Chandrashekhar Singh Birth Anniversary: आदर्शवादी नेता के तौर पर जाने जाते थे पूर्व PM चंद्रशेखर, जानिए रोचक बातें

Chandrashekhar Singh
Prabhasakshi

आज ही के दिन यानी की 17 अप्रैल को देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर का जन्म हुआ था। वह अपनी खरी-खरी बातों के लिए जाने जाते थे। उनकी गिनती देश के उन नेताओं में की जाती थी, जिनकी पहचान स्पष्ट बात कहने के लिए रही।

आज ही के दिन यानी की 17 अप्रैल को देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर का जन्म हुआ था। वह अपनी खरी-खरी बातों के लिए जाने जाते थे। उनकी गिनती देश के उन नेताओं में की जाती थी, जिनकी पहचान स्पष्ट बात कहने के लिए रही। बता दें कि चंद्रशेखर ने संसद में कई मुद्दों पर ऐसे भाषण दिए, जिनमें उन्होंने बहुत साफगोई से अपनी बात सामने रखी। इसके अलावा वह अपनी भारत यात्रा के लिए भी याद किए जाते हैं। आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर पूर्व पीएम चंद्रशेखर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में।

जन्म और शिक्षा

उत्तरप्रदेश के इब्राहिमपट्टी गांव में 17 अप्रैल 1927 को चंद्रशेखर सिंह का जन्म हुआ था। वह एक किसान राजपूत परिवार से ताल्लुक रखते थे। शायद यह एक बड़ी वजह थी कि चंद्रशेखर अपने देश से नि:स्वार्थ भाव से जुड़े थे। उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी कर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया।

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राजनीतिक कॅरियर

चंद्रशेखर को छात्र जीवन से ही राजनीति में दिलचस्पी थी। उनका राजनीतिक जीवन एक आइने की तरफ साफ था। उन्होंने समाजवादी आंदोलन से जुड़कर पिछड़े वर्गों के लिए तमाम कार्य किए। चंद्रशेखर ने दलितों को सामान्य जीवन दिलाने के लिए अहम भूमिका निभाई। उन्होंने डॉ राम मनोहर लोहिया के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया था। चंद्रशेखर ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से जनता दल सरकार का नेतृत्व किया था।

बता दें कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने राजीव गांधी के नेतृत्व में लोकसभा में 400 से अधिक सीटें जीती थी। हांलाकि राजीव गांधी सरकार पर बोफोर्स घोटाले का आरोप लगा। जिसके चलते साल 1980 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर हो गई और जनता दल की सरकार बनी।

वहीं एक साल के अंतराल में ही बीजेपी द्वारा समर्थन वापस लेने की वजह से वीपी सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई। इसके बाद उनकी पार्टी के 64 सांसद अलग हो गए। इसके साथ ही कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर देश के प्रधानमंत्री बन गए। लेकिन कांग्रेस ने 3 महीने बाद राजीव गांधी की जासूसी कराने के आरोप में चंद्रशेखर की पार्टी से समर्थन वापस ले लिया। जिसके कारण आदर्शवादी नेता के रूप में पहचाने जाने वाले चंद्रशेखर को 21 जून 1991 को इस्तीफा देना पड़ा।

मृत्यु

बता दें कि आखिरी समय में चंद्रशेखर को कई गंभीर बीमारियां हो गई थीं। बोन मेरो कैंसर होने के कारण उनका स्वास्थ्य दिन प्रति दिन गिरता जा रहा था। वहीं 8 जुलाई 2007 को 80 साल की उम्र में पूर्व पीएम चंद्रशेखर का निधन हो गया।

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