वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित कानून नए डेटा संरक्षण बोर्ड को स्वतंत्रता देगा

Vaishnav
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वैष्णव ने ‘टाइम्स नाउ समिट 2022’ में डिजिटल व्यक्तिगत आंकड़ा संरक्षण (डीपीडीपी) विधेयक के मसौदे और निगरानी से जुड़े सवालों पर हो रही आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इसमें आतंकवादी खतरों और साइबर खतरों के साथ ही वैश्विक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाएगा।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि रिजर्व बैंक और सेबी की तरह नए आंकड़ा संरक्षण बोर्ड की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सरकार द्वारा आंकड़ा संरक्षण विधेयक के मसौदे में प्रस्तावित निगरानी निकाय की स्वतंत्रता को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए यह बात कही। वैष्णव ने ‘टाइम्स नाउ समिट 2022’ में डिजिटल व्यक्तिगत आंकड़ा संरक्षण (डीपीडीपी) विधेयक के मसौदे और निगरानी से जुड़े सवालों पर हो रही आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इसमें आतंकवादी खतरों और साइबर खतरों के साथ ही वैश्विक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि इन वास्तविकताओं पर विचार करना होगा और एक संतुलित नजरिया अपनाना होगा। प्रस्तावित आंकड़ा संरक्षण बोर्ड कितना स्वतंत्र होगा, इस सवाल के जवाब में वैष्णव ने कहा कि स्वतंत्रता और स्वायत्तता कानून से आती है। उन्होंने दुनिया भर में आरबीआई, सेबी की प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए कहा कि मसौदा आंकड़ा संरक्षण विधेयक में इस बात का साफ उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित आंकड़ा संरक्षण बोर्ड स्वतंत्र होगा और एक तय तरीके से काम करेगा।

वैष्णव ने कहा, ‘‘सेबी और आरबीआई बोर्ड की नियुक्ति कौन करता है... सरकार नियुक्त करती है। क्या ये निकाय स्वतंत्र नहीं हैं... स्वतंत्रता और स्वायत्तता कानून से आती है... अगर आप दुनिया में कहीं भी जाएं, तो आरबीआई, सेबी और ट्राई जैसे निकायों की बहुत अधिक प्रतिष्ठा है।’’ उन्होंने बताया कि सरकार को उम्मीद है कि नया विधेयक संसद के बजट सत्र में पारित हो जाएगा। मंत्री ने सोशल मीडिया मंच के बारे में कहा कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है, और यह शक्ति तकनीकी कंपनियों को नहीं दी जा सकती है। उन्होंने साफ किया कि सोशल मीडिया मंचों को भारत के कानूनों का पालन करना होगा। वैष्णव ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि समाज को नियंत्रित करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून बनाने की शक्ति संसद के पास है और किसी के पास नहीं है।

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