Supreme Court ने दिल्ली प्रदर्शन पर केंद्र को भेजा नोटिस, अवैध हिरासत पर रोक

Supreme Court ने दिल्ली प्रदर्शन पर केंद्र को भेजा नोटिस, अवैध हिरासत पर रोक
प्रतिरूप फोटो
AI-Generated

उच्चतम न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बीच मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बाधित होने पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण सभा करने वालों को अवैध हिरासत में न लिया जाए और यातायात व इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बाध्य है।

उच्चतम न्यायालय ने रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध-प्रदर्शन के कारण मेट्रो और ट्रेन सेवाओं से जुड़े अदालत के आदेश के कथित उल्लंघन पर अवमानना ​​की कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कई निर्देश दिए। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए: * शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने वाले लोगों को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाए। * दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से बहाल की जाएं।

प्रतिबंध केवल तभी लगाए जा सकते हैं, जब वे संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित ठहराए जा सकें। * कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएं। * यातायात नियमों के अधीन लोगों की आवाजाही निर्बाध रहे और बैरिकेड लगाने की आवश्यकता की समीक्षा की जाए।

* वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं पहुंचाई जाए। * कानून के अनुसार शांतिपूर्ण सभाओं की अनुमति दी जाए, विशेषकर उन क्षेत्रों के बाहर जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। * बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने के आरोपों से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं और अन्य संबंधित मामलों पर मुख्य मामलों के साथ 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

* प्रदर्शनकारियों को याद दिलाया गया कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए और दूसरों को उकसाने वाला नहीं होना चाहिए। * उच्चतम न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें लागू कराने के लिए बाध्य है।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़