Ayodhya के रामकथा संग्रहालय को 233 साल पुरानी रामायण की पांडुलिपि भेंट की गई

Ram Katha Sangrahalay
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मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आदि कवि वाल्मीकि द्वारा रचित और महेश्वर तीर्थ द्वारा लिखित शास्त्रीय टीका के साथ यह पांडुलिपि संस्कृत (देवनागरी लिपि में) में लिखी गई है।

संस्कृति मंत्रालय ने वाल्मीकि रामायण की एक दुर्लभ 233 वर्ष पुरानी संस्कृत पांडुलिपि अयोध्या के राम कथा संग्रहालय को मंगलवार को भेंट करने की घोषणा की। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीनिवास वरखेड़ी ने प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा को वाल्मीकिरामायणम (तत्त्वदीपिकाटिका सहित) की पांडुलिपि सौंपी।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आदि कवि वाल्मीकि द्वारा रचित और महेश्वर तीर्थ द्वारा लिखित शास्त्रीय टीका के साथ यह पांडुलिपि संस्कृत (देवनागरी लिपि में) में लिखी गई है।

बयान के मुताबिक, “यह विक्रम संवत 1849 (1792 ईस्वी) की ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कृति है और रामायण की एक दुर्लभ संरक्षित पाठ्य परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है।” इसमें कहा गया, “संग्रह में महाकाव्य के पांच प्रमुख कांड, बालकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड और युद्धकांड शामिल हैं, जो इतिहास की कथात्मक व दार्शनिक गहराई को दर्शाते हैं।”

इस पांडुलिपि को पहले नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन को दिया गया था और अब इसे अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को स्थायी रूप से भेंट कर दिया गया है।

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