Toyota का मास्टरस्ट्रोक! Koji Sato की जगह अब Kenta Kon संभालेंगे CEO का पद, जानें क्या है नई रणनीति।

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Ankit Jaiswal । Feb 6 2026 8:05PM

टोयोटा ने केंटा कोन को नया सीईओ बनाकर अपने शीर्ष नेतृत्व में बदलाव किया है, जो कंपनी की सफल हाइब्रिड रणनीति और मजबूत तिमाही नतीजों के बीच हुआ है। इस फेरबदल का उद्देश्य आंतरिक वित्तीय प्रबंधन को सख्त करना और चीनी ऑटो कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच वैश्विक बाजार में अपनी बढ़त बनाए रखना है।

टोयोटा मोटर कॉर्प ने अपने शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया है। बता दें कि कंपनी ने अपने मौजूदा फाइनेंस चीफ केंटा कोन को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का ऐलान किया है। यह बदलाव एक अप्रैल से लागू होगा, जब वर्तमान सीईओ कोजी साटो पद छोड़कर वाइस चेयरमैन और नए बनाए गए चीफ इंडस्ट्री ऑफिसर की भूमिका संभालेंगे।

गौरतलब है कि केंटा कोन टोयोटा के चेयरमैन अकियो टोयोडा के बेहद करीबी माने जाते हैं और लंबे समय तक उनके निजी सचिव भी रह चुके हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, कोन को लागत नियंत्रण और सख्त वित्तीय अनुशासन के लिए जाना जाता है। उन्हें टोयोटा की फोर्कलिफ्ट इकाई टोयोटा इंडस्ट्रीज़ के प्रस्तावित बायआउट का मुख्य रणनीतिकार भी माना जा रहा है, हालांकि इस सौदे को लेकर कुछ अल्पांश शेयरधारकों ने पारदर्शिता और मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं।

केंटा कोन ने 2009 से 2017 तक अकियो टोयोडा के सचिव के रूप में काम किया था। इसके बाद उन्हें अकाउंटिंग डिवीजन का प्रमुख बनाया गया। अकियो टोयोडा ने करीब 14 वर्षों तक टोयोटा का नेतृत्व करने के बाद 2023 में कोजी साटो को सीईओ बनाया था। साटो के कार्यकाल के दौरान कंपनी को इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन हाइब्रिड तकनीक पर फोकस ने टोयोटा को प्रतिस्पर्धियों से बेहतर स्थिति में बनाए रखा।

नेतृत्व बदलाव की घोषणा तीसरी तिमाही के नतीजों के साथ की गई, जिसमें कंपनी ने पूरे साल के ऑपरेटिंग प्रॉफिट अनुमान को करीब 12 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। कमजोर येन और लागत में कटौती इसका मुख्य कारण रहे। इस घोषणा के बाद टोयोटा के शेयरों में तेजी देखी गई और कारोबारी दिन के अंत में शेयर करीब दो प्रतिशत ऊपर बंद हुए।

ऑटो उद्योग में इस समय चीनी कंपनियां तेजी से बाजार में पकड़ बना रही हैं। जहां कई वैश्विक कार निर्माता इलेक्ट्रिक वाहनों में भारी निवेश के चलते नुकसान झेल रहे हैं, वहीं टोयोटा की हाइब्रिड रणनीति अब दूरदर्शी साबित होती दिख रही है। पिछले साल भी टोयोटा दुनिया की सबसे ज्यादा कारें बेचने वाली कंपनी बनी रही।

नई जिम्मेदारियों के तहत केंटा कोन आंतरिक प्रबंधन और वित्तीय फैसलों पर ध्यान देंगे, जबकि कोजी साटो उद्योग से जुड़े बड़े रणनीतिक मुद्दों पर काम करेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव तेजी से फैसले लेने और गैर-ऑटोमोटिव क्षेत्रों में मजबूत रणनीति बनाने के लिए किया गया है। केंटा कोन का मोबिलिटी टेक यूनिट ‘वोवन बाय टोयोटा’ में वित्तीय अनुभव भी सॉफ्टवेयर और तकनीकी दौड़ में कंपनी के लिए अहम साबित हो सकता है।

हालांकि बीते कुछ वर्षों में टोयोटा के शेयरों ने मजबूत रिटर्न दिया है, फिर भी दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बाजारों में कंपनी की हिस्सेदारी कुछ हद तक चीनी ब्रांड्स के हाथों घटी है। ऐसे में यह नेतृत्व बदलाव आने वाले समय में टोयोटा की दिशा और रफ्तार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, ऐसा उद्योग जगत का मानना है और फिलहाल कंपनी इसी नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही हैं।

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