खगोलीय प्रक्रिया के तहत 23 सितम्बर को दिन और रात होंगे बराबर

खगोलीय प्रक्रिया के तहत 23 सितम्बर को दिन और रात होंगे बराबर

23 सितम्बर को विज्ञान की भाषा में इक्वीनोक्स भी कहा जाता है। इक्वीनोक्स लैटिन भाषा से लिया गया है। इक्वीनॉक्स एक्वी और नाक्स शब्दों से मिलकर बना होता है। जिसमें एक्वि का अर्थ है समान और नॉक्स का मतलब है रात। इस दिन सूर्य धरती पर मौजूद भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से होकर गुजरता है।

आज 23 सितम्बर है, आज का दिन होता है खास, क्योंकि आज दिन और रात दोनों बराबर होते हैं। जी हां 23 सितम्बर को दिन-रात बराबर होना खगोलीय प्रक्रिया का एक हिस्सा है, तो आइए हम आपको पृथ्वी के इस अनोखे दिन के बराबर में बताते हैं। 

साल में दो दिन होते हैं दिन और रात बराबर 

साल में केवल 23 सितम्बर को नहीं बल्कि 21 मार्च को दिन और रात बराबर होते हैं। लेकिन खगोल की गणना जूलियन और ग्रिगोरियन कैलेंडर के हिसाब से होती है। इन दोनों कैलेंडर से गणना के कारण अगले कुछ साल में 48 घंटे घट-बढ़ सकते हैं। इसी कारण 1983 में 20 सितम्बर को दिन-रात बराबर होते हैं। लेकिन अब यह बढ़कर 23 सितम्बर हो गया है। आगे आने वाले दिनों में इसके बढ़ने की सम्भावना है। 

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शरद विषुव या इक्वीनोक्स

23 सितम्बर को विज्ञान की भाषा में इक्वीनोक्स भी कहा जाता है। इक्वीनोक्स लैटिन भाषा से लिया गया है। इक्वीनॉक्स एक्वी और नाक्स शब्दों से मिलकर बना होता है। जिसमें एक्वि का अर्थ है समान और नॉक्स का मतलब है रात। इस दिन सूर्य धरती पर मौजूद भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से होकर गुजरता है। इसलिए इस दिन और रात दोनों 12-12 घंटे के होते हैं। आम लोगों के लिए यह खास नहीं है लेकिन खगोलविदों के लिए यह दिन विशेष महत्व का है। 23 सितम्बर को आटम्नल इक्वीनोक्स भी कहा जाता है। इस दिन बाद सर्दियां आनी शुरू हो जाती है और दिन छोटे होते हैं तथा रातें लम्बी हो जाती हैं। 

इसके विपरीत 21 मार्च को होने वाले इक्वीनोक्स को वर्नल कहा जाता है। इसके बाद गर्मियां आनी शुरू होती है। गर्मियां आने के साथ दिन छोटे और रातें लम्बी हो जाती हैं। 


जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में प्रवेश करते हैं

पृथ्वी पर मौसम अपने आप बदल जाते हैं, आप जानते हैं ऐसा क्यों होता है। इस घटनाओं के पीछे सूर्य और पृथ्वी का सौरमंडल में भ्रमण करने के कारण होता है। 23 सितम्बर को सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में प्रवेश करते हैं जिससे सूर्य की किरणें तिरछी पड़ने लगती हैं। इस कारण 23 सितम्बर के बाद ठंड महसूस होने लगती हैं।

22 दिसम्बर का भी है महत्व 

जिस तरह से खगोलीय गणना में 23 सितम्बर और 21 मार्च का महत्व है उसी प्रकार 22 दिसम्बर और 21 जून दो तिथियां भी बहुत खास मानी जाती हैं। 21 जून को दक्षिणी ध्रुव सूरज से सबसे अधिक दूरी पर रहता है। सूर्य की अधिकतम दूरी के कारणइस दिन सबसे बड़ा दिन होता है। लेकिन इसके विपरीत 22 दिसंबर के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन की ओर जाता है, इसलिए 22 दिसंबर को सबसे छोटा दिन और सबसे बड़ी रात होती है।

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इसलिए खगोलविद मानते हैं कि 25 दिसंबर से दिन बढ़ने लगते हैं। जब सूर्य दक्षिण को ओर जाता है तो उसे दक्षिण गोल सूर्य कहते हैं। जब सूर्य उत्तर की ओर अग्रसर होता है तो उत्तर गोल कहते हैं। दोनों स्थितियों में अवधि लगभग समान छह महीने की होती है।

जापान में इक्वीनोक्स है खास 

धरती पर मौजूद और देशों की तुलना में जापान में इक्वीनोक्स विशेष है क्योंकि 23 सितम्बर को जापान में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है। यह छुट्टी 1948 से घोषित की गयी है।

प्रज्ञा पाण्डेय