दलित बहनों के शव मामले में परिजनों का आरोप, बच्चियों की बलात्कार के बाद की गई हत्या

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 17, 2020   17:56
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दलित बहनों के शव मामले में परिजनों का आरोप, बच्चियों की बलात्कार के बाद की गई हत्या

फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रशांत वर्मा ने शवों के पोस्टमॉर्टम से पहले पुलिस की सोशल मीडिया अकाउंट से दो बयान (वीडियो) जारी किए हैं।

फतेहपुर। फतेहपुर जिले के एक गांव के तालाब से सोमवार को बरामद दो नाबालिग दलित बहनों के शव के मामले में परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्चियों की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई है, वहीं पुलिस से हादसा बता रही है। फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रशांत वर्मा ने शवों के पोस्टमॉर्टम से पहले पुलिस की सोशल मीडिया अकाउंट से दो बयान (वीडियो) जारी किए हैं। पहले बयान में उन्होंने कहा है, ‘‘दोनों सगी नाबालिग बहनें तालाब से सिंघडा निकालने गयी थीं, जहां गहरे पानी में डूबने से उनकी मृत्यु हुई है।’’ 

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दूसरे बयान में एसपी ने कहा है, ‘‘सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना फैलाई जा रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि उनके (बच्चियों के) हाथ-पैर बंधे थे और आंखें फोड़ी गयी है जो सच नहीं है। ना उनके हाथ-पैर बंधे थे और नाहीं आंखें फोड़ी गयी है। प्रथम दृष्टया पानी में डूबने से मौत होना प्रतीत हो रहा है। सच्चाई जानने के लिए पैनल द्वारा पोस्टमॉर्टम करवाया जा रहा है।’’ जबकि बच्चियों की मां ने सोमवार की रात और मंगलवार को मीडिया को दिए बयान में आरोप लगाया है, ‘‘परिजनों ने जब तालाब से बच्चियों के शव निकाले थे, उस समय दोनों बच्चियों के हाथ-पैर सिंघाड़े की जड़ों से बंधे थे और किसी धारदार हथियार से उनकी आंखें फोड़ने से खून बह रहा था।’’

उनकी मां का कहना है, ‘‘शवों को उनके चाचा लक्ष्मीकांत और मुहल्ले के तीन-चार युवकों ने मिलकर तालाब से बाहर निकाला था। उस समय तक पुलिस नहीं पहुंची थी। बाद में पुलिस घर आयी और बिना पंचनामा भरे दोनों शवों को जबरन पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।’’ बच्चियों के चाचा लक्ष्मीकांत ने आरोप लगाया है, ‘‘वह रात में फोन से घटना की जानकारी जिलाधिकारी को दे थे, तभी एक पुलिसकर्मी ने उसे घसीटकर अन्य पुलिसकर्मियों के हवाले कर दिया और किसी से कुछ नहीं बताने की हिदायत दी। इस दौरान पुलिस ने उससे जबरन पानी में डूबने से बच्चियों की मौत लिखवाया है।’’ 

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उसने आरोप लगाया है, ‘‘उसके साथ जिन तीन अन्य युवकों ने शवों को पानी से निकाल कर घर लाने में मदद की थी, पुलिस ने उन्हें रात भर हिरासत में रखा, ताकि वह सच्चाई ना बता सकें।’’ लक्ष्मीकांत ने पुलिस के इस दावे कि ‘बच्चियों की आंख में सिंघाड़े के कांटों से चोट लगने के निशान हैं और पानी में डूबने से मौत हुई है।’ पर सवाल करते हुए कहा ‘‘यदि सिंघाड़े के कांटों से आंख और सिर पर चोट पहुंची हैं तो कांटों से चेहरे या अन्य अंगों पर चोट क्यों नहीं लगी?’ उसने सीधे तौर पर पुलिस पर आरोप लगाया है ‘‘पुलिस अपराधियों को बचा रही है और बलात्कार के बाद बच्चियों की हत्या की गई है।’’ लक्ष्मीकांत और कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, ‘‘खेत से बच्चियों ने जो चने का साग तोड़ा था, वह खेत की मेड़ में बिखरा पड़ा था, जिससे साफ है कि संघर्ष के दौरान चने का साग बिखर गया होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर बच्चियां सिंघडा तोड़ने के लिए तालाब उतरी थीं तो चने का साग तालाब के किनारे कपड़े में बंधा रखा होना चाहिए था, जबकि साग मेड़ में बिखरा था।’’ उधर, असोथर थाने के प्रभारी निरीक्षक रणजीत बहादुर सिंह ने बताया, ‘‘जिस तालाब से बच्चियों के शव बरामद हुए हैं, उसकी गहराई आठ से दस फीट है।’’ उन्होंने बच्चियों के चाचा या अन्य किसी को हिरासत में लेने के आरोप को गलत बताया। परिजनों ने सोशल मीडिया में उस तालाब का वीडियो भी डाला है, जिससे बच्चियों के शव बरामद हुए हैं। वीडियो में जो तालाब दिख रहा है, उसमें बमुश्किल डेढ़ से दो फीट गहरा पानी और कुछ सिंघाड़े के पौध दिखाई दे रहे हैं। गौरतलब है कि असोथर थाना क्षेत्र के एक गांव में सोमवार देर रात जंगल में स्थित एक तालाब से दलित वर्ग की आठ और 12 साल की दो सगी बहनों के संदिग्धावस्था में पानी में तैरते हुए शव बरामद हुए थे। दोनों बच्चियां सोमवार दोपहर खेतों में चने का साग तोड़ने गयी थीं।





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ट्रैक्टर परेड की हिंसा के बाद छावनी में तब्दील हुई दिल्ली! सुरक्षा बल तैनात, कई मेट्रो स्टेशन सहित रास्ते बंद

  •  रेनू तिवारी
  •  जनवरी 27, 2021   09:17
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ट्रैक्टर परेड की हिंसा के बाद छावनी में तब्दील हुई दिल्ली! सुरक्षा बल तैनात, कई मेट्रो स्टेशन सहित रास्ते बंद

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा, तोड़-फोड़ और अन्य अप्रिय घटनाओं के कारण बुधवार दिल्ली छावनी में तब्दील हो गयी है।

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा, तोड़-फोड़ और अन्य अप्रिय घटनाओं के कारण बुधवार दिल्ली छावनी में तब्दील हो गयी है। दिल्ली पुलिस मे 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।  दिल्ली में जगह-जगह फोर्स लगाई गयी है। लोगों की कड़ी जांच कर रही हैं पुलिस। दिल्ली में पुलिस बल के साथ सीआरपीएफ की 15 कंपनियां तैनात की गई हैं।

गाजीपुर मंडी, NH-9 और NH-24 को ट्रैफिक मूवमेंट के लिए बंद कर दिया गया है। दिल्ली से गाजियाबाद आने वाले लोगों को शाहदरा, करकरी मोर और डीएनडी के साइड से  दिल्ली ट्रैफिक पुलिस जाने की सलाह दे रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली  के लाल किले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई।प्रदर्शनकारियों का एक समूह किले की प्राचीर पर चढ़ गया और कल झंडे फहराए थे।

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दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भी सुरक्षा करणों से जामा मस्जिद और लाल किला मेट्रो स्टेशन के प्रवेश द्वार बंद हैं। इस स्टेशन से बाहर निकलने की अनुमति है। अन्य सभी स्टेशन खुले हैं। सभी लाइनों पर सामान्य सेवाएं है। इसके अलावा दिल्ली आइटीओ से जुड़े कई सड़कों को बंद कर दिया गया है।  दिल्ली सिंघू सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई जहां किसान किसान बिल का विरोध कर रहे हैं। 





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किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा- ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा के पीछे असामाजिक तत्व थे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 27, 2021   08:53
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किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा- ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा के पीछे असामाजिक तत्व थे

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के पीछे कुछ असामाजिक तत्व थे।

गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के पीछे कुछ असामाजिक तत्व थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाइयों के कारण कुछ असामाजिक तत्व परेड में शामिल हो गए और यह हिंसा का कारण बना।

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भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने एक बयान में यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने परेड के पहले से तय मार्गों के कुछ स्थानों पर गलत तरीके से बैरिकेड लगाए थे। टिकैत ने कहा, यह जानबूझकर किसानों को बरगलाने के लिए किया गया था, इस वजह से ट्रैक्टरों पर किसान भटक गए।”

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उन्होंने दावा किया कि इससे असामाजिक तत्वों को ट्रैक्टर परेड में प्रवेश का मौका मिला। उन्होंने कहा कि बीकेयू शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विश्वास करता है और हिंसा के पीछे उपद्रवियों की पहचान करेगा।





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बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने गलती से गणतंत्र दिवस पर उल्टा तिरंगा फहराया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 27, 2021   08:45
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बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने गलती से गणतंत्र दिवस पर उल्टा तिरंगा फहराया

पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने मंगलवार को गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान बीरभूम जिले के एक पार्टी कार्यालय में गलती से उल्टा तिरंगा फहरा दिया।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने मंगलवार को गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान बीरभूम जिले के एक पार्टी कार्यालय में गलती से उल्टा तिरंगा फहरा दिया। पार्टी के रामपुरहाट कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के तुरंत बाद घोष को अहसास हुआ कि तिरंगा उल्टा है और बाद में उसे ठीक से फहरा कर उन्होंने अपनी गलती सुधारी।

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हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने भगवा पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग राष्ट्रीय ध्वज ठीक से नहीं फहरा सकते, वे देश या किसी राज्य को चलाने के अयोग्य हैं। घोष ने संवाददाताओं से कहा, यह एक शर्मनाक क्षण था और यह अनजाने में गलती से हुआ। किसी का इरादा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का नहीं था। हालांकि, मैंने पार्टी के सदस्यों से भविष्य में सावधान रहने को कहा है।” इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला तृणमूल प्रमुख अनुब्रत मंडल ने कहा कि जो लोग राष्ट्रीय ध्वज सही ढंग से नहीं फहरा सकते, वे देश या किसी राज्य को चलाने के लायक नहीं हैं।





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