उमा भारती ने कहा सरकारी व्यवस्था ही लोगों को शराब पिलाने का प्रबंध करती है, किए 8 ट्वीट

उमा भारती ने कहा सरकारी व्यवस्था ही लोगों को शराब पिलाने का प्रबंध करती है, किए 8 ट्वीट

शराबबंदी कहीं से भी घाटे का सौदा नहीं है शराब बंदी से राजस्व को हुई क्षति को कहीं से भी पूरा किया जा सकता है किंतु शराब के नशे में बलात्कार, हत्याएं, दुर्घटनाएं छोटी बालिकाओं के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं भयावह हैं तथा देश एवं समाज के लिए कलंक है।

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश में शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने के बारे में सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। मुख्यमंत्री के इस बयान पर भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी का यह वक्तव्य अभिनंदनीय है।

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भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने गुरुवार को सिलसिलेवार आठ ट्वीट करते हुए कहा है कि कोरोनाकाल के लॉकडाउन के समय पर लगभग शराबबंदी की स्थिति रही। इससे यह तथ्य स्पष्ट हो गया है कि अन्य कारणों एवं कोरोना से लोगों की मृत्यु हुई किंतु शराब नहीं पीने से कोई नहीं मरा। उन्होंने कहा कि अभी हाल में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई सड़क दुर्घटनाओं के अधिकतर कारण तो ड्राइवर का शराब पीना ही होता है। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि शराब मृत्यु का दूत है, फिर भी थोड़े से राजस्व का लालच एवं शराब माफिया का दबाव शराबबंदी नहीं होने देता है।

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उन्होंने अगले ट्वीट में कहा कि अगर देखा जाए तो सरकारी व्यवस्था ही लोगों को शराब पिलाने का प्रबंध करती है, जैसे मां जिसकी जिम्मेदारी अपने बालक को पोषण करते हुए रक्षा करने की होती है, वही मां अगर बच्चे को जहर पिला दे तो, सरकारी तंत्र के द्वारा शराब की दुकाने खोलना ऐसे ही है। उन्होंने आगे लिखा लिखा कि- मैं तो अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जी से इस ट्वीट के माध्यम से सार्वजनिक अपील करती हूं कि जहां भी भाजपा की सरकारें हैं उन राज्यों में पूर्ण शराबबंदी की तैयारी करिए। 

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उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने का दबाव रहता है बिहार की भाजपा की जीत यह साबित करती है कि शराबबंदी के कारण ही महिलाओं ने एकतरफा वोट नीतीश कुमार जी को दिये। शराबबंदी कहीं से भी घाटे का सौदा नहीं है शराब बंदी से राजस्व को हुई क्षति को कहीं से भी पूरा किया जा सकता है किंतु शराब के नशे में बलात्कार, हत्याएं, दुर्घटनाएं छोटी बालिकाओं के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं भयावह हैं तथा देश एवं समाज के लिए कलंक है। कानून व्यवस्था को मेंटेन करने के लिए हजारों करोड़ रूपये खर्च होते हैं समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए शराबबंदी एक महत्वपूर्ण कदम है इस पर एक डिबेट शुरू की जा सकती है। 





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