Advocate General विवाद में बहिष्कार पर Meghalaya High Court सख्त, स्वतः संज्ञान लिया

कोर्ट ने कहा कि इस बहिष्कार से न्याय-प्रशासन में बाधा आई और बागमारा को छोड़कर बाकी जगहों पर अदालतों में मुक़दमेबाज़ों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं था। चीफ़ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस एच एस थांगखियू की डिवीज़न बेंच ने गुरुवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। बेंच ने शिलांग बार एसोसिएशन और मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों से कारण बताने को कहा कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए, और उन्हें 13 अक्टूबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
मेघालय हाई कोर्ट ने दो बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और एग्जीक्यूटिव सदस्यों को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग को लेकर न्यायिक कामकाज के बहिष्कार के उस आह्वान पर जारी किया गया है, जिसे कोर्ट ने "पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताया है। कोर्ट ने कहा कि इस बहिष्कार से न्याय-प्रशासन में बाधा आई और बागमारा को छोड़कर बाकी जगहों पर अदालतों में मुक़दमेबाज़ों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं था। चीफ़ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस एच एस थांगखियू की डिवीज़न बेंच ने गुरुवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। बेंच ने शिलांग बार एसोसिएशन और मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों से कारण बताने को कहा कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए, और उन्हें 13 अक्टूबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
इसे भी पढ़ें: GST Council Reforms: करदाताओं की गिरफ्तारी का नियम खत्म, पांच करोड़ तक की राहत
इन दोनों एसोसिएशन ने वकीलों से 1 अक्टूबर से काम से दूर रहने का आह्वान किया था, जब तक कि सरकार राज्य के मुख्य कानूनी अधिकारी कुमार को हटा नहीं देती। यह मांग 3 अगस्त को हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों के बाद की गई थी; ये टिप्पणियां महिला वकीलों की सुरक्षा और एक महिला लॉ इंटर्न की सुरक्षा के बारे में थीं, जिसके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी। हाई कोर्ट के अनुसार, एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग के आधार पर न्यायिक कामकाज से दूर रहने को सही नहीं ठहराया जा सकता। बेंच ने कहा कि वकील ऐसे मकसद पूरे करने के लिए अदालतों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। 'एक्स-कैप्टन हरीश उप्पल बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए, बेंच ने फिर से कहा कि वकीलों को हड़ताल करने या अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करने (जिसमें टोकन हड़ताल भी शामिल है) का कोई अधिकार नहीं है।
इसे भी पढ़ें: GST Council ने टैक्स सुधारों को दी मंजूरी, अफसरों का गिरफ्तारी अधिकार खत्म
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर वकीलों ने तुरंत न्यायिक कामकाज शुरू नहीं किया, तो दूसरे ज़िला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसमें बागमारा बार एसोसिएशन को शामिल नहीं किया गया, जिसने बहिष्कार का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को भी प्रतिवादी बनाया और मेघालय बार काउंसिल के चेयरमैन को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और काम से दूर रहने वाले वकीलों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कोर्ट को जानकारी देने का निर्देश दिया। पूरी कार्यवाही इस बात पर केंद्रित है कि बहिष्कार से अदालतों के कामकाज और कानूनी प्रतिनिधित्व तक पहुंच पर असर पड़ा।
अन्य न्यूज़














