असंतुष्ट नेताओं को सोनिया की दो टूक, कहा- फुल टाइम अध्यक्ष की तरह करती हूं काम, मीडिया के जरिए मुझसे बात करने की जरूरत नहीं

असंतुष्ट नेताओं को सोनिया की दो टूक, कहा- फुल टाइम अध्यक्ष की तरह करती हूं काम, मीडिया के जरिए मुझसे बात करने की जरूरत नहीं

सोनिया गांधी ने कहा कि इन सबके ऊपर आत्म नियंत्रण और अनुशासन की जरूरत है। अपने संबोधन में सोनिया गांधी ने इस बात का भी जिक्र किया कि कोरोना संकट के कारण अध्यक्ष के चुनाव को लेकर समय सीमा बढ़ाने पर ही थी।

लंबे वक्त के बाद आज दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के अंदर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हो रही है। इस बैठक में नए अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही साथ माना जा रहा है कि असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही सोनिया गांधी ने अपने शुरुआती संबोधन में साफ तौर पर कहा कि वह फुलटाइम अध्यक्ष के तौर पर काम करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी मुझे ऐसा कहने की अनुमति देंगे तो मैं खुद को फुल टाइम पार्टी अध्यक्ष के तौर पर रखूंगी। इसके साथ ही असंतुष्ट नेताओं पर भी उन्होंने कटाक्ष किया। सोनिया गांधी ने कहा कि हमने कभी भी सार्वजनिक महत्व और चिंता के मुद्दे को बिना सोचे समझे नहीं जाने दिया, लेकिन मीडिया के माध्यम से मुझसे बात करने की कोई जरूरत नहीं है।

माना जा रहा है कि सोनिया गांधी का बयान उन जी समूह के 23 नेताओं को जवाब है जो पार्टी से लगातार नाराज बताए जा रहे थे। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि कांग्रेस के फैसले कौन लेता है, यह उन्हें समझ में नहीं आ रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि हमारे सामने कई चुनौतियां आएंगी लेकिन हम एकजुट रहते हुए और अनुशासन का पालन करते हुए पार्टी के हितों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि हम इसमें अच्छा करेंगे। सोनिया गांधी ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी चुनावी तैयारियां आरंभ कर चुकी है। उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि संगठन मजबूत हो और उसके लिए हम सब काम कर रहे हैं। लेकिन साथ ही साथ उन्होंने बताया कि संगठन को मजबूत करने के लिए एकजुटता जरूरी होती है और पार्टी के हित को सर्वोच्च रखा जाता है। 

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सोनिया गांधी ने कहा कि इन सबके ऊपर आत्म नियंत्रण और अनुशासन की जरूरत है। अपने संबोधन में सोनिया गांधी ने इस बात का भी जिक्र किया कि कोरोना संकट के कारण अध्यक्ष के चुनाव को लेकर समय सीमा बढ़ाने पर ही थी। उन्होंने जी 23 नेताओं को नसीहत देते हुए कहा, ‘‘मैंने सदा स्पष्टवादिता की सराहना की है। मुझसे मीडिया के जरिये बात करने की जरूरत नहीं है। इसलिए हम सभी यहां खुली और ईमानदार चर्चा करते हैं। लेकिन इस चाहरदीवारी से बाहर जो बात जाए वो सीडब्ल्यूसी का सामूहिक फैसला होना चाहिए।’’ सोनिया ने जम्मू-कश्मरीर में पिछले दिनों अल्पसंख्यकों की हुई हत्या की निंदा की और कहा कि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने और इस केंद्रशासित प्रदेश में शांति एवं सौहार्द बहाल करने की जिम्मेदारी केंद्र की है। उन्होंने लखीमपुर खीरी की घटना का हवाला देते हुए कहा कि इससे किसान आंदोलन को लेकर भाजपा की सोच का पता चलता है। 

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कांग्रेस के ‘जी 23’ समूह के नेताओं की ओर से पार्टी के भीतर संवाद की मांग किए जाने और हाल के महीनों में कई नेताओं के पार्टी छोड़ने की पृष्ठभूमि में सीडब्ल्यूसी की बैठक हो रही है। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने की मांग की थी। आजाद ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि पार्टी से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए कांग्रेस कार्य समिति की तत्काल बैठक बुलाई जाए। सिब्बल ने भी पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान के बीच पिछले दिनों पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाकर इस स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए तथा संगठनात्मक चुनाव कराए जाने चाहिए।





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