प्रकाश जावड़ेकर ने दोहराया, संवहनीय विकास चाहता है भारत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 22, 2019   16:46
प्रकाश जावड़ेकर ने दोहराया, संवहनीय विकास चाहता है भारत

जावड़ेकर ने कहा, ‘‘मेरा देश विकास के रास्ते पर है। मैं (विकास की चाहत रखने वाले) अपने लोगों से वह नहीं छीन सकता। हम स्थिर विकास चाहते हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की ओर से आयोजित क्लाइमेट एक्शन समिट का लक्ष्य 2016 पेरिस समझौते के क्रियान्वयन को बढ़ावा देना है।

संयुक्त राष्ट्र। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मामलों के केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संयुक्त राष्ट्र के एक मंच पर कहा कि भारत संवहनीय तरीके से विकास करेगा लेकिन साथ ही सुनिश्चित करेगा कि उसके नागरिकों को विकास के सभी लाभ मिलें। संयुक्त राष्ट्र के ‘क्लाइमेट एक्शन समिट’ में उद्योगों के रूपांतरण से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान जावड़ेकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ मॉडल को रेखांकित किया। इसमें उत्पादित वस्तु में कोई खामी नहीं होती है और न ही उत्पादन के दौरान पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जावड़ेकर ने कहा, ‘‘मेरा देश विकास के रास्ते पर है। मैं (विकास की चाहत रखने वाले) अपने लोगों से वह नहीं छीन सकता। हम स्थिर विकास चाहते हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की ओर से आयोजित क्लाइमेट एक्शन समिट का लक्ष्य 2016 पेरिस समझौते के क्रियान्वयन को बढ़ावा देना है। इसमें आपस में जुड़े नौ क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इन सभी बदलावों का नेतृत्व 19 देश करेंगे और अंतरराष्ट्रीय संगठन उनकी सहायता करेंगे।

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इनमें से उद्योगों में बदलाव के नेतृत्व की जिम्मेदारी भारत और स्वीडन की है। जावड़ेकर ने कहा कि यह नौ रास्ते पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पाने में मदद करेंगे। मंत्री ने कहा कि कार्बन एकत्र करने की बात वर्षों से हो रही है, लेकिन अभी तक उसे बड़े पैमाने पर लागू नहीं किया गया है।उन्होंने कहा कि भारत में पहला ऐसा परिसर बनने वाला है, जो कार्बन एकत्र करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में कार्बन उत्सर्जन होगा, जिसे एकत्र करके दूसरी फैक्टरियों में कच्चे माल की तरह इस्तेमाल किया जाएगा। यह बड़ी बात है।’’

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जावड़ेकर ने प्रति एक टन पर छह डॉलर कर की भारतीय नीति की जानकारी देते हुए इसे सही और कड़ी नीति बतायी। उन्होंने कहा, ऐसा इसलिए है ताकि उद्योग यह सोचना शुरू करें कि वे कोयले का उपयोग कम कैसे कर सकते हैं और कैसे दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत शायद पहला ऐसा देश है, जहां ऐसी नीति है। भारत का सीमेंट उद्योग सबसे कम कार्बन उत्सर्जन करने का उद्योग है। जावड़ेकर ने कहा कि भारतीय विमानन उद्योग जैवईंधन की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘देहरादून से दिल्ली तक जैवईंधन इथेनॉल से हमारी पहली उड़ान सफल रही। इस दिशा में हम और प्रगति कर रहे हैं।’’ मंत्री ने कहा कि अब हमारी योजना बोईंग को जैवईंधन पर उड़ाने की है और ‘‘मुझे यकीन है कि सफलता मिलेगी।’’ केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है और उन्हें कर संबंधी छूट भी दे रही है। उन्होंने कहा कि यूरो-6 वाले वाहन अप्रैल 2020 तक बाजार में उपलब्ध होंगे।





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