छोटे निवेशकों के आकर्षण के लिए NSE IPO का प्राइस बैंड रखा गया कम, आशीष चौहान ने दी जानकारी

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देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आगामी 22,569 करोड़ रुपये के निर्गम में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए दरें तय की गई हैं। यह पब्लिक ऑफर 17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुला रहेगा, जिसके लिए 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर का दायरा निर्धारित है। बड़े संस्थागत निवेशकों के एंकर बुक में भी उम्मीद से कहीं ज्यादा दिलचस्पी देखने को मिली है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लि. (एनएसई) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशीष कुमार चौहान ने मंगलवार को कहा कि खुदरा निवेशकों को ध्यान में रखते हुए एनएसई के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए मूल्य दायरा तय किया गया है। देश के सबसे बड़े शेयर बाजार एनएसई के आईपीओ का मूल्य दायरा उम्मीद से कम रहने की चर्चा के बीच चौहान ने यह बात कही। चौहान ने यह भी कहा कि 22,569 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में ‘एंकर बुक’ यानी बड़े निवेशकों की जतायी गयी प्रतिबद्धता काफी बड़ी है और हमारी उम्मीद से कहीं अधिक है।

इससे इस बड़े निर्गम में संस्थागत निवेशकों की मजबूत रुचि का संकेत मिलता है। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट, फ्रैंकलिन टेम्पलटन और फिडेलिटी इंटरनेशनल जैसी प्रमुख निवेश कंपनियों ने एंकर बुक में शुरुआती रुचि दिखाई है। उन्होंने बताया कि नॉर्वे बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और जीआईसी के भी एंकर बुक में बोली लगाने की संभावना है।

एनएसई का बहुप्रतीक्षित आईपीओ आम निवेशकों के लिए 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। कंपनी ने इसके लिए प्रति शेयर 1,700 से 1,785 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है। इसके जरिये उच्च मूल्य सीमा पर 22,569 करोड़ रुपये तक जुटाए जाने की उम्मीद है।

एंकर यानी बड़े निवेशकों 16 सितंबर को शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे। निवेशक न्यूनतम आठ शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे और इसके बाद आठ-आठ शेयरों के गुणक में बोली के लिए आवेदन दे सकेंगे। निर्गम का मूल्य दायरा बाजार की अपेक्षा से कम रखे जाने से जुड़े एक सवाल पर चौहान ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मर्चेंट बैंकरों ने खुदरा निवेशकों को ध्यान में रखते हुए यह कीमत तय की है।

उम्मीद है कि खुदरा निवेशक इसमें निवेश के लिए आकर्षित होंगे।’’ उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘एनएसई के निवेशक 30 जून, 2026 तक देश के 99 प्रतिशत से अधिक पिन कोड क्षेत्रों में मौजूद थे, जिससे देशभर के लोगों के लिए वित्तीय अवसरों तक पहुंच आसान हुई है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के विशिष्ट पंजीकृत निवेशकों की संख्या में संचयी रूप से सालाना आधार पर 26.23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह संख्या 31 मार्च, 2020 को 3.08 करोड़ थी और 30 जून, 2026 को बढ़कर 13.23 करोड़ हो गई। एक रुपये अंकित मूल्य वाले इस आईपीओ में मौजूदा शेयरधारक 12,64,36,650 शेयरों की बिक्री पेशकश करने जा रहे हैं।

बिक्री करने वाले शेयरधारकों में भारतीय स्टेट बैंक, कनाडा पेंशन योजना निवेश बोर्ड, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) पीटीई लिमिटेड, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। बाजार नियामक सेबी के नियमों के अनुसार, इसमें अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा पात्र संस्थागत खरीदारों के लिए, कम-से-कम 15 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए और कम-से-कम 35 प्रतिशत खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। एनएसई ने 1994 में कामकाज शुरू किया था और यह भारत में इलेक्ट्रॉनिक या स्क्रीन आधारित कारोबार शुरू करने वाला पहला शेयर बाजार था।

यह शेयरों की सूचीबद्धता, कारोबार, समाशोधन एवं निपटान, सूचकांक और बाजार आंकड़ों जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है। कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 और 30 जून, 2026 को समाप्त तीन महीने की अवधि में नकद बाजार में उसका कारोबार के कुल मूल्य के आधार पर बाजार हिस्सा क्रमशः 92.99 प्रतिशत और 93.05 प्रतिशत रहा। इसी तरह, शेयर वायदा में उसका बाजार हिस्सा क्रमशः 99.79 प्रतिशत और 99.72 प्रतिशत रहा।

तीस जून, 2026 तक एनएसई पर 26.136 करोड़ पंजीकृत निवेशक खाते, 1,328 कारोबारी सदस्य और 3,005 सूचीबद्ध कंपनियां थीं। सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 474.08 लाख करोड़ रुपये था। बाजार नियामक सेबी द्वारा पिछले सप्ताह निर्गम आगे बढ़ाने की मंजूरी दिए जाने के बाद एनएसई का यह आईपीओ आया है।

‘को-लोकेशन’ यानी कुछ कारोबारियों को तेजी से सूचना मिलने से जुड़े विवाद समेत विभिन्न नियामकीय अड़चनों के कारण उसकी सूचीबद्धता योजना करीब एक दशक से अटकी हुई थी।

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