चित्रकूट में महिलाओं से प्रियंका गांधी ने कहा, सुनो द्रौपदी अब शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे

चित्रकूट में महिलाओं से प्रियंका गांधी ने कहा, सुनो द्रौपदी अब शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे

महिलाओं के साथ प्रियंका ने अपना संवाद लड़की हूं लड़ सकती हूं। प्रियंका ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत खराब है। लोग लाइन में खड़े खड़े अपनी जान गंवा दे रहे हैं। प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि कोरोना काल में भाजपा सरकार पूरी तरीके से फेल रही।

अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस सक्रिय हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लगातार उत्तर प्रदेश का दौरा कर रही है। वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जा रही हैं। इसी कड़ी में वह चित्रकूट पहुंचीं जहां उन्होंने मत्स्यगजेन्द्रनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया तथा मंदाकिनी की जलधारा पर बने मंच से महिलाओं के साथ संवाद किया। उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी इस बार महिला सशक्तिकरण को प्रमुख हथियार बनाकर चुनावी मैदान में उतर रही हैं। चित्रकूट में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया।

महिलाओं के साथ प्रियंका ने अपना संवाद लड़की हूं लड़ सकती हूं। प्रियंका ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत खराब है। लोग लाइन में खड़े खड़े अपनी जान गंवा दे रहे हैं। प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि कोरोना काल में भाजपा सरकार पूरी तरीके से फेल रही। इसी कड़ी में अपने संबोधन में प्रियंका गांधी ने कहा कि "द्रौपदी अब शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे। कब तक आश लगाओगी तुम बिके हुए अख़बारों से। आपकी लड़ाई लड़ने के लिए कोई नहीं आएगा। कैसी रक्षा मांग रही हो दुश्शासन दरबारों से।" उन्होंने देश को धर्म और जाति की राजनीति से निकालकर विकास की सियासत की ओर ले जाने के लिये महिलाओं के आगे आने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, अगर देश को जातिवाद और धर्म की राजनीति से निकालकर विकास की राजनीति की ओर ले जाना है तो महिलाओं को आगे बढ़ना पड़ेगा। 

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कविता के रचयिता का ट्वीट

प्रियंका गांधी ने जिस कविता का इस्तेमाल किया उसके रचयिता पुष्यमित्र उपाध्याय ने इसको लेकर उन पर ताना मारा है। उन्होंने ट्वीट किया कि 2012 में निर्भया प्रकरण पर लिखी गई कविता का संदेश और आह्वान आपकी राजनैतिक कुंठाओं से अलग और व्यापक है। राजनैतिक संस्थानों से अनुरोध है कि कविता का प्रयोग क्षुद्र राजनैतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए कर के इसके मर्म को दूषित न करें। उन्होंने लिखा कि उद्देश्य अपनी बात पहुंचाना था, जो कि पूर्ण हुआ। संदेश स्पष्ट है कि 'सुनो द्रौपदी' कविता राजनैतिक उपयोग के लिए नहीं है। आशा करता हूं भविष्य में राजनैतिक संस्थान इसे राजनीति का जरिया नहीं बनायेंगे। विषय विवाद का नहीं साहित्यिक संपत्ति के संरक्षण हेतु गंभीरता दिखाने का है।





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