Sukhvinder Sukhu के कार्यक्रमों से Virbhadra Singh की तस्वीर नदारद, Pratibha Singh भड़कीं

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने रामपुर और रोहड़ू में मुख्यमंत्री के दौरों के दौरान दिवंगत वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर रोष जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के आयोजनों में छह बार मुख्यमंत्री रहे नेता के पोस्टर न लगाना छोटी सोच को दर्शाता है।
शिमला, आठ अक्टूबर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के बैनर और पोस्टर में हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे एवं उनके पति दिवंगत वीरभद्र सिंह की तस्वीरें नहीं होने से नाराज हैं। उन्होंने रामपुर और रोहड़ू विधानसभा क्षेत्रों में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कार्यक्रमों के दौरान वीरभद्र सिंह का नाम नहीं लिए जाने पर भी आपत्ति जताई। सुक्खू ने दो और तीन अक्टूबर को दोनों विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया और दोनों स्थानों पर रात में रुके थे।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘‘दूसरों की बात तो छोड़िए, हमारे ही लोग आगे आकर यह कह सकते थे कि हम वीरभद्र सिंह की तस्वीर वाले 20 बैनर बनाएंगे। यह दूरदर्शिता की कमी और छोटी सोच को दर्शाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वीरभद्र सिंह को गए साढ़े चार साल हो गए हैं और हमने इतनी जल्दी उनका चेहरा भुला दिया।’’ प्रतिभा सिंह ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा कभी गुटबाजी और विभाजन से प्रभावित नहीं रही है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम नाहन या सिरमौर जाते हैं तो हम हिमाचल के निर्माता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री वाई. एस. परमार का नाम लिए बिना कोई कार्यक्रम या बैठक शुरू नहीं करते।’’ कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि वीरभद्र सिंह को याद करना और नई पीढ़ी को राज्य के लिए उनके योगदान से अवगत कराना पार्टी का कर्तव्य है।
रोहड़ू और रामपुर विधानसभा क्षेत्रों को वीरभद्र सिंह के परिवार का गढ़ माना जाता है। वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश की तत्कालीन बुशहर रियासत के पूर्व शासक थे। रामपुर वीरभद्र सिंह का गृह नगर था, जबकि उन्होंने रोहड़ू से पांच बार चुनाव जीता था।
रोहड़ू और रामपुर से कांग्रेस विधायक क्रमशः मोहन लाल ब्राक्टा और नंद लाल ने माना कि बैनर पर वीरभद्र सिंह की तस्वीर होनी चाहिए थी। इससे पहले भी प्रतिभा सिंह और उनके बेटे तथा मौजूदा सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने वीरभद्र सिंह की कथित अनदेखी पर आपत्ति जताई थी और यह मुद्दा कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाया था।
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