Hindi थोपने का आरोप Political Stunt, Dharmendra Pradhan का CM Stalin पर तीखा हमला

Dharmendra Pradhan
ANI
अंकित सिंह । Apr 4 2026 7:11PM

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु के सीएम एम.के. स्टालिन के तीन-भाषा फॉर्मूला को 'हिंदी थोपने' के आरोपों को राजनीतिक ध्यान भटकाने का प्रयास बताया है। प्रधान ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भाषाई थोपने के बजाय 'भाषाई मुक्ति' पर केंद्रित है, जो मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर पश्चिम एशिया के बारे में "बेतुकी" टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है, जिसका उद्देश्य अविश्वास पैदा करना और भारतीय प्रवासियों को खतरे में डालना है केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तीन-भाषा फॉर्मूले पर की गई टिप्पणियों की आलोचना करते हुए इसे "थोपने" का दावा राजनीतिक खामियों को छिपाने का एक बेकार प्रयास बताया।

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प्रधान ने कहा कि नीति को भाषाई थोपना कहना एक प्रगतिशील और समावेशी सुधार को गलत तरीके से पेश करना है, जिससे अनावश्यक भय और भ्रम पैदा होता है। इससे पहले, स्टालिन ने तर्क दिया था कि तीन-भाषा फॉर्मूला गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी को बढ़ावा देने का एक गुप्त तरीका है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप सीबीएसई के पाठ्यक्रम ढांचे को भाषाई थोपने की दिशा में एक सोची-समझी और बेहद चिंताजनक कदम बताया था।

इसके जवाब में प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 "भाषाई मुक्ति" की दिशा में एक कदम है, जो मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देती है ताकि तमिल भाषी छात्रों सहित प्रत्येक बच्चा अपनी मातृभाषा में उत्कृष्टता प्राप्त कर सके। उन्होंने आगे कहा कि इस नीति को अनिवार्य हिंदी के रूप में प्रस्तुत करना छात्रों के बहुभाषी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के अवसरों को कमज़ोर करता है। उनके अनुसार, बहुभाषावाद तमिल भाषा को कमज़ोर करने के बजाय उसे और मज़बूत करेगा।

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प्रधान ने यह भी कहा कि नई नीति सभी भाषाओं को समान रूप से बढ़ावा देती है, संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है और मौजूदा दो-भाषा प्रणाली में सुधार लाने का प्रयास करती है। उन्होंने समग्र शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण जैसी पहलों के माध्यम से किए जा रहे कार्यान्वयन प्रयासों पर प्रकाश डाला। स्टालिन की आलोचना करते हुए प्रधान ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार ने पहले किए गए वादों के बावजूद आवश्यक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर न करके पीएम-श्री स्कूलों की स्थापना में देरी की है। उन्होंने कहा कि इससे कई वंचित छात्रों को बेहतर बुनियादी ढांचे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ा है।

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