मध्यप्रदेश में ओडीएफ के नाम पर दो दलित बच्चों की ''पीट-पीटकर हत्या''

मध्यप्रदेश में ओडीएफ के नाम पर दो दलित बच्चों की ''पीट-पीटकर हत्या''

बच्चों के पिता मनोज वाल्मीकि कि माने तो पहले आरोपियों ने शौचालय नहीं बनने दिया जिसके चलते मजबूरी में बाहर शौच करने गए दोनों मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया।

मध्यप्रदेश के शिवपुरी में दो दबंगों ने उनकी जान इसलिए ले ली क्योंकि वह खुले में शौच कर रहे थे। मामला जिले के भावखेडी गांव का है जिसे सरकार ने खुले में शौच मुक्त यानि ओडीएफ घोषित कर रखा है। मृतक मासूम 12 साल की रोशनी और 10 साल के अविनाश के पिता मनोज वाल्मीकि ने बताया कि उनके बच्चे बुधवार सुबह सड़क किनारे शौच कर रहे थे। इस दौरान यहाँ से गुजर रहे गाँव के ही रहने वाले हाकिम सिंह यादव और उनके भाई रामेश्वर यादव ने बच्चों को शौच करने से रोका लेकिन बात न मानते हुए बच्चों ने जवाब दे दिया। जिससे भन्नाए दोनों आरोपियों ने मासूम बच्चों के सिर पर गाठी से बार कर दिया। जिससे तड़फ-तड़फकर ही मौके पर दोनों मासूमों की मौत हो गई।

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मासूमों को मौत के घाट उतारने के बाद दोनों आरोपी वहाँ से जब भागने लगे तो ग्रामीणों ने इन दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और पेड़ से बांध दिया। दोनों मृतक मासूम बच्चों के पिता ने बताया कि दोनों आरोपी सरपंच सूरज सिंह यादव के परिवार से है और अक्सर दबंगाई करते रहते है। बच्चों के पिता मनोज वाल्मीकि कि माने तो पहले आरोपियों ने शौचालय नहीं बनने दिया जिसके चलते मजबूरी में बाहर शौच करने गए दोनों मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। जबकि पिछले साल शौचालय की सूची में नाम दर्ज था लेकिन कागज देने के बाद भी पंचायत सरपंच और पंचायत सचिव ने उनका नाम सूची से काट दिया। वही मनोज वाल्मीकि ने बताया कि दो साल पहले झोपड़ी के लिए सरकारी जमीन से उनसे लकड़ी काटी थी। इस बात पर हाकिम सिंह  व रामेश्र्वर से उनका झगड़ा हो गया था जिसकी दोनों आरोपी रंजिश रखते थे।

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पुलिस ने सूचना मिलने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वही इस बात की जाँच की जा रही है कि यह मामला आपसी रंजिश का है या फिर अन्य कोई बात है। शिवपुरी एसपी राजेश सिंह चंदेल ने बताया कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि मृतक बच्चों का पिता मनोज वाल्मीकि अपने पिता से चार साल से अलग झोपड़ी बनाकर रह रहा था। उसके घर शौचालय नहीं बना है। वही सरपंच सूरज का कहना है कि मनोज के पिता के यहां शौचालय बना है जबकि मनोज ने हमें कभी अलग से शौचालय बनाने का आवेदन नहीं किया। जबकि सचिव भारत सिंह यादव की माने तो मनोज वाल्मीकि और किसी गांव चला गया था जबकि भावखेड़ी गांव ओडीएफ है।





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