Indigo के दबदबे के बीच पिछड़ती Air India, Tata Group के सामने Market Share बचाने की बड़ी चुनौती

टाटा समूह के तहत एयर इंडिया के पुनर्गठन में पांच से दस वर्ष का समय लगने का अनुमान है क्योंकि पुरानी तकनीकी व्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं सुधार प्रक्रिया को धीमा कर रही हैं। इंडिगो की 66.3 प्रतिशत की रिकॉर्ड बाजार हिस्सेदारी और एयर इंडिया का बढ़ता वित्तीय घाटा भारतीय विमानन क्षेत्र में टाटा के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा और गहरे परिचालन संकट का संकेत देते हैं। एयर इंडिया, टाटा समूह, विमानन बाजार, इंडिगो, बिजनेस न्यूज।
टाटा समूह के द्वारा एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद से अब तक की स्थिति अनुमान से कहीं अधिक कठिन साबित हो रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन ने शेयरधारकों को बताया है कि एयर इंडिया के पूर्ण पुनर्गठन में पांच से दस वर्ष तक का समय लग सकता है। उन्होंने माना कि विमानों के कलपुर्जों की आपूर्ति में लगातार देरी, पुरानी तकनीकी व्यवस्था, प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत और कई बाहरी चुनौतियों ने इस प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।
बता दें कि भारतीय विमानन बाजार में इंडिगो लगातार अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के जून के आंकड़ों के अनुसार इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 66.3 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वहीं एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को मिलाकर टाटा समूह की हिस्सेदारी घटकर 23.9 प्रतिशत रह गई है। फरवरी में यह करीब 27 प्रतिशत थी। अकासा एयर 6.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि स्पाइसजेट की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गई है।
गौरतलब है कि विमानन कारोबार में बड़े नेटवर्क वाली कंपनियों को यात्रियों, हवाई अड्डों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ बेहतर स्थिति मिलती है। ऐसे में बाजार हिस्सेदारी बढ़ने से परिचालन लागत कम करने और अधिक यात्रियों को आकर्षित करने में मदद मिलती है। यही कारण है कि इंडिगो लगातार मजबूत होती जा रही है, जबकि एयर इंडिया अपनी चुनौतियों से जूझ रही है।
वित्तीय स्थिति भी कंपनी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया को 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध घाटा हुआ, जो पिछले वर्ष के 10,859 करोड़ रुपये के नुकसान से दोगुने से भी अधिक है। इसके बावजूद कंपनी विमानों के आधुनिकीकरण, नई तकनीक और सेवा सुधार पर लगातार निवेश कर रही है।
टाटा समूह को एयर इंडिया के साथ केवल एक घाटे में चल रही कंपनी नहीं मिली थी, बल्कि वर्षों से सरकारी स्वामित्व के दौरान जमा हुई कई समस्याएं भी विरासत में मिली थीं। पुराने विमान, कमजोर तकनीकी व्यवस्था, बिखरी रखरखाव प्रणाली, अलग-अलग कार्य संस्कृति और सेवा गुणवत्ता में गिरावट जैसी चुनौतियों को एक साथ सुधारना आसान नहीं रहा है।
इसी दौरान टाटा समूह ने एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, विस्तारा और एयरएशिया इंडिया के एकीकरण का बड़ा फैसला भी लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग विमान सेवाओं का विलय किसी भी कंपनी के लिए जटिल प्रक्रिया होती है, क्योंकि इसमें कर्मचारियों, आरक्षण व्यवस्था, परिचालन प्रणाली और कार्य संस्कृति को एक समान बनाना पड़ता है।
कंपनी को बाहरी परिस्थितियों ने भी प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में तनाव से ईंधन महंगा हुआ, कई क्षेत्रों में हवाई मार्ग प्रभावित हुए, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से लागत बढ़ी और एआई-171 विमान दुर्घटना के बाद कंपनी को अतिरिक्त जांच और परिचालन दबाव का सामना करना पड़ा है।
हालांकि टाटा समूह का कहना है कि सुधार की प्रक्रिया जारी है। छोटे विमानों के नवीनीकरण का काम पूरा हो चुका है, बड़े विमानों का आधुनिकीकरण जारी है और नई तकनीक लागू की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एयर इंडिया आने वाले वर्षों में अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है तो भारतीय विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा मजबूत हो सकती है। फिलहाल बाजार में इंडिगो की बढ़ती बढ़त और एयर इंडिया की धीमी वापसी पूरे विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
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