दिल्ली मेट्रो में महिला जेबकतरों पर कसा गया नकेल, तीन गुना कम हुई जेबतराशी की घटनाएं

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Jul 21 2019 12:11PM
दिल्ली मेट्रो में महिला जेबकतरों पर कसा गया नकेल, तीन गुना कम हुई जेबतराशी की घटनाएं
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दिल्ली मेट्रो में जेबतराशी की घटनाओं में पिछले चार साल के दौरान तीन गुना तक कमी दर्ज की गयी है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली मेट्रो को यात्रियों के लिये अपराध मुक्त कराने के लिये, दिल्ली पुलिस द्वारा शुरु किये गये उपायों को लेकर हाल ही में राज्यसभा में रिपोर्ट पेश करते हुये यह जानकारी दी है।

नयी दिल्ली। दिल्ली मेट्रो में जेबतराशी की घटनाओं में पिछले चार साल के दौरान तीन गुना तक कमी दर्ज की गयी है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली मेट्रो को यात्रियों के लिये अपराध मुक्त कराने के लिये, दिल्ली पुलिस द्वारा शुरु किये गये उपायों को लेकर हाल ही में राज्यसभा में रिपोर्ट पेश करते हुये यह जानकारी दी है। मंत्रालय द्वारा दिल्ली पुलिस के हवाले से पेश आंकड़ों के अनुसार, मेट्रो में जेबतराशी में महिला गिरोहों की सक्रियता पर भी नकेल कसने में कामयाबी मिली है। इसके अनुसार पिछले चार साल में मेट्रो रेल में जेबतराशी की सर्वाधिक 1753 वारदात 2017 में दर्ज की गयीं। जबकि 2016 में यह संख्या 1313 थी, जो कि 2018 में घटकर 699 और 2019 में 31 मई तक 540 रह गयी है।

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दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में जेबतराश गिरोहों की वारदातों में महिलाओं की भागीदारी अधिक जरूर रही लेकिन इस पर प्रभावी नियंत्रण भी किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार चार साल में जेबतराश गिरोह की 17 वारदातें दर्ज की गयीं। इनमें 11 वारदातों को महिला गिरोहों ने और छह को पुरुष गिरोहों ने अंजाम दिया था। गिरोहबंद जेबतराशी पर नियंत्रण के आंकड़ें पेश करते हुये मंत्रालय ने बताया कि 2017 में मेट्रो में जेबतराशी करने वाले छह महिला गिरोह इन वारदातों में शामिल पाये गये। जबकि 2016 में यह संख्या एक थी जो कि 2018 में चार और 31 मई 2019 तक यह संख्या शून्य पर आ गयी। इस मामले में पुरुष जेबतराश गिरोहों की संख्या 2017 में शून्य, 2017 और 2018 में तीन-तीन थी, जबकि 2019 में 31 मई तक कोई पुरुष जेबतराश गिरोह नहीं पकड़ा गया। 

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मंत्रालय ने मेट्रो की यात्रा को अपराध मुक्त बनाने के लिये किये गये कारगर उपायों को जेबतराशी एवं अन्य वारदातों में कमी की वजह बताया है। इनमें मेट्रो स्टेशनों को 16 मेट्रो पुलिस थानों के दायरे में लाकर निरंतर निगरानी की भूमिका अहम है। इसके अलावा, मेट्रो परिसरों की सुरक्षा में तैनात केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के साथ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस के तालमेल को बढ़ा कर सुरक्षा निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाया जाना भी एक अहम कारक रहा है।

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