विधान सभा के उप−चुनावों से दूरी बना सकती है यूपी कांग्रेस

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अजय कुमार । May 28 2019 3:06PM

वैसे, बताते चलें कि बहुजन समाज पार्टी भी पिछले कुछ वर्षो से किसी भी तरह के उप−चुनावों से दूरी बनाकर चलती रही है। इसी लिए पिछले वर्ष कैराना,फूलपुर और गोरखपुर में हुए उप−चुनाव में उसने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था।

कांग्रेस आलाकमान उत्तर प्रदेश में मिली करारी हार के बाद जल्द से जल्द उबरना चाहते है। लोकसभा चुनाव प्रचार के समय राहुल गांधी ने संकेत दिया था कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा को लोकसभा चुनाव से अधिक 2022 में होने वाले विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखकर भेजा गया है। कांग्रेस अब इस ओर फिर से बढ़ना चाहत है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी कांग्रेस आलाककामन को सलाह दी है वह अगले कुछ माह में होने वाले विधान सभा के उप−चुनावों से से दूरी बनाकर रखें। 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दो वर्षों के बाद हाल ही में लोकसभा चुनाव में भी मिली करारी हार झेलने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने अगर यूपी की कांगे्रस इकाई की सलाह को मान लिया तो वह कुछ माह के भीतर यूपी में होने वाले 11 विधानसभा सीटों के उप−चुनाव में नजर नहीं आएगी। कांग्रेस सबसे पहले संगठन को तैयार करेगी। संगठन बाद में चुनाव फार्मूला आजमाते हुए पार्टी पूरा ध्यान संगठन को मजबूत करने पर लगाएगी। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर द्वारा इस्तीफे की पेशकश करने के बाद कांग्रेस पहले नए अध्यक्ष के बारे में निर्णय लेना चाहती है,इसके साथ−साथ संगठन के ढांचे में बदलाव करते हुए चार जोन बनाना भी प्रस्तावित है। 

वैसे, बताते चलें कि बहुजन समाज पार्टी भी पिछले कुछ वर्षो से किसी भी तरह के उप−चुनावों से दूरी बनाकर चलती रही है। इसी लिए पिछले वर्ष कैराना,फूलपुर और गोरखपुर में हुए उप−चुनाव में उसने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। बल्कि एक जगह रालोद और दो सीटों पर सपा प्रत्याशी को समर्थन दिया था। तीनों सीटों पर जीत के बाद ही यूपी में बसपा−सपा और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन का रास्ता साफ हुआ था। बहरहाल, बात यूपी कांगे्रस की कि जाए तो उसके आधा दर्जन पूर्व विधायकों व प्रदेश पदाधिकारियों ने पार्टी हाईकमान को उप−चुनाव नहीं लड़ने वाला अनुरोध पत्र लिखकर सलाह दी है कि कमजोर संगठन के रहते बार बार चुनावी परीक्षा में फजीहत कराना उचित नहीं है। उप−चुनाव में बिना पूरी तैयारी के कूदना पार्टी हित में नहीं होगा। बेहतर यह हो कि पार्टी पूरी ताकत से मिशन−2022 को कामयाब बनाने में अभी से जुट जाए। ब्लाक, जिला और प्रदेश स्तर पर जरूरी बदलाव के साथ पुख्ता रणनीति तैयार की जाए। जिस पर अमल करने के साथ पदाधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। पत्र में कहा गया कि वर्ष 2017 की मात के बाद से उप−चुनावों को लेकर कांग्रेस के अनुभव अच्छे नहीं रहे है। गोरखपुर व फूलपुर जैसी संसदीय सीटों पर हुए उप−चुनाव में कांग्रेस बेहद खराब स्थित मिें रही। इसके चलते कैराना के उप−चुनाव में कांग्रेस ने सपा, बसपा और रालोद गठबंधन को समर्थन करना ही उचित समझा था।

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गौरतलब हो,प्रदेश के तीन मंत्रियों समेत 11 विधायक लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। लखनऊ के कैंट क्षेत्र की विधायक व पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी−इलाहाबाद, कानपुर के गोविंदनगर के विधायक व खादी ग्रामोद्योग व हथकरघा मंत्री सत्यदेव पचौरी−कानपुर तथा फीरोजाबाद के टूंडला विधायक व पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल−आगरा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत गये हैं। इनके अलावा सहारनपुर के गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी−कैराना, अलीगढ़ के इगलास विधायक राजवीर सिंह दिलेर−हाथरस, प्रतापगढ़ के विधायक संगमलाल गुप्त−प्रतापगढ़, चित्रकूट के मानिकपुर विधायक आरके पटेल−बांदा, बलहा विधायक अक्षयवर लाल गौड़−बहराइच, जैदपुर विधायक उपेंद्र सिंह रावत−बाराबंकी से सांसद चुने गये हैं। ये सभी भाजपा से हैं जबकि सपा के रामपुर के विधायक आजम खां और जलालपुर के बसपा विधायक रीतेश पांडेय सांसद निर्वाचित हो चुके है। यहां अगले छहरू माह के भीतर चुनाव होना है।

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