El Nino Warning | 'एक सदी का सबसे मजबूत अल नीनो', दुनिया में बढ़ेगा तापमान, भारत में सूखे और भीषण लू का खतरा!

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इस सदी के सबसे विनाशकारी अल नीनो चक्रों में से एक हो सकता है, जिससे दुनिया भर में चरम मौसम (Extreme Weather) की स्थिति पैदा होगी और वैश्विक तापमान में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
यूनाइटेड किंगडम (UK) के मौसम विभाग (Met Office) ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रशांत महासागर में आकार ले रहा अल नीनो (El Niño) एक 'अभूतपूर्व' घटना साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इस सदी के सबसे विनाशकारी अल नीनो चक्रों में से एक हो सकता है, जिससे दुनिया भर में चरम मौसम (Extreme Weather) की स्थिति पैदा होगी और वैश्विक तापमान में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। UK मेट ऑफिस द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण अल नीनो के प्रभाव से आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान "प्री-इंडस्ट्रियल दौर (औद्योगिक क्रांति से पूर्व) की तुलना में +1.5°C के पार" जा सकता है। यह स्थिति पिछले सभी मौसम रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए धरती को अत्यंत गर्म दौर में धकेल सकती है।
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विभाग ने कहा कि उसने ऐतिहासिक डेटा और कंप्यूटर सिमुलेशन का विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। मेट ऑफिस में लॉन्ग-रेंज फोरकास्टिंग (लंबी अवधि के पूर्वानुमान) के प्रमुख प्रोफेसर एडम स्काइफ ने चेतावनी दी, "मैंने अपने पूर्वानुमानों में अल नीनो का इतना तीव्र संकेत कभी नहीं देखा है।" "एक सामान्य अल नीनो के कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान 1-2 डिग्री तक बढ़ जाता है, जिसमें 2°C की वृद्धि वास्तव में एक बड़ी घटना मानी जाती है। इसका मतलब है कि अगर पूर्वानुमान सही है - और अन्य पूर्वानुमान प्रणालियां भी इसी तरह के चरम मान दिखाती हैं - तो 2026 अल नीनो और दुनिया भर में इसके जलवायु प्रभावों के हमारे हालिया अनुभव से कहीं आगे निकल जाएगा।"
भारत पर संभावित असर?
मेट ऑफिस ने कहा कि अभी अल नीनो सर्दियों में अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। साथ ही चेतावनी दी कि इसका असर सिर्फ़ उष्णकटिबंधीय इलाकों में ही नहीं, बल्कि दक्षिणी अफ़्रीकी और पूर्वोत्तर ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्रों में भी महसूस किया जाएगा। विभाग ने कहा कि जैसे-जैसे यह बढ़ेगा, भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून पर असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि देश में पहले से ही "सामान्य से काफी कम बारिश" हो रही है।
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यह बात भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 13-14 अप्रैल के दीर्घकालिक पूर्वानुमान से मेल खाती है, जिसमें कहा गया था कि देश में कुल मिलाकर दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से कम होगी। हालांकि, भारत में मानसून की गतिविधि तेज हो गई है और कई क्षेत्रों में व्यापक बारिश हो रही है।
UK के मेट ऑफिस ने कहा है कि वह स्थिति की निगरानी और विश्लेषण जारी रखेगा, जबकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले वर्षों में भारत में भीषण लू (हीटवेव) चल सकती है। मेट ऑफिस में साइंस और टेक्नोलॉजी के प्रमुख, प्रोफ़ेसर स्टीफ़न बेल्चर ने कहा, "यह बड़ा अल नीनो इस बात की याद दिलाता है कि क्लाइमेट सिस्टम में प्राकृतिक बदलाव भी हो रहे हैं, जो क्लाइमेट चेंज के दबाव को और बढ़ा रहे हैं।"
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