NALSA की तीसरी National Lok Adalat में 2.10 करोड़ से अधिक मामले निपटे

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति से 2.10 करोड़ से अधिक मामलों का समाधान किया गया। इन फैसलों में कुल 13,589.28 करोड़ रुपये की समझौता राशि शामिल रही। 26 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में गठित पीठों में बड़ी संख्या में प्री-लिटिगेशन और अदालती विवाद सुलझाए गए।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने शनिवार को इस साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जिसमें पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से 2.10 करोड़ से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान देशभर की अदालतें और न्यायाधिकरण वाद-विवाद के बजाय बातचीत और समझौते के केंद्र बने। नालसा के एक बयान के अनुसार, 26 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में लोक अदालत की पीठें गठित की गईं।
इनमें उच्च न्यायालयों से लेकर तालुका अदालतों तक के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, अर्ध-कानूनी स्वयंसेवक और पक्षकार शामिल हुए। बयान के अनुसार शनिवार शाम सात बजे तक उपलब्ध अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक, राजस्थान और दिल्ली एवं कुछ अन्य क्षेत्रों के लंबित आंकड़ों को छोड़कर कुल 2,10,39,112 मामलों का निपटारा किया गया। बयान के मुताबिक इनमें से 1,90,75,743 मामले मुकदमा दायर होने से पहले (प्री-लिटिगेशन) के थे, जिन्हें सीधे लोक अदालत में लाया गया था, जबकि 19,63,369 मामले अदालतों में पहले से लंबित थे।
इन समझौतों में कुल 13,589.28 करोड़ रुपये का निपटारा मूल्य शामिल था। कर्नाटक, राजस्थान और दिल्ली में यह प्रक्रिया क्रमश: 19 सितंबर, 10 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) और नालसा के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने लोक अदालत से पहले अपने संदेश में कहा कि न्याय तक पहुंच को हर नागरिक के जीवन की वास्तविकता बनाना चाहिए।
उन्होंने लोगों से विवादों के समाधान के लिए इस मंच का इस्तेमाल करने की अपील की, क्योंकि यह तेज और सरल तरीका है। जिन मामलों को निपटारा किया गया, उनमें चेक बाउंस के मामले, मोटर दुर्घटना के दावे, वैवाहिक विवाद, श्रम विवाद, उपभोक्ता शिकायतें, ज़मीन अधिग्रहण के मामले, उत्तराधिकार से जुड़े विवाद, छोटे व्यवसायों से जुड़े मध्यस्थता के दावे, समझौते योग्य आपराधिक मामले और ट्रैफ़िक चालान शामिल थे। इनके अलावा, बैंक रिकवरी के मामले, नौकरी से जुड़े मामले, राजस्व विवाद और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें भी शामिल थीं।
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