सोने-चांदी पर Import Duty बढ़ी, सरकार का Forex Reserve बचाने और CAD संभालने का मास्टरप्लान!

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ANI

सरकार ने पश्चिम एशिया संकट और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य गैर-आवश्यक आयात को कम करके विदेशी मुद्रा को कच्चे तेल और उर्वरक जैसे जरूरी आयातों के लिए बचाना है, ताकि बढ़ते चालू खाते के घाटे को नियंत्रित किया जा सके।

 सरकार के सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का उद्देश्य गैर आवश्यक आयात पर रोक लगाना और विदेशी मुद्रा के उपयोग को कच्चे तेल, उर्वरकों, औद्योगिक कच्चे माल तथा पूंजीगत वस्तुओं जैसे आवश्यक आयातों के लिए प्राथमिकता देना है जो सीधे आर्थिक गतिविधि एवं खाद्य सुरक्षा को समर्थन देते हैं। सूत्रों ने बुधवार को यह बात कही। सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर बुधवार को 15 प्रतिशत कर दिया। प्लैटिनम पर कर 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है।

इसके परिणामस्वरूप सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी कर में बदलाव किए गए हैं। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 13 मई से सामाजिक कल्याण अधिभार (एसडब्ल्यूएस) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) में वृद्धि की गई है। पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद एवं विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के बाद यह अधिसूचना जारी हुई है।

सूत्रों ने कहा कि इस कदम से सरकार ‘‘ उभरते जोखिमों का विवेकपूर्ण प्रबंधन करने तथा चालू खाते पर दबाव और बढ़ने से पहले संभावित बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता कम करने’’ का प्रयास कर रही है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक मई को समाप्त सप्ताह में घटकर 690 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जो 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद पश्चिम एशिया युद्ध शुरू हुआ जिससे महंगे आयात के कारण रुपये पर दबाव पड़ा है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां घटकर 551.8 अरब डॉलर रह गईं जबकि स्वर्ण भंडार घटकर 115 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। सूत्रों ने कहा, ‘‘ भारत के विदेशी मुद्रा संसाधनों को कच्चे तेल, उर्वरकों, औद्योगिक कच्चे माल, रक्षा आवश्यकताओं, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों एवं पूंजीगत वस्तुओं जैसे आवश्यक आयातों के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ये आयात सीधे आर्थिक गतिविधि, खाद्य सुरक्षा, अवसंरचना, विनिर्माण, निर्यात और राष्ट्रीय सुरक्षा को समर्थन देते हैं।’’ इसके विपरीत, बहुमूल्य धातुएँ, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हुए भी, मुख्य रूप से उपभोग एवं निवेश पर आधारित होती हैं।

ऐसे आयात में विदेशी मुद्रा का काफी इस्तेमाल होता है। सूत्रों ने कहा, ‘‘ इसलिए, बाहरी दबाव के दौर में विवेकाधीन आयातों में संतुलित कमी समग्र व्यापक आर्थिक स्थिरता एवं बाह्य क्षेत्र के विवेकपूर्ण प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।’’ पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध के कारण कच्चे तेल, खाद्य एवं उर्वरक आयात की कीमतें बढ़ गई हैं। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। 30 अप्रैल को यह चार वर्ष के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का 87 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 46 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास से होकर आता है।

भारत अपनी एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक खाड़ी क्षेत्र से आता है। इसके अलावा, भारत की वार्षिक धन प्रेषण राशि का 38 प्रतिशत खाड़ी देशों से आता है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि शुल्क वृद्धि ‘‘असाधारण बाहरी परिस्थितियों’’ के बीच एक ‘‘निवारक कदम’’ है। यह विवेकपूर्ण आर्थिक शासन का संकेत है। यह उभरते बाहरी जोखिमों के प्रति लक्षित हस्तक्षेप के माध्यम से भारत की सक्रिय प्रतिक्रिया को दर्शाता है। इससे बाद में अधिक कठोर सुधारात्मक उपायों की आवश्यकता कम होती है।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘ इसके अलावा, मात्रात्मक प्रतिबंधों या अधिक कठोर आयात-प्रबंधन उपकरणों का सहारा लेने के बजाय, यह दृष्टिकोण मध्यम मूल्य-आधारित हतोत्साहनों पर निर्भर करता है जो बाजार के लचीलेपन और उपभोक्ता पसंद को बनाए रखते हैं।’’ सूत्रों ने कहा कि बहुमूल्य धातुओं पर सीमा शुल्क में वृद्धि का उद्देश्य अनावश्यक आयात मांग को नियंत्रित करना और बाह्य खाते पर दबाव कम करना है। यह ‘‘संतुलित और अनुपातिक हस्तक्षेप’’ है जो ऐसे समय में गैर-आवश्यक आयातों में कमी को प्रोत्साहित करता है जब बाहरी जोखिम ऊंचे बने हुए हैं। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 0.8 प्रतिशत से बढ़कर 1.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

सूत्रों ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में देश के बाह्य क्षेत्र का विवेकपूर्ण प्रबंधन आवश्यक हो जाता है। भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। यहां आयात मुख्य रूप से आभूषण उद्योग द्वारा संचालित होता है। भारत ने 2022 में भी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रुपये में गिरावट और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के लिए सोने पर आयात कर 15 प्रतिशत तक बढ़ाया था। इसके बाद, केंद्रीय बजट 2024-25 में सोने व चांदी पर सीमा शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत और प्लेटिनम पर 15.4 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया था जो उस समय की अपेक्षाकृत बेहतर व्यापक आर्थिक एवं बाह्य क्षेत्र की स्थिति को दर्शाता है।

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