Bemata Goddess: हाथ में कलम और दूतों का साथ, Ujjain में विराजमान Bemata कैसे तय करती हैं नवजात का Destiny

Bemata Goddess
Instagram

विधाता माता को भय माता, बेमाता, विधात्री देवी, छठी मैया या फिर षष्ठी माता के रूप में जाना जाता है। लोक मान्यताओं के मुताबिक बच्चे के जन्म के छठे दिन ही विधाता देवी बच्चे के भाग्य का लेखा-जोखा लिखती हैं।

क्या आपने विधाता माता के बारे में जानते हैं। अगर आपका जवाब न है, तो आज हम आपको विधाता माता के बारे में बताने जा रहे हैं। विधाता माता को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। विधाता माता को भय माता, बेमाता, विधात्री देवी, छठी मैया या फिर षष्ठी माता के रूप में जाना जाता है। लोक मान्यताओं के मुताबिक बच्चे के जन्म के छठे दिन ही विधाता देवी बच्चे के भाग्य का लेखा-जोखा लिखती हैं।

उज्जैन स्थित है मंदिर

महाकाल की नगरी उज्जैन में विधाता देवी का फेमस मंदिर है। विधाता देवी का मंदिर पटनी बाजार के पास मगरमुहा की गली में स्थित है। इसका इतिहास करीब 1500 साल पुराना माना जाता है। इस मंदिर में विधाता देवी की करीब ढाई फीट ऊंची खड़ी अवस्था में मूर्ति विराजित है। इसको एक स्वयंभू मूर्ति माना जाता है।

इसे भी पढ़ें: Shani Dev Mantra: Shani Sade Sati और ढैय्या का कष्ट होगा कम, शनिवार को जरूर जपें ये विशेष Vedic Mantras और शनि स्त्रोत

विधाता देवी के उल्टे हाथ में कपाल है। तो वहीं उनके सीधे हाथ में कलम है। इनके आसपास दो दूत भी विराजमान हैं। एक दूत का नाम चित्र और दूसरे का नाम गुप्त है। माना जाता है कि जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है, तो विधाता देवी के यही दोनों दूत माता को इसकी जानकारी देते हैं।

बच्चों के साथ आते हैं श्रद्धालु

देवी भागवत और दुर्गा सप्तशती सहित अवंतिका पुराण में विधाता माता का उल्लेख मिलता है। विधाता माता का पौराणिक नाम विद्यात्तय है। धार्मिक मान्यता है कि विधाता माता बच्चे के जन्म के छठे दिन उसका भाग्य लिखती हैं। यही वजह है कि विधाता माता के मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में विधाता माता के दर्शन करते हैं, जिससे कि उनके बच्चे को सौभाग्य की प्राप्ति हो सके।

जानें कैसे मिली मूर्ति

बताया जाता है कि एक भक्त को माता ने सपने में दर्शन दिए थे, सपने में इस स्थान पर मूर्ति होने के संकेत मिले थे। जब उस स्थान पर खुदाई की गई तो वहां पर विधाता देवी की मूर्ति निकली। जिसके बाद इसी स्थान पर मूर्ति की स्थापना की गई और फिर मंदिर का निर्माण करवाया गया। तभी से यहां पर यह मंदिर स्थित है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़