पढ़ें Cheetah के बारे में हर वो जानकारी जो आपके लिए जानना है जरूरी

Namibia cheetah
ANI
चीते की लंबी मांसपेशीय पूंछ एक पतवार की तरह स्थिर करने का काम करती है और उनके शरीर के वजन को संतुलित रखती है। शिकार की गतिविधि के अनुसार अपनी पूंछ घुमाते हुए चीते को तेज गति से उनका पीछा करने के दौरान अचानक तीखे मोड़ लेने में मदद मिलती है।

भारत में सात दशक बाद चीतों ने फिर से दस्तक दी है और विशेष विमान से नामीबिया से लाए गए आठ चीते अब मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान की शोभा बढ़ा रहे हैं। चीतों का स्वागत हर भारतीय कर रहा है और चीते की फोटो और वीडियो भी शेयर किये जा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि चीते के बारे में आप जानते कितना हैं? आज की रिपोर्ट में इसी विषय पर बात करते हैं और चीते से जुड़ी हर वो जानकारी आपको देंगे जो आपके लिए जानना है जरूरी।

क्या आपको पता है कि चीता महज तीन सेकंड में 100 मीटर की दौड़ लगा सकता है। उसकी यह स्पीड अधिकतर कारों से भी तेज है। लेकिन यह भी सही बात है कि वह आधा मिनट से ज्यादा अपनी यह रफ्तार कायम नहीं रख सकता। चीते की रफ्तार कितनी ज्यादा है इसे इस बात से समझ सकते हैं कि दुनिया के सबसे तेज धावक और ओलंपिक चैम्पियन उसेन बोल्ट का 100 मीटर की स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड 9.89 सेकंड है। यानि उसेन बोल्ट ने 9.89 सेकंड लगाकर 100 मीटर की दूरी तय की लेकिन यही दूरी चीता महज तीन सेकंड में पूरी कर सकता है।

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जहां तक चीते के तेजी से दौड़ने की गति ज्यादा देर तक बरकरार नहीं रख पाने की बात है तो इसके बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि चीता तेज धावक है, न कि मैराथन दौड़ने वाला। चूंकि वह लंबे समय तक अपनी गति बरकरार नहीं रख सकता तो उसे 30 सेकंड या उससे कम समय में अपने शिकार को पकड़ना होता है। अगर वह तेजी से शिकार नहीं कर पाता है तो वह हार मान लेता है और इस तरह उसके शिकार की सफलता दर 40 से 50 फीसदी है। अगर चीता शिकार कर भी लेता है तो वह आम तौर पर थक जाता है और उसे कुछ समय तक आराम करना होता है। यही वजह है कि तेंदुए, लकड़बग्घे और जंगली कुत्ते, गिद्ध जैसे मांसाहारी जीव अक्सर उसके शिकार को लूट लेते हैं।

चीते के तेज दौड़ने की शक्ति का कारण यह भी है कि चीते दुबले, लचीले शरीर वाले होते हैं और उनकी रीढ़ की हड्डी नरम होती है जो किसी गुच्छे या कुंडली की तरह फैल सकती है। चीते का सिर छोटा होता है जो हवा के प्रतिरोध को कम करता है और लंबी, पतली टांगें होती है जो उन्हें बड़े-बड़े कदम बढ़ाने में मदद करती हैं। चीते के पैर के तलवे सख्त और अन्य मांसाहारी जंतुओं की तुलना में कम गोल होते हैं। चीते के पैर के तलवे किसी टायर की तरह काम करते हैं जो उन्हें तेज, तीखे मोड़ों पर घर्षण प्रदान करते हैं।

इसके अलावा चीते की लंबी मांसपेशीय पूंछ एक पतवार की तरह स्थिर करने का काम करती है और उनके शरीर के वजन को संतुलित रखती है। शिकार की गतिविधि के अनुसार अपनी पूंछ घुमाते हुए चीते को तेज गति से उनका पीछा करने के दौरान अचानक तीखे मोड़ लेने में मदद मिलती है। चीता प्रजाति के शरीर पर आंख से लेकर मुंह तक विशिष्ट काली धारियां होती हैं और ये धारियां उन्हें सूर्य की चकाचौंध से बचाती हैं। ऐसा माना जाता है कि चीता राइफल के स्कोप की तरह काम करता है, जिससे उन्हें लंबी दूरी पर भी अपने शिकार पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

चीते दिन के दौरान सक्रिय रहते हैं और वे सुबह तथा दोपहर में देर तक शिकार करते हैं। चीता अकसर जंगली प्रजातियों का शिकार करता है और घरेलू जानवरों का शिकार करने से बचता है। हालांकि कई बार देखने में आया है कि बीमार या घायल और बूढ़ा या युवा या गैर अनुभवी चीता घरेलू मवेशियों को भी शिकार बना लेता है। इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि अकेला वयस्क चीता हर दो से पांच दिन में शिकार करता है और उसे हर तीन से चार दिन में पानी पीने की जरूरत होती है।

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जहां तक मादा चीता की बात है तो आपको बता दें कि वह एकांत जीवन व्यतीत करती हैं और वे केवल संभोग के लिए जोड़ी बनाती हैं तथा उसके बाद अपने शावकों को पालते हुए उनके साथ रहती हैं। मादा चीते की गर्भावस्था महज 93 दिन की होती है और वह छह शावकों को जन्म दे सकती हैं। जहां तक नर चीता की बात है तो वह आम तौर पर अकेला होता है लेकिन उसके भाई अकसर साथ रहते हैं और साथ मिलकर शिकार करते हैं। यही नहीं, चीता अपना ज्यादातर वक्त सोते हुए बिताता है और दिन में अत्यधिक गर्मी के दौरान बहुत कम सक्रिय रहता है। इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि शेर, बाघ, तेंदुए और जगुआर के मुकाबले चीते दहाड़ते नहीं हैं। जंगल में चीते का औसत जीवन काल 10-12 वर्ष का होता है और पिंजरे में वे 17 से 20 साल तक रह सकते हैं। बहरहाल, ‘‘प्रोजेक्ट चीता’’ के तहत सात दशक पहले विलुप्त होने के बाद देश में चीतों को फिर से लाया गया है। वाकई यह पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण की दिशा में किया गया एक बेहतरीन प्रयास है।

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