भारत की इस खूबसूरत जगह पर पूरे साल होती है बारिश लेकिन नहीं आती बाढ़

By सुषमा तिवारी | Publish Date: Aug 13 2019 6:12PM
भारत की इस खूबसूरत जगह पर पूरे साल होती है बारिश लेकिन नहीं आती बाढ़
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साल में शायद ही ऐसा कोई दिन होता हो जब बारिश न हुई हो। ऐसे में भी वहां के लोग बहुत ही सामान्य जीवन जीते हैं। बारिश की वजह से इस जगह की रफ्तार कभी नहीं थमती। चेरापूंजी बारिश के लिए केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है।

इस मानसून दिल्ली में जहां लोग अच्छी बारिश के लिए तरस रहे हैं वहीं दूसरे प्रदेशों में बारिश ने विकराल रूप ले लिया है। केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित दक्षिण भारत में कई प्रदेशों बाढ़ के हालात हैं। सोचिये कि इन प्रदेशों में केवल मानसून की बारिश से बाढ़ जैसे हालात हो जाते है, अगर यहां हमेशा बारिश होती रहे तो क्या होगा? यकीनन हालात काफी खराब हो जाएंगे… लेकिन भारत में एक ऐसी जगह है जहां रोज बारिश होती हैं।


भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय  में बसा चेरापूंजी में पूरे साल बारिश होती है। 
 
साल में शायद ही ऐसा कोई दिन होता हो जब बारिश न हुई हो। ऐसे में भी वहां के लोग बहुत ही सामान्य जीवन जीते हैं। बारिश की वजह से इस जगह की रफ्तार कभी नहीं थमती। चेरापूंजी बारिश के लिए केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। हाल ही में इसका नाम चेरापूंजी से बदलकर सोहरा रख दिया गया है। वास्तव में स्थानीय लोग इसे सोहरा नाम से ही जानते हैं।
 
चेरापूंजी में बारिश के अलावा क्या है खास-


 
नोहकलिकाई वॉटरफॉल्स 
नोहकलिकाई वॉटरफॉल्स चेरापूंजी यानी कि सोहरा से केवल 8 किलोमीटर की दूरी पर है और ये झरना भारत का सबसे ऊंचे झरनों में से एक है। दूध की तरह पहाड़ी से गिरता पानी देख कर अकसर लोगों के मन में ये सवाल उठता हैं कि आखिर ये पानी कहां से आ रहा है? तो आपको बता दें की इस झरने के पानी का स्रोत कोई बड़ी नदी नहीं बल्कि चेरापूंजी में होने वाली लगातार बारिश है। ये झरना काफी खूबसूरत है साथ ही झरने के पानी में मस्ती करने के लिए झरने के नीचे पर्यटकों के लिए खास व्यवस्था की गई हैं।
कम बारिश का महीना
साल के कुछ महीने ऐसे होते है जिसमें चेरापूंजी में बारिश की संभावना कम होती है। दिसंबर से फरवरी के बीच यहां बारिश कम होती है। इन दो महीनों में मौसम साफ होता है लेकिन बीच-बीच में बारिश हो सकती हैं। नोहकलिकाई वॉटरफॉल्स में भी बारिश न होने का असर पड़ता है और ये झरना दो महीने तक लगभग सूखा रहता हैं।
 
- सुषमा तिवारी
 

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