अमेठी को बड़ी सौगातें देने आ रहे हैं मोदी, राहुल गांधी को गढ़ में घेरने की तैयारी

By स्वदेश कुमार | Publish Date: Feb 28 2019 3:33PM
अमेठी को बड़ी सौगातें देने आ रहे हैं मोदी, राहुल गांधी को गढ़ में घेरने की तैयारी
Image Source: Google

अमेठी लोकसभा चुनाव के इतिहास में भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ऐसी नेत्री बनकर उभरीं जिन्हें राहुल के खिलाफ तीन लाख सात सौ अड़तालिस वोट मिले थे, जबकि इससे पहले 1998 में कांग्रेस से बगावत करके भाजपा के टिकट से चुनाव जीतने वाले संजय सिंह को भी मात्र दो लाख पांच हजार पच्चीस वोट मिल पाये थे।

भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 03 मार्च को अमेठी की होने वाली यात्रा ने प्रदेश का सियासी पार बढ़ा दिया है। अमेठी कहने को तो एक छोटा सा जिला भर है, लेकिन इसका सियासी रसूख कई लोगों की 'आंख की किरकिरी' बना रहता है। अमेठी 1980 से गांधी परिवार का मजबूत गढ़ रहा है। संजय गांधी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी के बाद अब राहुल गांधी यहां के सांसद हैं। अपवाद के रूप में सिर्फ एक बार 1998 में यहां से भाजपा का सांसद चुना गया था। विरोधी दल का कोई भी नेता गांधी परिवार को यहां से कभी भी मजबूत चुनौती नहीं दे पाया। यहां तक कि 2014 की मोदी लहर में भी अमेठी की जनता ने गांधी परिवार पर ही भरोसा किया था। यह और बात थी कि भाजपा ने पहली बार यहां कांग्रेस के राहुल गांधी को जबर्दस्त टक्कर दी थी।
भाजपा को जिताए

अमेठी लोकसभा चुनाव के इतिहास में भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ऐसी नेत्री बनकर उभरीं जिन्हें राहुल के खिलाफ तीन लाख सात सौ अड़तालिस वोट मिले थे, जबकि इससे पहले 1998 में कांग्रेस से बगावत करके भाजपा के टिकट से चुनाव जीतने वाले संजय सिंह को भी मात्र दो लाख पांच हजार पच्चीस वोट मिल पाये थे। 2014 में भाजपा प्रत्याशी ईरानी को हार का सामना तो जरूर करना पड़ा था, लेकिन उनकी लोकप्रियता का ग्राफ शिखर पर पहुंच गया। 2014 में जब स्मृति को यहां से प्रत्याशी बनाया गया था तो कांग्रेस ने उनको बाहरी बता कर घेरा था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में स्मृति ने अमेठी की सड़क और गलियों में घूम−घूम कर यह साबित कर दिया कि 'बाहरी' होने के बाद भी वह अमेठी वासियों के प्रति मौजूदा सांसद राहुल गांधी से अधिक वफादार हैं। पांच वर्षों से स्मृति ने यहां अपनी मजबूत पैठ बनाई है, जिसके चलते अबकी बार यहां से राहुल गांधी का चुनाव जीतना बहुत आसान नहीं लगता है। राहुल गांधी के लिए अगर राहत की बात यही है कि सपा−बसपा गठबंधन ने उनके खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं उतारने का निर्णय लिया है, जिसके चलते बीजेपी को यहां राहुल को चुनौती देना बहुत आसान नहीं होगा। मगर चुनावों में जीत झुके हुए कंधे नहीं दिलाते हैं। इसीलिए भाजपा ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है।
 
एक तरफ स्मृति ईरानी अमेठी में अपनी जड़ें जमा रही हैं तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आम चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की 'नकेल' कस कर अपने हाथ में रखना चाहते हैं। बीजेपी के रणनीतिकार चाहते हैं कि अमेठी में राहुल को घेर कर कांग्रेस को ऐसी 'सियासी चोट' दी जाए जिससे राहुल गांधी सहित पूरी कांग्रेस को संभलना मुश्किल हो जाए। इसके लिए अमेठी से अच्छी जगह कोई हो नहीं सकती है। भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में पुनः वापसी हो, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी चुनावी मोड में हैं। वह जिले−जिले घूमकर योजनाओं की सौगात बांट रहे हैं, जो जिला जितना महत्वपूर्ण है, जहां की बात पूरे देश में सुनी जाती है, उस जिले को उतना महत्व दिया जा रहा है। इसी कड़ी में तीन मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में आगमन हो रहा है। तीन मार्च की तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के कुछ दिनों बाद (सात मार्च के बाद कभी भी) आम चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो सकती है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर अंतिम रूप दिया जा रहा है। अमेठी में अब तक जो विकास हुआ है उसको और गति देने के लिए प्रधानमंत्री अमेठी में तमाम योजनाओं का पिटारा खोल सकते हैं। आपको बता दें कि अमेठी के मुंशीगंज स्थित ऑर्डिनेंस फैक्टरी में अब एके−103 रायफल तैयार करने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्टरी में नई यूनिट लगाई जा रही है। यह प्रोडक्ट पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम पर आधारित होगा। यानी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस मेक इन इंडिया की खिल्ली उड़ाते हैं, वह 'इंडिया' उनके संसदीय क्षेत्र में साकार होता नजर आयेगा।
आम चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार ने प्रतिष्ठित कलाश्निकोव रायफलों को अमेठी में तैयार कराने की परियोजना को हरी झंडी देकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस बात का अहसास करा दिया है कि विकास के मसले पर वह अपनी पीठ न ही थपथपाएं तो बेहतर रहेगा। मोदी सरकार ने कोरवा में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में रूस के साथ संयुक्त उद्यम में लगभग 7.5 लाख असॉल्ट रायफल बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। 03 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परियोजना का उद्घाटन करने के लिए पहुंच सकते हैं। मिली जानकारी के अनुसार 7.62.39 मिमी कैलिबर वाली एके−203 बंदूकें प्रसिद्ध एक−47 रायफल का लेटेस्ट वर्जन है। रूस की फर्म कलाश्निकोव कंसर्न के साथ मिलकर राज्य−संचालित आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) माल तैयार करेगा। बताया जा रहा है कि तकरीबन 7.5 लाख रायफल तैयार होंगी। इन रायफलों की खासियत होगी कि ये पानी के अंदर भी काम करने में सक्षम होंगी।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेठी से 19 साल पुराना रिश्ता है। प्रधानमंत्री यहां पहली बार 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जनसभा के लिए आये थे और दूसरी बार 2014 के आम चुनाव में प्रचार खत्म होने के ठीक पहले स्मृति ईरानी के पक्ष में कौहार में जनसभा को संबोधित करने आये थे। मोदी की जनसभा ने स्मृति ईरानी की जीत−हार के अंतर को काफी कम कर दिया था।


 
यहां एक और घटना का जिक्र करना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता टि्वटर पर किसी से छिपी नहीं है। उन्हें फॉलो करने वालों की संख्या वैसे तो साढ़े चार करोड़ से भी अधिक है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी स्वयं दो हजार एक सौ 22 लोगों को फॉलो करते हैं। इस लिस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के गढ़ अमेठी के दो युवा भी शामिल हैं। एक पेशे से किसान है तो दूसरा इंजिनियर। प्रधानमंत्री द्वारा फॉलो किये जा रहे दोनों युवा अमेठी बीजेपी के आईटी सेल के संयोजक हैं। दोनों युवा इस बात से खासे उत्साहित हैं कि जिसे पूरी दुनिया फॉलो कर रही है, वे उन्हें फॉलो कर रहे हैं।
दरअसल, अमेठी जिले के तिलोई विधानसभा के जायस कस्बे के रहने वाले विवेक महेश्वरी कई वर्षों से बीजेपी से जुड़े हैं। विवेक महेश्वरी बी.टेक इन इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन के साथ ही सी.डेक मुंबई से पीजी डिप्लोमा किए हुए हैं। विवेक कहते हैं कि मोदी जी आम लोगों से जुड़ने में संकोच नहीं करते हैं। चुनाव हारने के बाद अमेठी के लोगों के सुख−दुख में स्मृति ईरानी के शामिल होने की आदत की भी वह तारीफ करते हैं। विवेक का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा फॉलो किया जाना उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है। वहीं दूसरे युवा बहादुरपुर ब्लॉक के मुबारकपुर मुखेतिया निवासी रवि सिंह हैं। रवि 1992 से बीजेपी से जुड़े हुए हैं और पेशे से किसान हैं। रवि सिंह का कहना हैं कि एक जनवरी को पीएम ने उन्हें टि्वटर पर फॉलो किया तो विश्वास ही नहीं हुआ। पीएम द्वारा फॉलो किया जाना उनके लिए गर्व की बात है।
 

 
खैर, मुद्दे पर आया जाए तो लगता है कि राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम भाजपा ने बहुत सोच−विचार के बाद बनाया है। राहुल गांधी आजकल जगह−जगह जनसभाओं में मोदी सरकार के विकास के दावों की खिल्ली उड़ाते फिर रहे हैं। कभी वह मेक इन इंडिया पर सवाल पूछते हैं तो कभी जीएसटी, नोटबंदी, विदेश नीति, किसानों की दुर्दशा, उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने के बहाने मोदी सरकार को घेरते हैं। मोदी के खिलाफ 'चौकीदार चोर है' का नारा लगाते हैं। राफेद विमान सौदे पर तो सुप्रीम कोर्ट से भी क्लीन चिट मिलने के बाद राहुल लगातार मोदी सरकार पर हमलावार हैं। जब राहुल हमलावर होते हैं तो भाजपा उनको अमेठी का आईना दिखाने लगती है। अमेठी के बहाने राहुल गांधी को घेरना भाजपा के लिए काफी आसान हो जाता है। गुजरात विधान सभा चुनाव के समय भी बीजेपी ने राहुल गांधी के भ्रामक प्रचार के खिलाफ अमेठी की दुर्दशा को बड़ा हथियार बनाया था। आम चुनाव में भी बीजेपी राहुल को अमेठी के बहाने घेरने की तैयारी में है। भाजपा अमेठी की उन बड़ी−छोटी सभी परियोजनाओं की लिस्ट बना रही है जिनकी यूपीए सरकार में घोषणा तो बहुत जोर−शोर से हुई थी, लेकिन जमीन पर कोई नहीं उतर पाई थी। बात चाहे हिन्दुस्तान पेपर मिल की हो अथवा मेगा फूड पार्क और रेल परियोजनाओं की, सभी पर राहुल से सवाल पूछे जायेंगे। सभी योजनाओं के आंकड़े उनके पूरा न होने की ठोस वजह के साथ जुटाए जा रहे हैं ताकि मोदी मंच से राहुल की नाकामयाबी का खूब ढिंढोरा पीटा जा सके। राहुल तो निशाने पर होंगे ही प्रियंका वाड्रा को भी नहीं छोड़ा जायेगा, प्रियंका ने भी 2014 के लोकसभा चुनाव के समय सोनिया और राहुल गांधी के लिए चुनाव प्रचार करते समय काफी वायदे किए थे, जो अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।
 
बहरहाल, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आएंगे तब आएंगे, लेकिन इससे पहले बीजेपी नेत्री और मोदी कैबिनेट में मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को सवालों के घेरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है। केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी 24 फरवरी को अमेठी पहुंचीं थीं। उस दिन प्रधानमंत्री मोदी प्रयागराज और गोरखपुर के दौरे पर थे। 24 फरवरी को गोरखपुर में जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसान निधि योजना की शुरूआत की वहीं इस दौरान अमेठी में स्मृति ईरानी ने 25 किसानों को किसान सम्मान प्रमाण पत्र देकर किसानों को लुभाने का पूरा प्रयास किया। स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'जो पिछले 15 सालों से अमेठी के सांसद हैं, उन्होंने कभी अमेठी की समस्या को संसद में नहीं उठाया। ऐसे नामदार लोगों ने अमेठी के लोगों को छला है और गरीबों को धोखा दिया है, जबकि उन्हीं के वोट की ताकत पर वह संसद पहुंचते रहे हैं। यहां तक कि सांसद ने 15 साल से बहनों की सम्मान व स्वास्थ्य की चिंता नहीं की। मोदी सरकार ने इज्जत घर दिए। एक लाख 40 हजार परिवारों को उज्जवला कनेक्शन दिया। अमेठी के पांच लाख लोगों को किसी न किसी योजना का लाभ मिला। स्मृति ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेठी की जनता के लिए कृषि विज्ञान केंद्र का शिलान्यास कर रहे हैं। 23 दिन के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व योगी सरकार ने अमेठी के 3 लाख 80 हजार किसानों को चिन्हित कर योजना का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। अमेठी में 315 गरीब लोगों का आष्युमान योजना के तहत इलाज हुआ है, जबकि किसान सम्मान निधि के तहत 3 लाख 80 हजार लाभार्थी शामिल हुए हैं। ईरानी का कहना था कि अमेठी को गांधी परिवार सिर्फ सपने दिखाता रहा। पांच साल पहले प्रधानमंत्री ने अपनी रैली में अमेठी की जनता को विकास के लिए आश्वस्त किया था। उन्होंने अपना वादा पूरा किया। अब भारत की तिजोरी का पैसा सीधे तिजोरी भरने वाले किसानों के खाते में जाएगा।
 
-अजय कुमार

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप   



Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.

Related Story

Related Video