Reform UK Party को दो क्रिप्टो अरबपतियों से मिले 7.2 करोड़ पाउंड का चंदा, ब्रिटेन में विवाद

नाइजल फराज की अगुवाई वाली पार्टी रिफॉर्म यूके को बेन डेलो और क्रिस्टोफर हार्बोर्न की ओर से 9.7 करोड़ डॉलर का बड़ा चंदा मिला है। इस भारी वित्तीय मदद के बाद विपक्षी लिबरल डेमोक्रेट्स ने ब्रिटिश राजनीति में चुनावी चंदे की सीमा तय करने की मांग उठाई है।
‘ब्रेक्जिट’ अभियानकर्ता नाइजल फराज के नेतृत्व वाली अप्रवासन-विरोधी पार्टी ‘रिफॉर्म यूके’ को इस सप्ताहांत दो क्रिप्टो अरबपतियों से 7.2 करोड़ पाउंड (लगभग 9.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर) प्राप्त हुए हैं, जिससे ब्रिटिश राजनीति में पैसे के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ‘बिटमेक्स क्रिप्टोकरेंसी’ मंच के सह-संस्थापक बेन डेलो द्वारा पार्टी को 3.6 करोड़ पाउंड (4.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर) देने की खबर सामने आने के बाद, क्रिप्टो निवेशक क्रिस्टोफर हार्बोर्न ने शनिवार को इतनी ही राशि का दान देने की घोषणा की। हार्बोर्न ने कहा कि वह ‘रिफॉर्म यूके’ का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इसकी नीतियां उन निवेशों को आकर्षित करेंगी जिनकी ब्रिटेन को अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा एवं अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए जरूरी राजस्व जुटाने के लिए आवश्यकता है।
हालांकि स्थापित राजनीतिक दलों ने तुरंत चेतावनी दी कि अरबपति कारोबारियों से मिलने वाले असीमित चंदे से चुनावों में भ्रष्टाचार का खतरा पैदा हो सकता है। वर्तमान में ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में तीसरे सबसे बड़े दल ‘लिबरल डेमोक्रेट्स’ ने प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से चंदे की सीमा तय करने और ब्रिटिश लोकतंत्र की रक्षा करने का आह्वान किया। ‘लिबरल डेमोक्रेट्स’ की प्रवक्ता लिसा स्मार्ट ने एक बयान में कहा, “नाइजल फराज सत्ता में पहुंचने के लिए पैसे का इस्तेमाल कर ट्रंप के अमेरिका को हमारे देश में लाना चाहते हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री के सरकारी आवास का संदर्भ देते हुए कहा, “वह (नाइजल) नंबर 10 (प्रधानमंत्री आवास) तक पहुंचने की कोशिश ऐसे कर रहे हैं, जैसे वह मोनोपोली बोर्ड का कोई पड़ाव हो।” डेलो को पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धनशोधन रोधी कानूनों के उल्लंघन के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद माफी दे दी थी।
वह हाल में हांगकांग से वापस ब्रिटेन आ गए हैं। टेलीग्राफ अखबार में लिखते हुए डेलो ने कहा कि उनका दान ब्रिटिश राजनीति को नियंत्रित करने वाले “गठजोड़” को तोड़ने में मदद करने के लिए था। यह स्पष्ट रूप से उन लेबर और कंजर्वेटिव पार्टियों के संदर्भ में था, जिनका पिछले एक सदी से चुनावों में दबदबा रहा है।
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