Allahabad High Court के पंचायत चुनाव आदेश पर सपा-कांग्रेस ने BJP को घेरा

Allahabad High Court के पंचायत चुनाव आदेश पर सपा-कांग्रेस ने BJP को घेरा
प्रतिरूप फोटो
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग को उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। विपक्षी दलों सपा और कांग्रेस ने इस अदालती फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा पर हार के डर से चुनाव टालने का आरोप लगाया। वहीं प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार विस्तृत आदेश देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देगी।

समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हार के डर से चुनाव टालने का आरोप लगाया। प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उच्च न्यायालय के इस आदेश का स्वागत किया और कहा कि सरकार विस्तृत आदेश देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देगी। कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने अदालत के फैसले को लोकतंत्र मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव नहीं कराना और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखना लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करता है। मिश्रा ने दावा किया कि भाजपा को ग्रामीण क्षेत्रों में अपने खिलाफ असंतोष सामने आने और उसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ने का डर है। उन्होंने अदालत के निर्देश के मुताबिक तीन महीने में चुनाव कराने तथा ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण के लिए विश्वसनीय आंकड़े जुटाकर पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने आरोप लगाया कि भाजपा हार के डर से पंचायत चुनाव टालती रही। उन्होंने कहा कि चुनाव मई-जून में हो जाने चाहिए थे। हसन ने दावा किया कि पंचायत और विधानसभा चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पंचायत चुनाव कराने के संबंध में न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश का स्वागत किया और कहा कि सरकार विस्तृत आदेश देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देगी। राजभर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में अदालत द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने की समयसीमा तय किए जाने के संबंध में पूछे जाने पर कहा, ‘‘हम पूरा आदेश देखने के बाद विस्तृत जवाब देंगे।’’ उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक, तीन महीने की समयसीमा के भीतर चुनाव कराने की स्थिति में प्रदेश में पंचायत चुनाव जनवरी 2027 तक संपन्न कराने होंगे। हालांकि, चुनाव की तैयारियों के बीच कई अन्य कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं, जिनका असर चुनावी प्रक्रिया की समयसारिणी पर पड़ सकता है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के चुनाव शामिल होते हैं। इन चुनावों के तहत जिला स्तर पर जिला पंचायत सदस्यों, मध्यवर्ती स्तर पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों और गांव स्तर पर ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों का निर्वाचन होता है। इस बीच, भारत के महापंजीयक ने चुनाव से गुजरने जा रहे उत्तर प्रदेश समेत चार राज्यों में एक दिसंबर से चार जनवरी 2027 तक जनगणना कराने की घोषणा की है।

पंचायत चुनाव की तैयारियों के दौरान जनगणना का यह कार्यक्रम प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त व्यस्तता पैदा कर सकता है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीट के लिए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव की प्रक्रिया भी जारी है। इन चुनावों के लिए मतदान 23 अक्टूबर 2026 तक पूरा होना है।

इसके बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं प्रस्तावित हैं और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, ये परीक्षाएं पांच फरवरी से 24 फरवरी 2027 तक आयोजित की जाएंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों तक का समय काफी व्यस्त रहने वाला है।’’ पंचायत चुनाव में ओबीसी के आरक्षण का निर्धारण भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इससे पहले, राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि ओबीसी वर्ग के आरक्षण से जुड़े पहलुओं का निर्धारण करने के लिए राज्य सरकार ने एक आयोग गठित किया है।

उन्होंने दलील दी थी कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों के चुनाव तब तक नहीं कराए जा सकते, जब तक आरक्षण निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, क्योंकि चुनाव में आरक्षण संबंधी निर्णय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ओबीसी आयोग ने अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। इससे पहले, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य निर्वाचन आयोग को उत्तर प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने यह आदेश पारित किया।

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