Vande Mataram विवाद पर म्यूजिशियन TM Krishna की याचिका, Supreme Court ने केंद्र से मांगा जवाब

Supreme Court
ANI
अभिनय आकाश । Sep 22 2026 1:57PM

सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम के सभी छह पदों को अनिवार्य रूप से गाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रगीत न गाने पर सजा देने से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जांच की जाएगी। संगीतकार टीएम कृष्णा ने इस अनिवार्यता के खिलाफ याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र के उस फ़ैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें 'वंदे मातरम' को आधिकारिक तौर पर गाने और इसके सभी छह पद (stanzas) गाने की ज़रूरत के बारे में नियम तय किए गए थे। कोर्ट ने केंद्र से दो हफ़्ते के अंदर जवाब मांगा है और कहा है कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या राष्ट्रगीत न गाने पर कोई कानूनी या आपराधिक सज़ा हो सकती है। सुनवाई के दौरान इस बात पर बहस हुई कि सरकार 'वंदे मातरम' गाने के तरीके के बारे में किस हद तक नियम बना सकती है और क्या इसे न गाने पर सज़ा देने वाले प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा की ज़रूरत है।

इसे भी पढ़ें: चेयरमैन का 'कास्टिंग वोट' VS ट्रस्ट्स का 'वीटो', बोर्डरूम जंग में फिर क्यों गूंज रहा है 2021 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा


सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि इस चरण में कोई नोटिस जारी न किया जाए, क्योंकि ऐसा करने से सनसनी फैल सकती है। जस्टिस जॉयमाला बागची ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत है। दो पद गाए जाएं या छह, इस मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह फ़ैसला सरकार को ही लेना होगा और सवाल किया कि ऐसा फ़ैसला और कौन ले सकता है। हालांकि, कोर्ट ने याचिका पर केंद्र से दो हफ़्ते के अंदर जवाब मांगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि 'वंदे मातरम' न गाने पर सज़ा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जांच करने की ज़रूरत होगी। 

इसे भी पढ़ें: Supreme Court ने SASTRA University भूमि विवाद में तमिलनाडु सरकार से मांगा वैकल्पिक जमीन पर विचार
याचिकाकर्ता का कहना है कि लोगों की राय पर विचार किया जाना चाहिए था


सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय गीत से जुड़े बदलाव करने से पहले लोगों की राय ली जानी चाहिए थी। जस्टिस बागची इस बात से सहमत थे कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने आगे तर्क दिया कि हालिया बदलावों से 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण गाना अनिवार्य हो गया है और जो लोग इसे नहीं गाते हैं, उनके लिए कानूनी नतीजों को लेकर सवाल उठते हैं।


डॉ. एस. मुरलीधर ने क्या कहा?


याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डॉ. एस. मुरलीधर ने तर्क दिया कि यह मुद्दा लगभग 80 वर्षों में पहली बार लोगों पर थोपा जा रहा है और इसमें सज़ा के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी अनिवार्यता लागू करने से पहले लोगों के बीच व्यापक सहमति होनी चाहिए। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या इतने संकीर्ण तरीके से नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका की एक प्रति केंद्र को दी जाए और सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा।

इसे भी पढ़ें: Supreme Court को बताया गया, Ram Mandir चढ़ावा चोरी में 25 सितंबर तक Charge Sheet देगी SIT
म्यूज़िशियन टीएम कृष्णा ने केंद्र के फ़ैसले को चुनौती दी


कर्नाटक संगीत के कलाकार टीएम कृष्णा ने 'वंदे मातरम' के सभी छह छंदों को गाने से जुड़े केंद्र के सर्कुलर को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। कृष्णा ने उस हालिया संशोधन को भी चुनौती दी है, जिसके तहत याचिका के अनुसार, 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश की गई है। याचिका में इसके पूरे संस्करण को अनिवार्य बनाने पर आपत्ति जताई गई है। इसमें दावा किया गया है कि चार छंदों में हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भक्ति का स्पष्ट ज़िक्र है और तर्क दिया गया है कि इनका गायन अनिवार्य करना भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं होगा। ये याचिकाकर्ता के तर्क हैं और कोर्ट केंद्र के जवाब के साथ इन पर भी विचार करेगा।

All the updates here:

अन्य न्यूज़