अब्दुल्ला-मुफ्ती कब समझेंगे कि पाकिस्तान का वार्ता का प्रस्ताव हमेशा छलावा ही रहा है

Farooq Abdullah
ANI
गौतम मोरारका । Jan 19, 2023 1:22PM
कश्मीर के नेताओं को समझना होगा कि पाकिस्तान का वार्ता का प्रस्ताव हमेशा छलावा ही रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे यहां फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे कुछ नेता भी हैं जो सबकुछ जानने-समझने के बावजूद पाकिस्तान से वार्ता की वकालत करते हैं।

नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बाद अब पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी पाकिस्तान से वार्ता की वकालत करते हुए कहा है कि अटलजी की नीति को पाकिस्तान समझ गया था लेकिन भाजपा उसे नहीं समझ पाई। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमरनाथ यात्रियों की संख्या बढ़ाये जाने से यहां भी जोशीमठ जैसे हालात हो सकते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि वह राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होंगी। महबूबा ने अपनी प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हो रहा है।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान संविधान के ढांचे के भीतर है। उन्होंने कहा कि हालांकि, किसी भी समाधान के लिए शुरुआती कदम जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा और राज्य का दर्जा बहाल करना होगा। महबूबा मुफ्ती ने संवाददाताओं से कहा, “जम्मू-कश्मीर में सुलह के अलावा कोई रास्ता नहीं है, लेकिन इसके लिए शुरुआती कदम (पूर्व) राज्य से जो कुछ भी छीन लिया गया है, उसकी बहाली होगी।” 

दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की बात करें तो उन्होंने कहा है कि कश्मीर समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक ‘हम अपने पड़ोसी से बात नहीं करते’ और दशकों से चली आ रही इस समस्या का वास्तविक समाधान नहीं ढूंढ़ते। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, “कश्मीर की समस्या खत्म नहीं होगी... और मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि आतंकवाद तब तक बना रहेगा, जब तक हम अपने पड़ोसी से बात नहीं करते और इस समस्या का वास्तविक समाधान नहीं निकालते।”

बहरहाल, कश्मीर के नेताओं को समझना होगा कि पाकिस्तान का वार्ता का प्रस्ताव हमेशा छलावा ही रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे यहां फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे कुछ नेता भी हैं जो सबकुछ जानने-समझने के बावजूद पाकिस्तान से वार्ता की वकालत करते हैं। हालिया उदाहरण ही देख लें- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत के समक्ष वार्ता का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि हम सबक सीख चुके हैं और शांति के साथ रहना चाहते हैं। लेकिन थोड़ी देर बाद ही पाकिस्तान सरकार ने जिस तरह कश्मीर राग अलापा उसने पुनः स्पष्ट कर दिया कि सेना वहां की सरकार पर किस कदर हावी है।

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