Share Market में कम होगा अचानक उतार-चढ़ाव, SEBI के नए ट्रेडिंग नियमों से मिलेगी स्थिरता

SEBI
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Ankit Jaiswal । Sep 13 2026 7:32PM

सेबी ने वायदा अनुबंधों की एक्सपायरी वाले दिन कारोबार व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव और बाजार में कृत्रिम हेरफेर पर रोक लगेगी। नए प्रस्तावों में निपटान मूल्य, समापन नीलामी, संकेतात्मक कीमत और आदेश वापस लेने से जुड़े नियम शामिल हैं।

बाजार में कारोबार के आखिरी दिन होने वाली तेज हलचल को नियंत्रित करने के लिए सेबी के प्रस्तावित बदलावों को बाजार विशेषज्ञों का समर्थन मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई व्यवस्था से कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव और आर्टिफिशियल तरीके से कीमत प्रभावित करने की गुंजाइश घट सकती है। साथ ही, वायदा अनुबंधों के निपटान की प्रक्रिया भी ज्यादा आसान और स्पष्ट हो सकती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सेबी ने शनिवार को एक परामर्श पत्र जारी कर समापन नीलामी सीजन, बाजार के समय और वायदा अनुबंधों के निपटान से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका सीधा असर उन दिनों पर पड़ेगा जब शेयर बाजार में वायदा अनुबंधों की अवधि समाप्त होती है और कारोबार के अंतिम घंटों में गतिविधियां अचानक बढ़ जाती हैं।

प्रस्ताव में सबसे अहम बदलाव वायदा अनुबंधों के निपटान मूल्य को नकद बाजार के अंतिम मूल्य से अलग करने का है। आनंद राठी वेल्थ के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी फिरोज अजीज ने कहा कि सेबी ने तीन बड़ी समस्याओं पर ध्यान दिया है। इनमें नकद और वायदा बाजार के अंतिम मूल्यों का संबंध, नीलामी के दौरान संकेतात्मक कीमतों से पैदा होने वाला उतार-चढ़ाव और आदेश वापस लेने की गुंजाइश शामिल है।

अजीज के मुताबिक, वायदा अनुबंध का निपटान जरूरी नहीं कि नकद बाजार के बिल्कुल अंतिम मूल्य पर ही हो। उनके अनुसार दोनों बाजारों का उद्देश्य अलग है और निपटान की व्यवस्था भी उसी हिसाब से होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समापन नीलामी के दौरान सूचकांक की संकेतात्मक कीमत दिखाना बंद करने से बिना पूरे हुए आदेशों के कारण पैदा होने वाली अनावश्यक हलचल कम हो सकती है।

सेबी ने एक प्रतिशत की तय सीमा से बाहर लगाए गए आक्रामक आदेशों को ज्यादा बाध्यकारी बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। अजीज का मानना है कि इससे कोई कारोबारी केवल कीमत को प्रभावित करने के लिए बड़ा आदेश लगाकर बाद में उसे वापस लेने जैसी रणनीति आसानी से नहीं अपना पाएगा।

इसके अलावा नीलामी सीजन में आंशिक रूप से छिपे बड़े आदेशों की सुविधा देने, बदलाव लागू करने के बीच का समय घटाने और नीलामी के बाद वायदा कारोबार की अवधि पांच मिनट करने जैसे प्रस्ताव भी रखे गए हैं। अजीज ने इन्हें व्यावहारिक बदलाव बताया है।

वहीं, अल्फा एएमसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कोष प्रबंधक राजेश सिंगला ने कहा कि समापन नीलामी की मूल अवधारणा सही है, लेकिन इसके लागू होने से कुछ कम कारोबार वाले शेयरों में परेशानी सामने आई है। ऐसे शेयरों में कुछ बड़े आदेश कीमत तय करने की प्रक्रिया पर ज्यादा असर डाल सकते हैं और इससे अवधि समाप्त होने वाले दिन उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। उन्होंने कारोबार के बीच नीलामी कीमत की जानकारी देने, बाजार निर्माताओं को प्रोत्साहन देने और अलग-अलग आकार की कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।

बता दें कि सेबी ने बाजार प्रतिभागियों से मिले सुझावों के बाद ये बदलाव प्रस्तावित किए हैं। तीन अगस्त से वायदा कारोबार वाले शेयरों के लिए नकद बाजार में समापन नीलामी व्यवस्था शुरू की गई थी। इससे पहले अंतिम कीमत पिछले 30 मिनट में हुए कारोबार के मात्रा-भारित औसत से तय होती थी। नई व्यवस्था में खरीद और बिक्री के कुल आदेशों के आधार पर संतुलन मूल्य खोजकर अंतिम कीमत तय की जाती है।

अब सेबी का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है जिसमें निपटान मूल्य स्पष्ट हो, उसे समझना आसान हो और अवधि समाप्ति वाले दिनों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव की गुंजाइश कम से कम हो। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रस्तावित बदलाव इसी दिशा में बाजार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश हैं।

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