उत्तर प्रदेश में 2 लाख Motor Accident दावे लंबित, बीमा अफसरों को दी जा रही Mediation ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मुकदमों का बोझ घटाने के लिए बीमा अधिकारियों को मध्यस्थता सिखाने की पहल की है। लखनऊ के जेटीआरआई में 16 अक्टूबर तक चलने वाले 40 घंटे के इस सत्र में उच्चतम न्यायालय के मास्टर ट्रेनर समझौते के तरीके सिखा रहे हैं। प्रदेश के अधिकरणों में दो लाख से अधिक दुर्घटना दावे लंबित हैं, जिनमें समय पर राहत दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
लखनऊ, 12 अक्टूबर उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने बीमा विवादों के त्वरित निस्तारण और अदालतों में मुकदमों का बोझ कम करने के लिए ‘मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ अभियान के तहत बीमा कंपनियों के नामित अधिकारियों को मध्यस्थता का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। गोमतीनगर स्थित जेटीआरआई में सोमवार से शुरू हुआ 40 घंटे का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 अक्टूबर तक चलेगा। रजिस्ट्रार मीडिएशन भगीरथ वर्मा ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के संरक्षण, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के मार्गदर्शन और लखनऊ खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजन रॉय के निर्देश पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
इसमें उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों में दो लाख से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें अपील और विशेष अनुमति याचिकाएं शामिल नहीं हैं।
इन मामलों में बीमा कंपनियां पक्षकार होती हैं, इसलिए विवादों के समाधान में उनकी भूमिका अहम है। बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में भी लंबे मुकदमों से दावेदारों को बचाने पर जोर दिया गया। खासकर नाबालिग दावेदारों के मामलों में निष्पक्ष और कानून सम्मत समझौते के जरिये दावों का जल्द निस्तारण करने की जरूरत बताई गई।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को संवाद, बातचीत, समझौते के विकल्प तलाशने और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान तक पहुंचाने की तकनीक सिखाई जा रही है। इसका उद्देश्य मुकदमा दायर होने से पहले और अदालतों में मामले लंबित रहने के दौरान उपयुक्त विवादों को मध्यस्थता के जरिये सुलझाकर दावेदारों को समय पर राहत दिलाना और न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करना है।
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