ISL की वापसी! 9 महीने बाद खत्म हुआ भारतीय फुटबॉल का सूखा, 14 फरवरी से शुरू होगा एक्शन

इंडियन सुपर लीग की 14 फरवरी से वापसी हो रही है, जो एआईएफएफ द्वारा 25 करोड़ के केंद्रीय कोष और नए होम-अवे फॉर्मेट की घोषणा के बाद संभव हुआ है। यह फैसला नौ महीने से चल रहे वित्तीय और प्रशासनिक संकट को समाप्त करता है, हालांकि लीग के लिए एक स्थायी वाणिज्यिक साझेदार ढूंढना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
भारतीय फुटबॉल को आखिरकार लंबे इंतज़ार के बाद नई शुरुआत मिलने जा रही है। बता दें कि इंडियन सुपर लीग का नया सीज़न 14 फरवरी से शुरू होगा। यह घोषणा मंगलवार शाम केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने की है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बीते कई महीनों से चल रहे कानूनी विवाद और प्रशासनिक असमंजस के कारण आईएसएल को लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मांडविया ने कहा कि सरकार, ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन और सभी 14 क्लबों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद लीग को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया गया है।
हालांकि, इस मुद्दे पर क्लबों की सहमति को लेकर थोड़ी स्पष्टता अभी बाकी है। गौरतलब है कि नॉर्थईस्ट यूनाइटेड के सीईओ मंदर ताम्हाने ने बताया कि फिलहाल 10 क्लबों ने आधिकारिक रूप से खेलने की पुष्टि कर दी है, जबकि चार क्लबों को अपने मालिकों से चर्चा के बाद मंगलवार रात तक फैसला लेने का समय दिया गया है।
लीग के फॉर्मेट को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है। इस सीज़न में सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ सिंगल लेग होम और अवे मैच खेलेंगी। इसके तहत कुछ टीमों को छह घरेलू मुकाबले मिलेंगे, जबकि कुछ को सात मैच अपने मैदान पर खेलने का मौका मिलेगा। ताम्हाने के मुताबिक, आर्थिक दृष्टि से यह सबसे व्यावहारिक विकल्प है और केंद्रीकृत वेन्यू पर टूर्नामेंट कराने की तुलना में क्लबों के लिए बेहतर है।
उन्होंने यह भी बताया कि केरल ब्लास्टर्स और बेंगलुरु एफसी जैसे क्लबों की आय का बड़ा हिस्सा टिकट बिक्री से आता है, वहीं कुछ अन्य क्लबों के स्थानीय प्रायोजक घरेलू मैच न होने की स्थिति में पीछे हट सकते थे। ऐसे में यह फॉर्मेट सभी हितधारकों के लिए संतुलित समाधान माना जा रहा है।
वित्तीय व्यवस्था को लेकर एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने जानकारी दी कि आईएसएल के संचालन के लिए 25 करोड़ रुपये का एक केंद्रीय कोष बनाया गया है। इसमें 10 प्रतिशत योगदान एआईएफएफ का होगा, जबकि 30 प्रतिशत एक वाणिज्यिक साझेदार से आना था। चूंकि फिलहाल कोई कमर्शियल पार्टनर नहीं है, इसलिए यह हिस्सा भी एआईएफएफ ही वहन करेगा। कुल मिलाकर एआईएफएफ आईएसएल के लिए 14 करोड़ रुपये और आई-लीग के लिए करीब 3.2 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा।
गौरतलब है कि 11 टीमों वाली आई-लीग भी फरवरी में दोबारा शुरू होने जा रही है। एआईएफएफ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती दोनों लीगों के लिए स्थायी कमर्शियल साझेदार ढूंढने और अगले सीज़न के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने की है।
यह फैसला भारतीय फुटबॉल के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दिसंबर में एआईएफएफ और रिलायंस की एफएसडीएल के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट समाप्त होने के बाद जुलाई से आईएसएल ठप पड़ा था। इसके बाद एआईएफएफ द्वारा जारी किए गए टेंडर को कोई बोली नहीं मिली, जिससे संकट और गहराता चला गया था। इन नौ महीनों के दौरान कई क्लबों को अपनी पहली टीम के संचालन रोकने पड़े और प्रायोजन व योजना पर गहरा असर पड़ा। अब लीग की वापसी से भारतीय फुटबॉल को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही हैं।
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