उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरें: एक अगस्त को होगा विंध्य कॉरिडोर का शिलान्यास

उत्तर प्रदेश की बड़ी खबरें: एक अगस्त को होगा विंध्य कॉरिडोर का शिलान्यास

उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने बताया कि चंबल नदी धौलपुर में कचलाब्रिज बदायूं, शारदा नदी पलियाकलॉ खीरी, घाघरा नदी अयोध्या, तुरतीपार बलिया, तथा क्वानों चन्द्रदीपघाट गोण्डा में खतरे के जलस्तर से ऊपर बह रही है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार द्वारा आज भी कई बड़े निर्णय लिए गए। आइए पढ़ते हैं उत्तर प्रदेश की दिनभर की आज की बड़ी खबर।

177 मेडिकल टीमें, 425 नावें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगाई गईं

उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त रणवीर प्रसाद ने वर्षा की स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि प्रदेश के वर्तमान में सभी तटबन्ध सुरक्षित हैं, कहीं भी किसी प्रकार की चिन्ताजनक परिस्थिति नहीं है। गत 24 घंटे में प्रदेश में 29.6 मिमी औसत वर्षा हुई है, जो सामान्य वर्षा से 10.8 मिमी के सापेक्ष 274 प्रतिशत है। इस प्रकार प्रदेश में 01 जून, 2021 से अब तक 318.4 मिमी औसत वर्षा हुए, जो सामान्य वर्षा 334.3 मिमी के सापेक्ष 95 प्रतिशत है। 

उन्होंने बताया कि चंबल नदी धौलपुर में कचलाब्रिज बदायूं, शारदा नदी पलियाकलॉ खीरी, घाघरा नदी अयोध्या, तुरतीपार बलिया, तथा क्वानों चन्द्रदीपघाट गोण्डा में खतरे के जलस्तर से ऊपर बह रही है। प्रदेश के वर्षा से प्रभावित जनपदों में सर्च एवं रेस्क्यू हेतु एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा पीएसी की कुल 37 टीमें तैनाती की गयी है, 425 नावें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगायी गयी है तथा 177 मेडिकल टीमें लगायी गयी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ द्वारा 152 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। 

प्रसाद ने बताया कि अब तक कुल 3675 ड्राई राशन किट वितरित किए गये हैं। अब तक कुल 14,180 फूड पैकेट वितरित किए गए हैं। प्रदेश में 391 बाढ़ शरणालय तथा 617 बाढ़ चौकी स्थापित की गयी है। प्रदेश में विगत 24 घंटों में स्थापित किए गए पशु शिविर की संख्या 6 अब तक कुल 246 पशु शिविर स्थापित किये गये हैं। विगत 24 घंटों में पशु टीकाकरण की संख्या 2322 तथा अब तक कुल पशु टीकाकरण की संख्या 1,08,811 है। 

इसे भी पढ़ें: UP के बाराबंकी में भीषण सड़क हादसा, 18 लोगों की मौत 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ का संदेश

महिला एंव बाल विकास मंत्री स्वाति सिंह की अध्यक्षता में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित योजनाओं समीक्षा की गई। उन्होंने निर्देश दिया कि पति की मृत्यु -परान्त निराश्रित महिला पेंशन में अधिक से अधिक लाभार्थियों को लाभान्वित करने हेतु अभियान चलाया जाय तथा प्रत्येक 15 दिन में तहसील/ब्लाक स्तर पर कैम्प लगाकर सभी पात्र लाभार्थियों के आवेदन पत्रों को पूर्ण कराया जाये। मीडिया एंव अन्य माध्यमों से कैम्प लगाने के संबंध में प्रचार-प्रसार किया जाये तथा जनप्रतिनिधियों का अपेक्षित सहयोग प्राप्त किया जाये।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की समीक्षा करते हुए मंत्री ने सबसे कम प्रगति वाले 10 जनपदों को सचेत करते हुए प्रगति में सुधार हेतु निर्देशित किया गया। बैठक में टॉप 10 जपनदों को कहा गया कि उनके लिये निर्धारित लक्ष्य कम है और अधिक प्रयास किये जाने आवश्यक हैं। साथ ही सबसे खराब प्रदर्शन वाले 10 जनपदों से स्पष्टीकरण की मांग करते हुये उन्हें आगामी 1 माह में प्रगति में सुधार हेतु निर्देशित किया गया।

विभाग के द्वारा अवगत कराया कि वन स्टाप सेंटर के भवन निर्माण का कार्य 52 जनपदों में प्रारम्भ हो गया है। जिस पर स्वाति सिंह द्वारा समस्त जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि समस्त जनपदों में वन स्टाप सेन्टर के भवन का निर्माण कार्य 03 माह में अनिवार्य रूप से पूर्ण करा दिया जाये। उनके द्वारा 181 महिला हेल्पलाइन योजना की समीक्षा के दौरान निर्देश दिये गये कि वन स्टाप सेन्टर पर आवासित किये जाने वाले 112-यूपी के पीआरवी पर महिला कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं यथा-181 महिला हेल्पलाइन, बेटी बचाओ बेटी पढाओ आदि की ब्रान्डिंग की जाये।

स्वाति सिंह द्वारा जनपदीय अधिकारियों को निदेर्शित किया गया कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिये समाज के सभी वर्गों यथा-ग्राम प्रधान व अन्य जन प्रतिनिधियों, शिक्षकों, विभिन्न धर्मों के प्रमुख व्यक्तियों व छात्रों के साथ संवाद स्थापित किया जाये। इस हेतु आनलाइन कार्यक्रमों का भी आयोजन कराया जाये। प्रत्येक माह जनपद में इस योजना के अर्न्तगत एक बडा आयोजन कराना सुनिश्चित किया जाये।

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना योजनान्तर्गत कोविड-19 से पीड़ित ऐसे बालक/बालिका जिनकी माता या पिता की कोरोना से मृत्यु हो गयी है ऐसे पात्र 4484 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अन्तर्गत धनराशि वितरण कराने से अवगत कराया गया। जिस पर स्वाति सिंह द्वारा निर्देश दिये गये कि योजनान्तर्गत प्राप्त लम्बित आवेदन पत्रों का 15 दिन के अन्दर जिला टास्क फोर्स द्वारा अनुमोदित कराकर तत्काल धनराशि लाभार्थियों के खाते में भेजी जाये। स्वाति सिंह द्वारा ने निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत जिन लाभार्थियों को लैपटाप दिये जाने हैं उनको विशेष आयोजन करते हुए बंटवाया जाये तथा कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाये। प्रदेश में एक-साथ कार्यक्रम करते हुये लैपटाप वितरण का कार्यक्रम निर्धारित किये जाने का निर्णय लिया गया।

निदेशक महिला कल्याण मनोज राय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाली योजना है। पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला पेंशन योजना के अन्तर्गत लगाये जाने वाले कैम्पों में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के आवेदन पत्र भी भराये जायें। उन्होनें कहा समस्त जनपदीय अधिकारी सक्रिय हो जायें तथा बाल सेवा योजना की तरह अन्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी करें तथा दिये गये लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु समयबद्ध कार्ययोजना पर कार्य करें।

प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग वी हेकाली झिमोमी द्वारा समीक्षा के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देश दिये कि समस्त जिला प्रोबेशन अधिकारी अपने जनपद में सप्ताह में कम से कम 02 दिन संस्थाओं का निरीक्षण अवश्य करें। उन्होंनें कहा कि संस्थाओं के जीर्णोद्धार तथा रखरखाव हेतु निदेशालय से आवंटित धनराशि का पूर्ण उपयोग करते हुए तत्काल संस्थाओ का सुदृढ़ीकरण करायें तथा साज-सज्जा एंव सफाई आदि की विशेष व्यवस्था की जाये। बच्चों के खेलने व मनोंरंजन के प्रबंध तत्काल सुनिश्चित किये जायें। उनके द्वारा यह जोर दिया गया कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के प्रचार प्रसार पर अधिक प्रयास करने की आवश्यक्ता है। इसमें जनप्रतिनिधियों यथा सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख आदि का सहयोग लिया जाये। प्रत्येक ग्राम सभा व ब्लॉक के स्तर पर योजना के प्रचार प्रसार तथा आवेदन प्राप्त करने के उद्देश्य से कैम्प लगाया जाये जिसके बारें में समस्त स्तरों पर जनप्रतिनिधियों व मीडिया के माध्यम से पहले ही भरपूर प्रचार प्रसार करते हुये आम जन मानस तक पहुंच बढ़ाई जाये। योजनाओं को लोकप्रिय बनाने हेतु प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना आवश्यक है।

हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्त एवं लेखा सेवा समूह के अधिकारी अजय जौहरी को वित्त नियंत्रक, हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर के पद का अतिरिक्त प्रभार प्रदान किया है। इस सम्बंध में वित्त विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। श्री जौहरी वर्तमान में अपर निदेशक, कोषागार, कानपुर मण्डल कानपुर में कार्यरत हैं। उन्हें वित्त नियंत्रक, हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर का प्रभार उनके वर्तमान कार्य के साथ-साथ प्रदान किया गया है। 

इसे भी पढ़ें: 'मिशन उत्तर प्रदेश' को लेकर केशव प्रसाद मौर्य का दावा, भाजपा 325 से अधिक सीट जीतेगी 

अन्तर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर मिलेगा वयोश्रेष्ठ सम्मान

प्रमुख सचिव समाज कल्याण के रविन्द्र नायक ने बताया कि इस वर्ष 1 अक्टूबर, 2021 को अन्तर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर भारत सरकार द्वारा वयोश्रेष्ठ सम्मान दिया जायेगा। वयोश्रेष्ठ सम्मान ऐसे लोगों को दिया जाता है, जिनकी उम्र 70 वर्ष से ऊपर है। इसमें ऐसे व्यक्तियों व स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन किया जाता है, जिन्होंने वरिष्ठ नागरिकों की गुणवत्तापूर्ण जीवनशैली का नेतृत्व करने व उन्हें शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक व सामाजिक दृष्टि से सक्षम बनाने हेतु अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हो और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य किया हो।

पारिवारिक पेंशन स्वीकृत किए जाने का निर्णय

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों, कम्पनियों, निगमों में प्रतिनियुक्त सरकारी सेवकों के संविलयन के पश्चात उनके परिवार को पारिवारिक पेंशन स्वीकृत किए जाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव वित्त एस. राधा चौहान द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है।

अपर मुख्य सचिव वित्त द्वारा समस्त अपर मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष तथा प्रमुख कार्यालयाध्यक्ष को निर्देशित पत्र में कहा गया है कि शासनादेश दिनांक 04 मार्च, 1971 से आच्छादित सरकारी सेवकों के सार्वजनिक उपक्रमों, कम्पनियों, निगमों में संविलयन के प्रकरणों में, यदि संबंधित सार्वजनिक उपक्रमों, कम्पनियों, निगमों में पारिवारिक पेंशन अनुमन्य नहीं है, तो राज्य सरकार द्वारा पारिवारिक पेंशन का भुगतान किया जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा तथा इन आदेशों के उपरान्त किसी प्रकार के एरियर का भुगतान देय नहीं होगा। इन आदेशों से ऐसे प्रकरण भी आच्छादित होंगे जिनमें संबंधित सेवानिवृत्त कार्मिक की मृत्यु इस शासनादेश के निर्गत होने की तिथि के पूर्व हो चुकी हो।

शासन के समक्ष ऐसे प्रकरण आये हैं जिनमें सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों, कम्पनियों, निगमों में प्रतिनियुक्त सरकारी सेवकों का संविलयन शासनादेश दिनांक 04 मार्च 1971 के प्रावधानों के अंतर्गत हुआ है और उक्त शासनादेश में पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था नहीं होने के कारण ऐसे कार्मिकों की मृत्यु के उपरान्त उनके परिवारों को पारिवारिक पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है। ऐसे प्रकरणों में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए यह शासनादेश निर्गत किया गया है।

केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में लगाया जनता दर्शन

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज जनपद प्रयागराज के अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद सर्किट हाउस में जनसुनवाई की, प्रयागराज सहित अन्य क्षेत्रों से आये लोगों की समस्याओं को सुना और सम्बन्धित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित गति से समाधान करने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

मौर्य ने प्रयागराज में ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित गुरूदक्षिणा कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के पश्चात स्कूल प्रांगण में पौधारोपण भी किया और उन्होने लोगों से अपील की कि पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिये ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करें तथा वृक्षों को संरक्षित व सुरक्षित बनाये रखने के हर सम्भव प्रयास करें।

केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में तारागंज स्थित भगवान नाग वासुकी मन्दिर में शंख सम्राट एवं कजरी दंगल प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र में सम्मिलित होकर अपने प्रेरक उद्बोधन से लोगों में नयी उर्जा व नये उत्साह का संचार किया और कहा कि दंगल प्रतियोगिता जैसे आयोजनों को जीवन्त बनाये रखने की महत्वपूर्ण परम्परा का जो निर्वाह किया जा रहा है, सराहनीय है। इससे जहां शरीर को स्वस्थ बनाये रखने की एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा होती है, वहीं आपसी सामंजस्य के माहौल को बढ़ावा मिलता है।

वर्चुअल मैंगो बायर सेलर मीट सम्पन्न

उत्तर प्रदेश के आम को भूटान के बाजारों में स्थापित करने हेतु हॉफेड द्वारा एपीडा नई दिल्ली, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग एवं भारतीय दूतावास-भूटान के सहयोग से आज वर्चुअल मैंगो बायर सेलर मीट का आयोजन कराया गया।

इस आयोजन में रूचिरा कम्बोज, भारतीय राजदूत भूटान द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि भूटान के बाजारों में उत्तर प्रदेश से आम निर्यात किये जाने की पर्याप्त सम्भावनाएं विद्यमान है। भूटान द्वारा गत वर्ष की तुलना में दो गुना भारतीय आम का आयात इस वर्ष किया गया है। अतः अपेक्षा की गयी कि उत्तर प्रदेश के आमों को भूटान के बाजारों में निर्यात किया जाय। इस आयोजन हेतु हॉफेड द्वारा भेजे गये 1 टन आम की गुणवत्ता की तारीफ करते हुए प्रदेश सरकार एवं हॉफेड के सहयोग की सराहना की गयी। 

इसे भी पढ़ें: विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को साधने में जुटी भाजपा 

एम.वी.एस. रामी रेड्डी, अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उप्र शासन द्वारा अपने उद्बोधन में भारतीय दूतावास एवं एपीडा के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा आश्वासन दिया गया कि प्रदेश सरकार भूटान के आयातकों को उत्तर प्रदेश से आम आयात करने हेतु आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।

अंजनी कुमार श्रीवास्तव, प्रबन्ध निदेशक हॉफेड द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि हॉफेड के पास औद्यानिक उत्पादकों का ग्रामीण स्तर पर बहुत अच्छा नेटवर्क उपलब्ध है। अतः हॉफेड द्वारा आम निर्यात हेतु बैकवर्ड लिंकेज हेतु पूर्ण सहयोग किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में दो आधुनिक पैक हाउस स्थापित हैं, जिनसे उच्च गुणवत्ता का आम निर्यात हेतु तैयार किया जा सकता है। श्रीवास्तव द्वारा उल्लिखित किया गया कि भूटान को निर्यात करने हेतु हवाई भाड़ा अत्यधिक लगभग रु 270 प्रति किग्रा है, अतः भूटान को सड़क मार्ग से निर्यात करने हेतु प्रेरित किया जाना चाहिए जिससे आम उत्पादकों को अच्छा लाभ प्राप्त हो सके तथा भूटान के उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उत्तर प्रदेश का आम प्राप्त हो सकेगा। साथ ही आश्वासन दिया गया कि भूटान के आयातकों को हॉफेड द्वारा पूर्ण सहयोग प्रदान किया जायेगा।

एपीडा के अधिकारियों द्वारा प्रदेश सरकार एवं हॉफेड द्वारा आम निर्यात हेतु किये गये प्रयास की सराहना करते हुए आश्वासन दिया गया कि आगामी वर्षों में उत्तर प्रदेश के आम का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार भूटान के बाजारों में किया जायेगा। एपीडा द्वारा भी सड़क मार्ग से भूटान को निर्यात किये जाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम में डा आरके तोमर, निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उप्र एवं एसके सुमन, प्रभारी-विपणन हॉफेड भी उपस्थित रहे।

जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

उ.प्र. राज्य महिला आयोग में ’’परित्याग की गयी महिलाओं के अधिकार एवं महिलाओं से सम्बन्धित विभिन्न कानूनों की जानकारी’’ विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन उ.प्र. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम की अध्यक्षता में किया गया। उक्त कार्यशाला का शुभारम्भ आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम, उपाध्यक्ष (द्वय) सुषमा सिंह एवं अंजु चौधरी द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

जागरूकता कार्यक्रम में भागीरथ वर्मा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष कार्याधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ ने उपस्थित होकर परित्याग की गयी महिलाओं एवं महिलाओं से सम्बन्धित विभिन्न कानूनों की जानकारी के साथ-साथ महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम-2005, दहेज प्रतिषेध कानून-1961, बच्चों का लौंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पास्को) 2012, महिलाओं का कार्यस्थल पर यौन शोषण (निवारण प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013, गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971, पूर्व गर्भाधान और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी गयी, साथ ही उनके द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि प्रदेश के सभी जनपदों में उनका कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नाम से संचालित है जहां पर महिलाओं को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। भागीरथ वर्मा ने महिला आयोग द्वारा जनपद में आयोजित की जाने वाली महिला जनसुनवाई में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संचालित योजनाओं के माध्यम से पीडित महिलाओं को विधिक सहायता उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। कार्यक्रम में उपस्थित आयोग के मा. पदाधिकारियों द्वारा विभिन्न कानूनों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में उ.प्र. राज्य महिला आयोग के मा. पदाधिकारियों की मासिक बैठक का आयोजन किया गया। मा. अध्यक्ष द्वारा मासिक बैठक में माह जुलाई के दिनांक 09.07.2021 को आयोग पदाधिकारियों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों के महिला चिकित्सालयों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के निरीक्षण के कार्यों व प्रदेश के विभिन्न जनपदों में दिनांक 23.07.2021 को आयोजित एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर कार्यक्रम की समीक्षा की गयी। बैठक में आयोग द्वारा आगामी माह में किये जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया गया।

सदस्य सचिव अर्चना गहरवार द्वारा बैठक में उपस्थित सभी मा. पदाधिकारियों का धन्यवाद कर बैठक का समापन किया गया। कार्यक्रम/बैठक में उ.प्र. राज्य महिला आयोग की मा. अध्यक्ष विमला बाथम, मा. उपाध्यक्ष (द्वय) सुषमा सिंह, अंजु चौधरी तथा मा. सदस्यगण अनीता सिंह, सुमन चतुर्वेदी, इन्द्रवास सिंह, सुनीता बंसल, निर्मला द्विवेदी, राखी त्यागी, निर्मला दीक्षित, मीना कुमारी, डॉं. कंचन जायसवाल, पूनम कपूर, मनोरमा शुक्ला, ऊषारानी, अनीता सचान, शशि मौर्या, कुमुद श्रीवास्तव, रामसखी कठेरिया, संगीता तिवारी, अवनी सिंह, अर्चना, मिथिलेश अग्रवाल, रंजना शुक्ला, वित्त एवं लेखाधिकारी स्वाती वर्मा एवं भागीरथ वर्मा, मा. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष कार्याधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सहित अन्य गणमान्य पदाधिकारी/अधिकारी उपस्थित रहे।

70 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार

उत्तर प्रदेश की स्थानीय कला, शिल्प और समुदायों के पारंपरिक कौशल को संरक्षित और विकसित करके स्थानीय स्तर पर रोजगार में वृद्धि हेतु शुरू की गई एक जिला-एक उत्पाद योजना (ओ.डी.ओ.पी.) राज्य सरकार का अभिनव प्रयास है। ओडीओपी वित्त पोषण सहायता योजना के तहत अब तक 5565 करीगरों एवं इकाइयों को 707 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराते हुए 70 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा गया।

यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में प्रदेश के नौ जनपदों गाजियाबाद, मैनपुरी, मऊ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, आगरा, मुरादाबाद तथा भदोहीमें 73.54 करोड़ रुपये की लागत से सामान्य सुविधा केन्द्र (सीएफसी) की स्थापना का कार्य भी शुरू हो चुका है। भदोही में कालीन उद्यमियों की सुविधा के लिए 868.70 लाख रुपये की लागत से रॉ-मटेरियल प्रोसेसिंग सेंटर की स्थापना कराई जा रही है। मुरादाबाद में ओडीओपी उत्पाद धातु शिल्प के निर्यात को बढ़ाने हेतु 958.43 लाख रुपये से हाईब्रिड इन्टरप्राइजेस रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सीफसी की स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

सिंह ने बताया कि इसी प्रकार गाजियाबाद में ओडीओपी प्रोडेक्ट यांत्रिकी उत्पाद हेतु 1488.63 लाख की लागत से स्थापित की जा रही है। सीएफसी में उद्यमियों के लिए मार्डन टूल रूम, रिसर्च एण्ड डेवलेपमेंट लैब, मैटेरियल टेस्टिंग आदि की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही मिर्जापुर में कालीन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 757.42 लाख रुपये की लागत से वूल यार्न प्रोसेसिंग सेंटर तथा रॉ-मेटेरियल बैंक से संबंधित सीएफसी स्थापित होगी। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में जनपद मैनपुरी में 100.55 करोड़ रुपये से ओडीओपी उत्पाद तारकशी कला तथा वस्त्र सिलाई एवं कढ़ाई हेतु स्थापित होने वाली सीएफसी के अंतर्गत कामन टूल रूम, रॉ-मटेरियल बैंक तथा डिजाइन एण्ड डिस्प्ले सेंटर की सुविधा उपलब्ध होगी।

सिंह ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का उत्तर प्रदेश से काष्ठ शिल्प उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के विजन को गति प्रदान करने हेतु बिजनौर में 996.00 लाख की लागत से वुड सीजनिंग एण्ड केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट एवं एडवांस टूल्स रूम के लिए सीएफसी स्थापित कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त मऊ में 684 लाख रुपये तथा आगरा में 989 लाख रुपये की लागत से ओडीओपी उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए सामान्य सुविधा केन्द्र की स्थापना का कार्य शुरू हो चुका है।

सिंह ने बताया कि ओ.डी.ओ.पी. योजना के अन्तर्गत शुरूआती दौर में प्रशिक्षण एवं उन्नत किस्म के टूलकिट उपलब्ध कराकर पारंपरिक कारीगरों के व्यवसाय को बढ़ाने में सहयोग दिया गया। ओडीओपी कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों के चिन्हित उत्पादों के सर्वोन्नमुखी विकास को प्राथमिकता देते हुए उचित दाम पर कच्चा माल उपलब्ध कराने के साथ ही हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों के उत्पादों की राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मांग बढ़ाने हेतु प्रदेश के प्रत्येक जनपद में सामान्य सुविधा केन्द्र की स्थापना कराई जा रही है। 

इसे भी पढ़ें: यूपी के बड़े चुनावी ‘खिलाड़ी’अमित शाह फिर ‘पधार’ रहे हैं लखनऊ 

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 17 परियोजनाओं हेतु धनराशि स्वीकृत

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 17 परियोजनाओं के क्रियान्वयन हेतु 2440.1762 रूपये (24 करोड़ 40 लाख 17 हजार छः सौ बीस रुपए) की धनराशि स्वीकृत की है। यह धनराशि महिला लाभार्थियों (सामान्य वर्ग) के लिए स्वीकृत की गई है। इस धनराशि का व्यय 17 परियोजनाओं यथा-फिनफिश हैचरियों की स्थापना,नये रियरिंग तालाबों का निर्माण, खारे पानी में तालाबों का निर्माण, खारे पानी में नये तालाबों में निवेश, नये तालाबों का निर्माण, वृहद आरएएस/बायोफ्लॉक का निर्माण, मीठे जल में बायोफ्लॉक तालाबों का निर्माण, मध्यम आकार आरएएस बायोफ्लॉक का निर्माण, लघु आकार आरएएस/बायो फ्लॉक का निर्माण एवं बैकयार्ड लघु आरएएस का निर्माण के साथ ही इंसुलेटेड वाहन, मोटर साइकिल विद आइस बॉक्स, साइकिल विद आइस बॉक्स, जीवित मत्स्य विक्रय केन्द्र,लघु मिलों की स्थापना,मत्स्य कियोस्क की स्थापना तथा मत्स्य रोग निदान हेतु मोबाइल लैब/क्लीनिक में किया जाएगा।

इस संबंध में मत्स्य विभाग द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है। शासनादेश में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस एवं दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाये। यह भी कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार धनराशि लाभार्थियों के खाते में सीधे अंतरण हेतु पीएफएमएस/डीबीटी प्लेटफार्म का उपयोग करते हुए की जाए।

निर्माणाधीन राजकीय महाविद्यालय के भवन निर्माण हेतु राशि स्वीकृत

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु प्रदेश में निर्माणाधीन राजकीय महाविद्यालय के भवन निर्माण हेतु कुल 1397.44 लाख (तेरह करोड़ सत्तानवे लाख चौवालिस हजार) रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। निर्माणाधीन राजकीय महाविद्यालय के भवन निर्माण हेतु स्वीकृत धनराशि में से पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला महाविद्यालय फरह, (नगला) चंद्रभान, मथुरा हेतु 197.44 लाख रुपए, राजकीय महिला महाविद्यालय मुसाफिरखाना, अमेठी हेतु 300.00 लाख रुपए, सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार राजकीय महाविद्यालय, पाबला, बागपत हेतु 300.00 लाख रुपए, राजकीय महाविद्यालय गढ़मुक्तेश्वर हापुड़ हेतु 300.00 लाख रुपए तथा राजकीय महिला महाविद्यालय परसवां खंडासा, अयोध्या हेतु 300.00 लाख रुपए स्वीकृत किया गया है।

जारी शासनादेश में निर्देश दिया गए हैं कि स्वीकृति की जा रही धनराशि का उपयोग उसी कार्य एवं मद में किया जाएगा जिस कार्य एवं मद हेतु धनराशि स्वीकृत की जा रही है। धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2022 तक किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। प्रायोजना का कार्य अनुमोदन लागत में ही यथाशीघ्र पूर्ण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए तथा भविष्य में योजना का कोई भी पुनरीक्षण स्वीकार नहीं होगा। प्रायोजना अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की द्विरावृत्ति को रोकने की दृष्टि से प्रायोजना की स्वीकृति से पूर्व विभाग द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा कि यह कार्य पूर्व में किसी अन्य योजना/कार्यक्रम के अंतर्गत ना तो स्वीकृत है और ना वर्तमान में किसी अन्य योजना/कार्यक्रम में अच्छादित किया जाना प्रस्तावित है।

एक अगस्त को होगा विंध्य कारिडोर का शिलान्यास

पर्यटन के क्षेत्र में उप्र को विश्वमानचित्र पर अलग पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन विकास की विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। फिर चाहें अयोध्या को विश्व स्तरीय सुविधाओं युक्त नगरी बनाने का कार्य हो या बनारस में काशी विश्वनाथ कारिडोर का कार्य, धार्मिक नगरी मथुरा में किया जा रहा विकास कार्य हो या फिर जनपद मिर्जापुर में माँ विध्यवासिनी के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं को सुविधायें प्रदान करने के विंध्य कारिडोर का कार्य, प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य उप्र को पर्यटन का मुख्य केन्द्र बनाना है।

जनपद मिर्जापुर में एक अगस्त को गृहमंत्री भारत सरकार अमित शाह तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विंध्य कारिडोर के शिलान्यास का कार्यक्रम प्रस्तावित है। कार्यक्रम को भव्य स्वरूप देने के लिए प्रदेश के पर्यटन मंत्री डा नीलकंठ तिवारी ने सोमवार को विंध्य कारिडोर का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को शिलान्यास की तैयारी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों के मानकों में प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्तम प्रदेश बना हुआ है। उन्होंने कहा कि विंध्य कारिडोर बनने से माँ विध्यवासिनी मंदिर का भव्य एवं दिव्य रूप पूरे विश्व में अवलोकित होगा। माँ विध्यवासिनी के भव्य रूप साकार हो जाने पर यहां दर्शनार्थियों की संख्या में अप्रत्याशित इजाफा होगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना ने किया गरीबों का सपना साकार

प्रत्येक नागरिक का सपना होता है कि उसकीअनिवार्य आवश्यकताओं के साथ ही उसका अपना एक पक्का मकान हो, जिसमें वह अपने परिजनों सहित आराम का जीवन व्यतीत कर सके। परन्तु गरीबी व लाचारी के चलते सभी का यह सपना सकार नही हो पाता। इसी के दृष्टिगत शासन द्वारा ‘प्रधानमन्त्री आवास योजना‘ संचालित की जा रही है। इस योजना से ऐसे गरीब असहाय जिनके पास अपना पक्का मकान नही था, गरीबी और निर्धनता के कारण अपना आशियाना बनाने में असमर्थ थे और उनका परिवार झोपड पट्टी, कच्चे मकान में रहने के लिए विवश था, को इस योजना का लाभ देकर सरकार द्वारा गरीबों का सपना साकार किया जा रहा है। अब तक लाखों लोगों को इस योजना का लाभ दिया जा चुका है। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना‘ गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही है।

(1) जनपद उन्नाव के विकासखण्ड सी सरोसी के अन्तर्गत ग्राम पंचायत मरौंदा मझवारा के निवासी छेददू पुत्र चिरंजीव बताते हैं कि पहले उनका मकान कच्चा एवं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। मकान में दरवाजे पल्ले आदि न होने के कारण घर में जानवरों के घुसने का भय हमेशा बना रहता था। जिसके कारण हमकों व हमारे परिवार को अत्याधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। छेददू बताते है कि जबसे उन्हे प्रधानमन्त्री आवास योजना का लाभ मिला उनके जीवन में उल्लास छा गया । आज परिवार सहित उसी मकान में आराम से जीवन यापन कर रहे है। उन्होने प्रधानमन्त्री को एवं प्रदेश के मुख्यमन्त्री को कोटि-कोटि धन्यवाद ज्ञापित किया है।

(2) श्रीपाल पुत्र प्रीतम निवासीग्राम पंचायत मरौंदा मझवारा,विकासखण्ड सी सरोसी, जनपद उन्नाव का मकान कच्चा एवं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। बरसात का पानी छत से टपकता रहता था, जिस कारण उनके बच्चे ठीक तरह से सो नही पाते थे। वित्तीय वर्ष 2016-17 में श्रीपाल को प्रधानमन्त्री आवास योजना का लाभ मिला। वर्तमान समय में श्रीपाल का परिवार उसी मकान में उल्लासपूर्वक निवास कर रहा है। लाभार्थी श्रीपाल का कहना है कि प्रधानमन्त्री के नेतृत्व एवं निर्देशन के कारण उन्हे प्रधानमन्त्री आवास का लाभ प्राप्त हुआ। इस हेतु उन्होने भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति आभार ज्ञापित किया है। 

इसे भी पढ़ें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद के नए डीएम बनाए गए विजय किरण आनंद 

(3) जनपद प्रयागराज के विकासखण्ड बहादुरपुर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत कोटवा के निवासी चमेला देबी पत्नी स्व ढकेलू बताती हैं कि पहले उनके पास एक मड़हा था, जिसमें किसी तरह वह अपना गुजारा करती थी। बरसात के दिनों में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना होता था, क्योकि बरसात होने पर मड़हे से पानी टपकता था, जिसके कारण वह एक कोने में बैठी रहती थी। जाड़े में भी अत्याधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था क्योंकि मड़हे के अन्दर हवा आती थी। चमेला देबी यह भी बताती है कि अपना पक्का मकान न होने के कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा, क्योकि पति की मृत्यु भी हो गयी थी। उसी दौरान जिले के अधिकारियों का दौरा हमारे गांव में हुआ। हमारी दयनीय स्थित को देखते हुए अधिकारियों ने हमारा आवास पक्का बनाये जाने का आश्वासन दिया और प्रधानमन्त्री आवास योजना के अन्तर्गत मुझे आवास मिला। आवास की धनराशि का सदपयोग करते हुए स्वयं श्रम कर अपना आवास पूर्ण कराया। चमेला देबी ने इस उपकार के लिए प्रधानमन्त्री एवं प्रदेश के मुख्यमन्त्री के प्रति आभार ब्यक्त किया है।

(4) संतकुमारी पत्नी मंशाराम निवासी ग्राम- मोतिगरपुर, विकास खण्ड- बसखारी, तहसील- टाडा, जनपद- अम्बेडकरनगर की निवासिनी है। इनका परिवार अत्यन्त ही निर्धन है और छप्पर में निवास करने हेतु विवश था। इनका पक्का मकान न होने के कारण वर्षा एवं जाड़े में परिवार को काफी समस्याओं का सामना करना होता था। संतकुमारी बताती है कि मैने कभी नही सोचा था कि मेरे पास अपना पक्का मकान होगा। किन्तु सरकार द्वारा गरीब, असहाय हेतु संचालित की जा रही प्रधानमन्त्री आवास योजना (ग्रामीण) की स्थायी पात्रता सूची 2020-21 में नाम होने के कारण मुझे इसका लाभ दिया गया। शौचालय भी बनवाया गया तथा मकान निर्माण में लगने वाली मजदूरी भी मनरेगा के माध्यम से दी गयी। मेरे परिवार को सौभाग्य योजना से बिजली कनेक्शन एवं उज्जवला योजना में फ्री कनेक्शन प्राप्त हुआ। आवास एवं अन्य योजनाओं का लाभ प्राप्त होने से मुझे बहुत खुशी हुई। इसके लिए सरकार के प्रति सदैव अभारी रहूंगी।

(5) चॉद सिंह पुत्र नत्था सिंह निवासी- ग्राम पंचायत वांईपुर, विकास खण्ड- बिचपुरी, जनपद- आगरा को वर्ष 2020-21 में प्रधानमन्त्री आवास योजना से लाभान्वित किया गया। चांद सिंह की पत्नी से जब पूछा गया कि आवास बनने से पूर्व वह कैसे रहते थी। चांद सिंह की पत्नी ने भावुक होकर बताया कि पूर्व में परिवार के साथ एक झोपड़ी में रहते थे। वर्षाकाल बड़ी समस्याओं के साथ व्यतीत होता था। मेरे पति मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण पोषण करते थे। इतना रूपया नही था कि हम अपना पक्का मकान बनवा सके । तभी उन्हे मालूम हुआ कि गरीब असहाय लोगों के लिए सरकार द्वारा प्रधानमन्त्री आवास योजना चलाई जा रही है। इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराते हुए गरीब, असहायों के आवास का सपना साकार किया जा रहा है। शाम को जब हमारे पति आये तो हमने उन्हे ब्लाक जाकर योजना का लाभ लेने का आग्रह किया। दूसरे दिन वह ब्लाक गये और अधिकारियों से मिलकर अपनी ब्यथा बतायी। ब्लाक अधिकारियों द्वारा सहयोग किया गया और हमें आवास का लाभ प्राप्त हुआ। आवास निर्माण में राजमिस्त्री के साथ हम पति पत्नी बेलदारी का कार्य करते थे। शौचालय एवं बेलदारी का पैसा भी मुझे मिला। गैस सिलेण्डर व गैस चूल्हा भी मिला। ‘आज हम भी अपने पक्के मकान में परिवार सहित खुशी से रह रहे है। हम प्रधानमन्त्री व मुख्यमन्त्री को इसके लिए कोटि-कोटि धन्यवाद देते है, कि जिनके कारण हमारा सपना पूरा हुआ।

(6) जनपद कासगंज के वार्ड न0 10, मौहल्ला चन्दन नगर, पीएलजीसी कालोनी निवासी ममता पत्नी नौरंगी बताती हैं कि पहले उनके पास एक छप्पर था, वर्षा होने पर छप्पर टपकता था तथा पानी अन्दर भर जाता था, कपड़े, सामान आदि सब भीग जाता था। घर में चूल्हा तक नही जलता था। आर्थिक स्थित खराब होने के कारण छप्पर भी ठीक नही करा पाते थे। जाडे़ के दिनों में भी अत्याधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। प्रायः विमारियों से परिवार ग्रसित रहता था। ममता बताती है कि सरकार द्वारा चलायी जा रही प्रधानमन्त्री आवास योजना के अन्तर्गत जबसे उन्हे आवास का लाभ प्राप्त हुआ है, उनके परिवार का जीवन स्तर ही बदल गया है। परिवार खुशहाली के साथ उस पक्के मकान में निवास करता है। यही नही सरकार द्वारा अन्य लाभार्थी परक योजनाओं का भी लाभ उन्हे दिया गया। इसके लिए प्रधानमन्त्री को धन्यवाद है।

(7) रेनू पत्नी रूपेन्द्र राघव, मौ मुरारी नगर, खुर्जा, जनपद बुलन्दशहर बताती है कि वह पहले किराये के मकान में अपने परिवार के साथ जीवन गुजर-बसर कर रही थी। पति प्राइवेट नौकरी करते है। परिवार को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अन्तर्गत गठित स्वयं सहायता समूह में रहकर अपना व अन्य महिलाओं को वित्तीय सहायता दिलाने में अपनी भूमिका अदा करती थी, कि उसी समय डूडा के अधिकारियों से गरीब, असहायों हेतु सरकार द्वारा संचालित की जा रही प्रधानमन्त्री आवास योजना के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। उसी समय कई महिलाओं ने इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छा जाहिर की तथा आवास हेतु आवेदन किया। कुछ दिनों पश्चात प्रथम किश्त की धनराशि रू 50 हजार हमारे खाते में पाप्त हुई। इसके पश्चात द्वितीय एवं तृतीय किश्त भी समय-समय पर मेरे खाते में प्राप्त हुई, जिससे हमने अपना पक्का मकान बनाकर तैयार किया। आज हम अपने परिवार सहित पक्के मकान में रह रही हूं। इस हेतु हम प्रधानमन्त्री एवं मुख्यमन्त्री के प्रति आभार प्रकट करती हूं। 

इसे भी पढ़ें: UP में संक्रमण दर कम होने पर भी टेस्टिंग जारी, 53 जिलों में नहीं मिला एक भी नया मामला 

(8) जनपद फर्रूखाबाद के सदवाडा, कायमगंज निवासी तारावती पत्नी बृजेश का कहना है कि जब उनके पास आवास की सुविधा उपलब्ध नही थी, तब वह जर्जर मकान में परिवार सहित अपना जीवन निर्वाह कर रही थी। बरसात के मौसम में पानी बरसने पर मकान से पानी टपकने लगता था, तो रात भर बैठकर रात बीतानी होती थी। तब यही सपना होता था कि काश हमारे पास भी हमारा अपना पक्का मकान हो। उन्ही दिनों जानकारी प्राप्त हुई कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमन्त्री एवं मुख्यमन्त्री द्वारा प्रधानमन्त्री आवास योजना (शहरी) का शुभारम्भ किया गया है, तो मानो खुशी का ठिकाना ही नही रहा। डूडा कार्यालय में मेरे द्वारा आवास हेतु आवेदन दिया गया। स्वीकृति उपरान्त प्रथम किश्त व द्वितीय तथा तृतीय किश्त की धनराशि हमारे खाते में प्राप्त हुई। मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। हमारा आवास बनकर तैयार हो गया है। परिवार सहित अब उस मकान में खुशहाली के साथ अपना जीवन गुजार रहे है। इसके लिस हम प्रधानमन्त्री को एवं प्रदेश के मुख्यमन्त्री को तहेदिल से अभिनन्दन करती हूं।

ग्राम सचिवालय से ग्राम स्वराज की अवधारणा होगी साकार

उत्तर प्रदेश की 78 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित हैं। गॉवो में संचालित विभिन्न योजनाओं में ग्रामीण जनों की भागीदारी योजना की सफलता के लिए अनिवार्य हैं। प्रदेश सरकार अपने ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक निवासी के विकास के लिए प्रयासरत एवं कटिबद्ध है। शासन की सभी महत्वपूर्ण योजनाएं ग्राम पंचायतों के माध्यम से अथवा उनके सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित होती है। प्रदेश में 73वां संविधान संशोधन के अनुरूप त्रिस्तरीय पंचायतीराज प्रणाली लागू है। प्रदेश में वर्तमान में 58000 से ज्यादा ग्राम पंचायतें है। पिछले कई वर्षो से ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन या सामुदायिक भवन बनाने का कार्य चल रहा है। जिसके पीछे यह सोच है कि इन पंचायतों में नियमित कार्यालय का संचालन होना चाहिए परन्तु ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यालय संचालन के पूर्व प्रयास सफलतापूर्वक क्रियान्वित नही हो पाए है। जबकि ग्राम पंचायतों को जो दायित्व निर्वहन के लिए दिए गए है, उसे पूर्ण करने हेतु इनका अपना भवन आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार के पंचायतीराज विभाग द्वारा प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम स्वराज के लिए ग्राम सचिवालय की स्थापना हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे है। इसके अन्तर्गत ग्राम पंचायत कार्यालय भवन की यथा आवश्यकता मरम्मत/विस्तार/नवनिर्माण के कार्य किये जा रहें है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी कार्य अगले 03 माह में पूर्ण कर लिए जाने का समयबद्ध लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। लगभग 33 हजार से अधिक पूर्व निर्मित पंचायत भवनों में मरम्मत व विस्तार की आवश्यकता है, जबकि 24 हजार से अधिक नये पंचायत भवनों का निर्माण किया जाना है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत के यह भवन ग्राम सचिवालय के रूप में कार्य कर सकें, इसके लिए इनमें अनेक सुविधाओं की स्थापना की जा रही है। इन सभी ग्राम पंचायत भवनों कों इण्टरनेट से जोड़ा जा रहा है।

पंचायत कार्यालयों में ही कामन सर्विस सेंटर संचालित किया जाएगा। जिससे ग्रामीणजन प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न वर्गों के हितार्थ चलायी जा रही योजनाओं से अवगत हो सकेंगे। शासन द्वारा बी0सी0सखी के माध्यम से ग्राम पंचायतों में लोगों को बैकिंग सुविधा उपलब्ध कराने की योजना संचालित है। यह कार्य भी ग्राम पंचायत भवन से ही किया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। ग्राम स्तरीय विभिन्न विभागों के कर्मी आवश्यकतानुसार ग्राम पंचायत में एक जगह बैठकर कार्य कर सकें। इसके लिए भी ग्राम पंचायत का अपना भवन होना आवश्यक हैं।

प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन को सुसज्जित करने हेतु फर्नीचर व अन्य आवश्यक सामग्रीयों की खरीद ग्राम पंचायतें स्वयं कर सकेगी। जिनमें कम्प्यूटर, आलमारी, सोलर पैनल, इनवर्टर एवं बैटरी, सीसीटीवी कैमरे भी शामिल है। इस हेतु पंचायतों को 1,75,000 की धनराशि दी जा रही है।

प्रदेश की वर्तमान सरकार ग्राम पंचायतों में रोजगार के व्यापक अवसर भी उपलब्ध कराने जा रही है। ग्राम पंचायत कार्यालय को पूर्व में संचालित करने के लिए किए गए प्रयास पूर्ण सफल नही हो पाए क्योंकि प्रदेश की 58000 से अधिक ग्राम पंचायतों में वर्तमान में लगभग 11,008 पंचायत सचिव/ग्राम विकास अधिकारी ही कार्यरत है। जिससे एक कर्मी के पास एक से अधिक ग्राम पंचायत का कार्यभार होने के कारण वह प्रतिदिन नियमित रूप से ग्राम पंचायत में उपस्थित होकर कार्यालय का संचालन नही कर पाते थे। अतः वर्तमान सरकार ग्राम पंचायतों में कार्मिकों की कमी दूर करने के लिए इन पंचायतों में पंचायत सहायक/एकाउंटेन्ट-कम-डाटा इन्ट्री आपरेटर का चयन करने जा रही है। इसके लिए ग्राम पंचायत की प्रशासनिक समिति द्वारा उसी ग्राम पंचायत के योग्य अभ्यर्थियों में से चयन किया जाएगा। यह कर्मी ग्राम पंचायत के दिन प्रतिदिन के कार्यों का संचालन करेंगे।

पंचायत सहायक/एकाउंटेन्ट-कम-डाटा इन्ट्री आपरेटर को इसकी सेवाओं के बदले ग्राम पंचायत द्वारा रूपये छः हजार प्रतिमाह का भुगतान किया जाएगा। इन कार्मिकों को पंचायतीराज निदेशालय, पंचायतीराज प्रशिक्षण संस्थान (प्रिट) द्वारा आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा, जिससे यह अपना कार्य भलीभांति सम्पादित कर सकेंगे। पंचायत सहायक की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने एवं भाई भतीजावाद रोकने हेतु भी प्रदेश सरकार ने व्यापक प्रावधान रखे है। जिसके अन्तर्गत ग्राम पंचायत के प्रधान, उपप्रधान, सदस्य अथवा सचिव के किसी संबंधी को इस पद पर नही रखा जा सकेंगा। ग्राम सचिवालय में जन्म मृत्यु पंजीकरण प्रपत्र, परिवार रजिस्टर, ग्राम पंचायत के आय-व्यय से सम्बन्धित पुस्तिका एवं बिल वाउचर, कार्यवाही रजिस्टर, विभिन्न योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सूची, बीपीएल परिवारों की सूची, विभिन्न योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र आदि उपलब्ध रखे जायेगे, जिससे उनका आवश्यकतानुसार उपयोग किया जा सके।

ग्राम सचिवालय की स्थापना से ग्रामीण लोकतंत्र को और मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार का यह प्रयास गाँवों के विकास को नई उड़ान प्रदान करेगा। गाँव के सभी निवासी ग्राम सचिवालय से राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा उनके हितार्थ चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी ले सकेगे। वही इनमें स्थापित कामन सर्विस सेंटर से उन योजनाओं के लिए आवेदन भी कर सकेंगे। ग्रामीण विकास से संबंधित समस्त जानकारियां इण्टरनेट के माध्यम से यहां उपलब्ध होगी। ग्राम सचिवालय से प्रदेश के ग्रामवासी भारत एवं विश्व के विकास के साथ तालमेल स्थापित करने में सक्षम बनेगें। प्रदेश सरकार का यह कदम गॉवों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा एवं ग्रामीणजनों की जिंदगी आसान करेगा। एक ओर जहां यह सरकार व नागरिक अन्तःक्रिया को बढ़ावा देगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगा।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।