Puducherry में Vote Share का गणित, 26% के दम पर कांग्रेस ने DMK से क्यों मांगा CM पद का नेतृत्व?

Puducherry Elections
प्रतिरूप फोटो
AI Generated
Neha Mehta । Feb 22 2026 12:16PM

पुडुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने 2026 विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के नेतृत्व का दावा किया है, जिसका आधार 26% वोट शेयर है जबकि सहयोगी डीएमके का 8% है। इस बयान ने पुडुचेरी में कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के भीतर 'बड़े भाई' की भूमिका को लेकर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

भारतीय क्षेत्रीय राजनीति के शतरंज पर गठबंधन की गोटियां हमेशा जीत-हार का फैसला करती रही हैं। वर्तमान में पुडुचेरी का सियासी पारा तब चढ़ गया जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा बयान दे दिया। उनका स्पष्ट तर्क है कि पुडुचेरी में कांग्रेस को गठबंधन की कमान संभालनी चाहिए। यह मांग केवल एक इच्छा नहीं, बल्कि आंकड़ों की वह बाजीगरी है जिसने साथी दल DMK की पेशानी पर बल डाल दिए हैं।

नारायणसामी की इस दावेदारी की बुनियाद हालिया प्रदर्शन और वोट शेयर पर टिकी है। राजनीति में 'नंबर' ही सर्वोपरि होते हैं, और यहाँ कांग्रेस का पलड़ा भारी नजर आता है। पार्टी का दावा है कि उनके पास 26% का मजबूत वोट बैंक है। साथ ही गठबंधन सहयोगी DMK फिलहाल 8% वोट शेयर के साथ काफी पीछे खड़ी दिख रही है। इन्हीं आंकड़ों के दम पर नारायणसामी का तर्क है कि जिस पार्टी की जड़ें जनता में अधिक गहरी हैं, नेतृत्व का हक भी उसी का बनता है।

पुडुचेरी के राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस का इतिहास काफी पुराना और रसूखदार रहा है। केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते यहाँ की सत्ता की चाबी अक्सर उसी के पास रही है जो स्थानीय भावनाओं को दिल्ली की राजनीति के साथ तालमेल बिठाकर चल सके।

2026 के चुनावों की आहट ने अब क्षेत्रीय दलों को अपनी ताकत आंकने पर मजबूर कर दिया है। कांग्रेस को लगता है कि पिछले कुछ चुनावों के उतार-चढ़ाव के बाद अब वक्त आ गया है कि वह 'जूनियर पार्टनर' की छवि से बाहर निकलकर फ्रंट सीट पर बैठे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या DMK इस मांग के आगे झुकेगी? तमिलनाडु में मजबूत स्थिति रखने वाली DMK के लिए पुडुचेरी में कांग्रेस की शर्तों पर समझौता करना आसान नहीं होगा। उनके फैसले को कई कारक प्रभावित करेंगेक्या DMK के समर्थक नेतृत्व छोड़ने के फैसले को स्वीकार करेंगे? और क्या विपक्षी दलों (NR कांग्रेस और भाजपा गठबंधन) को हराने के लिए क्या दोनों दल अपनी ईगो को किनारे रख पाएंगे?

पुडुचेरी का यह फैसला केवल एक छोटे प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह इंडिया गठबंधन के भविष्य के समीकरणों की दिशा भी तय करेगा। वी. नारायणसामी का यह रुख केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दबाव है। 2026 के चुनावों की छाया में, कांग्रेस और DMK के बीच की यह सौदेबाजी भारतीय गठबंधन राजनीति के बदलते स्वरूप को दर्शाती है। यदि कांग्रेस नेतृत्व हथियाने में सफल रहती है, तो यह पार्टी के पुनरुत्थान के लिए एक बड़ा बूस्टर शॉट होगा।

आने वाले महीनों में होने वाली वार्ताएं न केवल पुडुचेरी का भविष्य तय करेंगी, बल्कि पूरे देश में यह संदेश भी देंगी कि क्षेत्रीय गठबंधन में 'शक्ति संतुलन' किस करवट बैठ रहा है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़