Rajya Sabha Election के लिए TMC ने Menaka Guruswamy को बनाया उम्मीदवार, भारत को मिलेगी पहली LGBTQ+ सांसद

डॉ. मेनका गुरुस्वामी के बारे में चर्चा करें तो आपको बता दें कि वह उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और देश में मानवाधिकार व संवैधानिक मूल्यों की सशक्त आवाज के रूप में पहचानी जाती हैं। उनका सबसे चर्चित योगदान भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के खिलाफ संवैधानिक चुनौती में रहा।
राज्यसभा चुनावों को लेकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने अपने चार प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। इस घोषणा ने जहां पार्टी के भीतर उत्साह का माहौल बनाया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है, जिन्हें संवैधानिक अधिकारों की मुखर पैरवी और ऐतिहासिक कानूनी हस्तक्षेपों के लिए जाना जाता है। हम आपको बता दें कि तृणमूल कांग्रेस की ओर से घोषित अन्य नामों में केंद्रीय मंत्री रह चुके बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और प्रसिद्ध अभिनेत्री कोएल मलिक शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि ये नाम पार्टी की दृढ़ता, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों तथा गरिमा की रक्षा के संकल्प का प्रतीक हैं।
डॉ. मेनका गुरुस्वामी के बारे में चर्चा करें तो आपको बता दें कि वह उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और देश में मानवाधिकार व संवैधानिक मूल्यों की सशक्त आवाज के रूप में पहचानी जाती हैं। उनका सबसे चर्चित योगदान भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के खिलाफ संवैधानिक चुनौती में रहा। वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सहमति से बने समान लिंग संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इस फैसले को भारत में समानता और गरिमा की दिशा में मील का पत्थर माना जाता है। इस मामले में मेनका गुरुस्वामी ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजता और समानता के अधिकारों की जोरदार पैरवी की थी।
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कानूनी जगत में उनकी पहचान केवल इसी मामले तक सीमित नहीं है। उन्होंने टीएसआर सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ मामले में प्रशासनिक सुधारों के पक्ष में दलीलें दीं थीं, अगस्ता वेस्टलैंड मामले में वह पारदर्शिता के मुद्दों पर कानूनी बहस का हिस्सा रहीं थीं, उन्होंने सलवा जुडूम मामले में मानवाधिकारों के संरक्षण की बात उठाई थी और शिक्षा के अधिकार से जुड़े मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
इसके अलावा, यदि वह निर्वाचित होती हैं तो वह भारत की पहली एलजीबीटीक्यू प्लस सांसद बन सकती हैं। इस संभावना ने उनके नाम को केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक बना दिया है। साथ ही डॉ. मेनका गुरुस्वामी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उनका चित्र ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रोड्स हाउस में प्रदर्शित है और वर्ष 2019 में टाइम पत्रिका ने उन्हें दुनिया के सौ प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था।
डॉ. मेनका गुरुस्वामी के साथ जिन अन्य नामों की घोषणा हुई है, वह भी अपने अपने क्षेत्र में प्रभावशाली रहे हैं। बाबुल सुप्रियो पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं। वह प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय राजनीति की समझ रखते हैं। उनके जरिए पार्टी संसद में मुखर राजनीतिक हस्तक्षेप की रणनीति को मजबूत करना चाहती है। वहीं राजीव कुमार पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक हैं। वह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे की गहरी समझ रखते हैं। संवेदनशील मामलों में राज्य का पक्ष रखने और जांच प्रक्रियाओं के अनुभव के कारण उन्हें राज्यसभा भेजना पार्टी के लिए संस्थागत मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
कोएल मलिक बंगाली सिनेमा की जानी मानी अभिनेत्री हैं तथा सांस्कृतिक पहचान और जनसंपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण चेहरा हैं। उनके जरिए तृणमूल कांग्रेस सांस्कृतिक जगत और युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच को और व्यापक करना चाहती है।
उधर, तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा के तुरंत बाद भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने आरोप लगाया कि तृणमूल के आधे उम्मीदवार गैर बंगाली हैं और यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित बंगाल समर्थक रुख के विपरीत है। भाजपा ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय अस्मिता का मुद्दा केवल चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
वहीं, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह हमला आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में रणनीतिक है। 294 सदस्यीय विधानसभा में मौजूदा संख्याबल को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस चार सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि एक सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। 16 मार्च को होने वाले इन चुनावों के साथ पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस ने अपने चयन के माध्यम से एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि वह केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं बल्कि संवैधानिक मूल्यों, प्रशासनिक अनुभव और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व के व्यापक संयोजन को आगे बढ़ाना चाहती है।
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