Jyotiba Phule Birth Anniversary: 19वीं सदी के वो नायक, जिनकी Social Justice की लड़ाई आज भी प्रासंगिक है

आज ही के दिन यानी की 11 अप्रैल को महान लेखक, समाज सुधारक और विचारक ज्योतिबा फुले का जन्म हुआ था। 19वीं सदी में फुले ने महिलाओं, पिछड़ों और दलितों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
भारत के महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले का नाम सबसे ऊपर आता है। आज ही के दिन यानी की 11 अप्रैल को ज्योतिबा फुले का जन्म हुआ था। जब 19वीं सदी में समाज में ऊंच-नीच और जातिवाद का बोलबाला था। तब फुले के साहस ने दिखाया और हर व्यक्ति के लिए समान अधिकार के लिए आवाज उठाई थी। उनका मानना था कि शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिससे हम समाज में बदलाव ला सकते हैं। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर ज्योतिबा फुले के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
महाराष्ट्र में 11 अप्रैल 1827 को ज्योतिबा फुले का जन्म हुआ था। वह नीची जाति के माली परिवार में पैदा हुए थे। उनको जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उनके अंदर समाज की जड़ें छुड़ाने का संकल्प जगाया। ज्योतिबा फुले का मानना था कि हर व्यक्ति चाहे किसी भी जाति या लिंग का हो, वह समान अवसर का हकदार है।
शिक्षा को बनाया हथियार
ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने दलित बच्चों और लड़कियों के लिए स्कूल खोले। उस दौर में जब महिलाओं का पढ़ना-लिखना असंभव था, तब उन्होंने विधवाओं के अधिकारों की रक्षा की और अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए आश्रम खोले। ज्योतिबा फुले का यह कदम साहसिक और विवादास्पद माना गया था।
महात्मा की उपाधि
शोषित वर्ग और दलितों को न्याय दिलाने के लिए ज्योतिबा फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी। ज्योतिबा फुले की समाजसेवा देखकर साल 1888 में मुंबई में एक विशाल सभा में उनको महात्मा की उपाधि दी गई। ज्योतिबा ने ही पहली बार दलित शब्द का प्रयोग किया था।
ज्योतिबा फुले बाल विवाह विरोधी और विधवा विवाह के समर्थक थे। उन्होंने साल 1863 में उच्च वर्ग गर्भवती विधवाओं के लिए एक घर शुरू किया था, जहां पर गर्भवती महिलाएं अपने बच्चे को सुरक्षित रूप से जन्म दे सकें। ज्योतिबा फुल ने भ्रूण हत्या और शिशु हत्या रोकने के लिए एक अभियान चलाया और अनाथालय खोला।
मृत्यु
वहीं 28 नवंबर 1890 को ज्योतिबा फुले का निधन हो गया था।
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