Manjeshwar Assembly Seat: BJP के Surendran और IUML के बीच 'Prestige Fight', किसका पलड़ा भारी

केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 23 मई 2026 को खत्म हो रहा है। केरल में एक बार फिर से कांग्रेस के नेतृत्व में UDF, वाम मोर्चे के LDF और बीजेपी के नेतृत्व में NDA के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 23 मई 2026 को खत्म हो रहा है। केरल में एक बार फिर से कांग्रेस के नेतृत्व में UDF, वाम मोर्चे के LDF और बीजेपी के नेतृत्व में NDA के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। राज्य में 09 अप्रैल 2026 को एक चरण में मतदान होना है। वहीं नतीजे 04 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में राज्य की कई सीटें हाई वोल्टेज बन चुकी हैं। जिनमें कासरगोड जिले की मंजेश्वर सीट खास तौर से चर्चा में है।
IUML का गढ़
इस सीट पर लंबे समय से UDF की सहयोगी पार्टी IUML का मजबूत गढ़ रही है। यहां का संगठनात्मक और सामाजिक समीकरण IUML को बढ़त दिलाता रहा है। लेकिन साल 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव ने यह संकेत दिया था कि यह सीट अब पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। इस चुनाव में बेहद कम अंतर से मिली जीत ने विपक्ष को यहां संभावनाएं दिखा दीं। इस बार IUML के उम्मीदवार अशरफ एक बार फिर से चुनावी रण में हैं। ऐसे में असरफ से सामने अपनी पकड़ को बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
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त्रिकोणीय मुकाबला
मंजेश्वर विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला हो चुका है। जिस कारण यह चुनाव अधिक दिलचस्प हो गया है। साल 2021 के चुनावों की तरह इस बार भी भाजपा ने अपने बड़े चेहरे सुरेंद्रन को चुनावी रण में उतारा है। वहीं वाम मोर्चे ने केआर जयनंद को चुनावी रण में उतारा है। पिछले विधानसभा चुनावों में के सुरेंद्रन ने IUML नेता एकेएम अशरफ को कड़ी टक्कर दी थी। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार इस सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।
समझिए चुनावी समीकरण
इस बार में मंजेश्वर सीट में चुनाव पूरी तरह से वोटों के बंटवारे पर निर्भर करता दिख रहा है। IUML को अपनी पारंपरिक वोट बैंक और संगठन पर भरोसा है। तो वहीं भाजपा साल 2021 के प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ना चाहती हैं। वहीं दूसरी तरफ CPM भाजपा और IUML के बीच की टक्कर में फायदा उठाने की फिराक में है। रोजगार, स्थानीय मुद्दों में विकास, सामाजिक संतुलन और बुनियादी ढांचा अहम भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन यहां पर मुकाबले का आधार राजनीतिक ध्रुवीकरण ही माना जा रहा है।
सीट के नतीजे
मंजेश्वर सीट का परिणाम सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होगा। अगर यहां पर IUML यहां से जीतती है तो उसके पारंपरिक प्रभाव की पुष्टि होगी। लेकिन भाजपा मजबूत चुनौती देती है या जीत हासिल करती है, तो यह राज्य की राजनीति में पार्टी का बड़े विस्तार का संकेत माना जाएगा। कुल मिलाकर देखा जाए, तो मंजेश्वर 2026 के विधानसभा चुनाव में उन सीटों में शामिल हैं, जहां से राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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