हाथ को आया मुंह ना लगा: किसी को मुख्यमंत्री की कुर्सी की बजाए मिली जेल, कोई करता रहा चार्टेड प्लेन का इंतजार, CM इन वेटिंग वाली लिस्ट में और भी हैं कई नाम

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अभिनय आकाश । Jul 1 2022 7:16PM

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का उप-मुख्यमंत्री बनना फडणवीस के साथ ही उनके समर्थकों को भी असहज कर रहा है। लेकिन इतिहास में पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं जब सीएम की कुर्सी का इंतजार करते रहे राजनेताओं को ये हासिल नहीं हो पाया है।

महाराष्ट्र की सियासी फिल्म के 11वें दिन की शाम यानी गुरुवार को चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ। मुख्यमंत्री पद के कथित दावेदार देवेंद्र फडणवीस ने अचानक उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। और एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने। इसी के साथ महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी अटकलों और अनुमानों पर पूर्ण विराम लग गया।  शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद सौंपे जाने की घोषणा ने हर किसी को चौंका दिया। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का उप-मुख्यमंत्री बनना फडणवीस के साथ ही उनके समर्थकों को भी असहज कर रहा है। लेकिन इतिहास में पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं जब सीएम की कुर्सी का इंतजार करते रहे राजनेताओं को ये हासिल नहीं हो पाया है। किसी को सीएम की कुर्सी की बजाए जेल मिली तो कोई चार्टेड प्लेन का इंतजार करता रह गया। 

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सीएम की कुर्सी की बजाए मिली जेल

दिसंबर 2016 को जयललिता के निधन के बाद सीएम बने पन्नीरसेल्वम ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने भी फिर मुख्यमंत्री बनने का दावा किया। शशिकला और पन्नीरसेल्व दोनों ही सरकार बनाने को लेकर तमिलनाडु के गवर्नर सी विद्यासागर राव से मुलाकात कर चुके थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 21 साल पुराने बेहिसाब प्रॉपर्टी केस में उनके खिलाफ फैसला सुनाया। इसके साथ ही शशिकला के राजनीतिक कॅरियर पर भी ग्रहण लग गया है जो तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए बैठी थी। कोर्ट के निर्णय के बाद वो अगले छह साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकती। कर्नाटक सरकार की दलील थी कि हाइकोर्ट का फैसला पूरी तरह गलत है, उसने इसे मैथमेटिकल एरर करा दिया था। एआईएडीएमके महासचिव शशिकला नटराजन का राजनैतिक भविष्य शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रही शशिकला को सीएम की कुर्सी की जगह जेल नसीब हुई। 

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मनोज सिन्हा करते रहे चार्टेड प्लेन का इंतजार और योगी ने संभाल ली कमान

साल 2017 का वो दौर जब यूपी में नरेंद्र मोदी के नाम पर सवार बीजेपी की पतवार ने पूरे दम-खम से जीत सुनिश्चित की और 312 सीटें जीती। बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद गाजीपुर से सांसद रहे मनोज सिन्हा का नाम अचानक से सुर्खियों में आ गया और उनकी बायोग्राफी भी मीडिया में तैयार होने लगी साथ ही समीकरण भी पेश किए जाने लगे। मनोज सिन्हा दिल्ली से काशी विश्वनाथ के दर्शन करने पहुंचे और वहीं चार्टेड प्लेन का इंतजार करने लगे। दिल्ली और लखनऊ की भागमभाग शुरू हुई। इसी भागमभाग में किसी ने मनोज सिन्हा के समर्थकों से कह दिया कि पंडितजी को हरी झंडी मिल गई है। समर्थकों ने मारे खुशी के मिठाइयां बांट दीं। दिल्ली में मौजूद केशव मौर्या के चेहरे की मुस्कान इस वक्त और खिलखिला उठी जब लखनऊ के एयरपोर्ट पर नारे लगे 'पूरा यूपी डोला था, केशव-केशव बोला था'। लेकिन तमाम तैरते नामों के बीच योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को यूपी की बागडोर संभाली।

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