तनाव नहीं, संवाद चुनो: दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष संगोष्ठी

Delhi Teachers University
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इस विमर्श को और समृद्ध करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में हरिजन सेवक संघ के संजय राय ने अपने सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने सर्वांगीण विकास, सामाजिक समावेश और संवेदनशीलता के महत्व पर बल दिया और कहा कि यही मूल्य सुदृढ़ समाज और करुणामय शिक्षकों के निर्माण का आधार हैं।

दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय ने आज विश्वविद्यालय के संगोष्ठी कक्ष में मानसिक स्वास्थ्य एवं कुशल-क्षेम पर एक प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक परिचर्चा का सफल आयोजन किया। यह आयोजन विशेष रूप से छात्रों के लिए रखा गया था, जिसका उद्देश्य भावी शिक्षकों को व्यक्तिगत विकास और व्यावसायिक सफलता के लिए आवश्यक भावनात्मक दृढ़ता और आत्म-बोध से सुसज्जित करना था।

स्वागत भाषण कुलसचिव,डॉ संजीव राय ने दिया और मुख्य उद्बोधन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रख्यात मनोवैज्ञानिक डॉ. स्वाति मुखर्जी ने दिया। उन्होंने आज के युवा वयस्कों के समक्ष उपस्थित गंभीर मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे - शैक्षणिक दबाव, व्यग्रता और दैनिक जीवन के तनाव पर प्रकाश डाला। डॉ. मुखर्जी ने रेखांकित किया कि सच्चा कुशल-क्षेम केवल रोग का अभाव नहीं है, बल्कि इसके लिए सक्रिय आत्म-मनन, सकारात्मक आत्म-संवाद और भावनात्मक संबल आवश्यक है। उन्होंने तनाव से निपटने की व्यावहारिक युक्तियाँ साझा कीं और विद्यार्थियों से मानसिक सहायता लेने से जुड़े मिथकों को तोड़ने का आह्वान किया।

इस विमर्श को और समृद्ध करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में हरिजन सेवक संघ के संजय राय ने अपने सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने सर्वांगीण विकास, सामाजिक समावेश और संवेदनशीलता के महत्व पर बल दिया और कहा कि यही मूल्य सुदृढ़ समाज और करुणामय शिक्षकों के निर्माण का आधार हैं।

इस सत्र की प्रमुख विशेषता इसका अत्यंत संवादात्मक और सुरक्षित स्वरूप रहा। मुक्त संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए एक नवाचारी 'प्रश्न-पत्रक' पद्धति अपनाई गई, जिसके अंतर्गत शिक्षार्थियों को अपने प्रश्न और निजी चिंताएँ बिना नाम बताए प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। डॉ. मुखर्जी ने प्रत्येक प्रश्न का गहरी संवेदना और व्यावहारिक परामर्श के साथ उत्तर दिया, जिससे एक आत्मीय और पूर्वाग्रह-रहित परिवेश बना जिसने सभी उपस्थितजनों को गहराई से प्रभावित किया।

इस अवसर पर उपस्थित आचार्यगण - डॉ. राजेश कुमार, डॉ. नसरुद्दीन, डॉ. शालू, डॉ. शगुफ्ता, डॉ. रिचा और डॉ. तानिया शर्मा ने इस मत पर बल दिया कि भावी शिक्षकों को अपने भविष्य के विद्यार्थियों के लिए भावनात्मक रूप से सुरक्षित कक्षा-कक्ष का निर्माण करने हेतु सर्वप्रथम स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना होगा।

कार्यक्रम का समापन औपचारिक आभार प्रस्ताव एवं समस्त परिसर समुदाय में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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