहे हैं।’’ उन्होंने अपने भाषण में, ‘‘छद्म-धर्मनिरपेक्षतावादियों’’ को उनके दोहरे मानकों के लिए आड़े हाथ लिया। नकवी ने कहा, ‘‘छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों के पाखंड की पराकाष्ठा यह है कि शिवसेना को भाजपा के साथ रहने पर सांप्रदायिक करार दिया जाता है और कांग्रेस के साथ जाने पर उसे धर्मनिरपेक्षता का प्रमाणपत्र मिल जाता है।

इसे भी पढ़ें: हाथरस दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों से किया वादा पूरा नहीं किया तो अनिश्चितकालीन धरना देंगे : आजाद

यह छद्म धर्मनिरपेक्ष सिंडिकेट एक प्रमाणपत्र केंद्र चला रहा है जो किसी को मिनटों में सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष बनाता है।’’ महा विकास अघाड़ी का नेतृत्व करने वाली शिवसेना, महाराष्ट्र में राकांपा और कांग्रेस के साथ सत्ता साझा करती है। नकवी ने कहा कि लोगों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों ने देखा है कि ये ‘‘अल्पसंख्यक वोट के सौदागर’’ अल्पसंख्यकों के ‘‘राजनीतिक शोषण’’ में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता और समावेशी विकास भाजपा के लिए संवैधानिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों ने सम्मान के साथ विकास और तुष्टिकरण के बिना सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता के साथ काम किया है, जिससे अन्य वर्गों के साथ-साथ अल्पसंख्यकों का समान विकास सुनिश्चित हुआ है।

नकवी ने कहा कि पिछले सात वर्षों में अकेले हुनर हाट पहल के माध्यम से 5,50,000 से अधिक कारीगरों, शिल्पकारों और उनसे जुड़े लोगों को रोजगार और रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले सात वर्षों में, 5 करोड़ से अधिक अल्पसंख्यक छात्रों को विभिन्न छात्रवृत्तियां दी गई हैं। 50 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी लड़कियां हैं। मुस्लिम लड़कियों की स्कूल छोड़ने की दर जो पहले 70 प्रतिशत थी, अब घटकर 32 प्रतिशत हो गई है। हमारी प्रतिबद्धता आने वाले दिनों में इसे शून्य प्रतिशत तक लाने की है।’’ नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत भारत के पिछड़े और वंचित क्षेत्रों में हजारों करोड़ रुपये का बुनियादी ढांचा जैसे स्कूल, कॉलेज, स्मार्ट क्लासरूम, आईटीआई, हॉस्टल, आवासीय विद्यालय, सद्भाव मंडप, कौशल विकास केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर, मार्केट शेड, पेयजल स्वास्थ्य सुविधाएं, खेल सुविधाएं आदि का निर्माण किया गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा मोदी सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं से भी अल्पसंख्यकों को बड़े पैमाने पर फायदा हुआ है।

केंद्र की ओर से देशभर में दो करोड़ लोगों को आवास मुहैया कराए गए हैं और 31 फीसदी लाभार्थी अल्पसंख्यक हैं। 12 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि दी गई है और 33 प्रतिशत लाभार्थी अल्पसंख्यक समुदायों से हैं।’’ नकवी ने यह भी कहा कि 8 करोड़ उज्ज्वला योजना लाभार्थियों में से 37 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि ‘मुद्रा योजना’ से 31 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं और उनमें से 36 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘देश भर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुल 13 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया है और 22 प्रतिशत लाभार्थी अल्पसंख्यक हैं। इसके अलावा, जन धन योजना ,‘आयुष्मान भारत , हर घर जल योजना गांवों का विद्युतीकरण जैसी अन्य योजनाओं के 22 से 37 प्रतिशत लाभार्थी (अल्पसंख्यक समुदायों से) हैं।