अर्जेंटीना को जिताया वर्ल्ड कप फिर खुद ड्रग्स से बर्बाद किया कॅरियर, माराडोना की अनसुनी कहानियां !

अर्जेंटीना को जिताया वर्ल्ड कप फिर खुद ड्रग्स से बर्बाद किया कॅरियर, माराडोना की अनसुनी कहानियां !

जब माराडोना अपने खेल में लगातार नाम कमा रहे थे। यह साल 1982 का वक्त था जब माराडोना का कॅरियर ऊंचाइयों को छू रहा था। लेकिन जब सब कुछ अच्छा चल रहा था ठीक उसी समय माराडोना ने कोकीन लेना शुरू किया था। उन्हें नशे की लत पड़ चुकी थी।

फुटबॉल जगत को एक बड़ा सदमा लगा है। एक ऐसी घटना हुई है जिसने फुटबॉल से उसके सबसे बड़े दिग्गज को छीन लिया। विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े खिलाड़ी और अर्जेंटीना को 1986 में वर्ल्ड कप जिताने वाले डिएगो माराडोना नहीं रहे। 25 नवंबर 2020 को कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका देहांत हो गया। माराडोना अपने खेल की वजह से हर किसी के दिल में लंबे समय तक बसे रहे । मैदान पर जब माराडोना स्किल्स दिखाते थे तो दर्शकों की ताली बजाना नहीं रुकती थी। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के झुग्गी-झोपड़ियों वाले एक कस्बे में पैदा होने वाले माराडोना के बारे में किसी ने अंदाजा नहीं लगाया होगा कि यह आगे जाकर फुटबॉल जगत का सबसे बड़ा सितारा बन जाएगा। अपनी ग़रीबी से लड़ते हुए माराडोना सिर्फ 16 साल की उम्र में फ़ुटबॉल के सुपरस्टार बन चुके थे। माराडोना ने अपने बढ़िया खेल से अपना कॅरियर शानदार किया। टीम को वर्ल्ड चैंपियन भी बनाया। फुटबॉल जगत के बड़े दिग्गजों में अपना नाम शुमार किया। इसके साथ ही ड्रग्स की वजह से ना सिर्फ अपना कॅरियर खराब किया बल्कि निजी जिंदगी से लेकर अपनी सेहत तक को खतरे में ढकेल दिया।

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जब अर्जेंटीना को अकेले वर्ल्ड कप जिता गए थे माराडोना

1986 के वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल माराडोना की जिंदगी में काफी अहम था। यह वह मैच जिसने दुनिया को माराडोना के असली नाम से रूबरू कराया। इस मैच में माराडोना ने कुछ ऐसा किया था। जिसकी चर्चा हमेशा होती रहेगी। मेक्सिको में क्वार्टर फ़ाइनल का यह मैच अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच था। दोनों देशों के बीच यह मैच पहले से ही ज़्यादा तनावपूर्ण था क्योंकि इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच सिर्फ़ चार साल पहले फ़ॉकलैंड्स युद्ध हुआ था। 22 जून 1986 को सांसें थमा देने वाले इस रोमांचक मैच के 51 मिनट बीत गए थे और दोनों टीमों में से कोई एक भी गोल नहीं कर पाया था। ठीक 52 वें मिनट पर माराडोना इंग्लैंड के गोलकीपर पीटर शिल्टन की तरफ़ उछले और अपने हाथ से फ़ुटबॉल को नेट में डाल दिया। हाथ का इस्तेमाल होने की वजह से यह गोल विवादों में आ गया। लेकिन उस वक्त वीडियो असिस्टेंस टेक्नॉलजी नहीं थी और रेफ़री इस गोल को ठीक से देख नहीं पाए। इसलिए इसे गोल माना गया और इसी के साथ अर्जेंटीना 1-0 से मैच में आगे हो गया। इसी मैच में इस विवादित गोल के ठीक चार मिनट बाद माराडोना ने कुछ ऐसा किया जिसे गोल ऑफ़ द सेंचुरी यानी सदी का गोल कहा गया। माराडोना ने बॉल को इंग्लैंड की टीम के पांच खिलाड़ियों और आख़िरकार गोलकीपर शिल्टन से बचाते हुए ले गए और गोल पोस्ट के भीतर दे डाला। ऐसा गोल फुटबॉल के गेम में कोई भी आज तक नहीं कर पाया। 

ड्रग्स ने माराडोना को उनके असली मकसद से भटका दिया था 

जब माराडोना अपने खेल में लगातार नाम कमा रहे थे। यह साल 1982 का वक्त था जब माराडोना का कॅरियर ऊंचाइयों  को छू रहा था। लेकिन जब सब कुछ अच्छा चल रहा था ठीक उसी समय माराडोना ने कोकीन लेना शुरू किया था। उन्हें नशे की लत पड़ चुकी थी। वह जब 1984 में नेपोली क्लब के लिए खेलने लगे थे, तब वो इटैलियन माफिया कोमोरा के संपर्क में आ गए थे। जिसके बाद माराडोना ने जो ड्रग्स का सिलसिला शुरू किया वह कभी नहीं रूका। उस समय के फुटबॉल में ड्रग्स माफिआयों का रोल बढ़ रहा था और माराडोना भी धीरे-धीरे इसकी चपेट में आ गए।

फुटबॉल में माराडोना का वक्त खत्म होना शुरू, पहले हुए बैन फिर खत्म हुआ कॅरियर

1991 में कोकीन के सेवन के लिए माराडोना को उनके क्लब नेपोली ने 15 महीने के लिए बैन कर दिया था। इसी साल उन्हें ब्यूनस आयर्स में 500 ग्राम कोकीन के साथ अरेस्ट किया गया था। उन्हें तब 14 महीने की सजा दी गई थी। 3 साल बाद 1991 में माराडोना की अर्जेंटीना की नेशनल टीम में वापसी हुई। तब ग्रीस के दौरान किया गया उनका गोल सुर्खियों में रहा था। माराडोना ने ग्रीस के खिलाफ किए अपने गोल को कैमरे के सामने चीखते हुए सेलिब्रेट किया था। लेकिन यह टूर्नामेंट भी माराडोना पूरा नहीं खेल पाए थे, क्योंकि प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के चलते उन्हें 15 महीने के लिए बैन कर दिया गया था। इसके बाद माराडोना के करियर का अंत हो गया था। बाद में जब उन्होंने फिर से फुटबॉल खेलना चाहा तो वह ड्रग्स टेस्ट में फेल होने के कारण कॅरियर खत्म करा बैठे।

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जब ड्रग्स के कारण परिवार ने छोड़ा साथ और सेहत पर भी पड़ने लगा असर

लंबे समय से ड्रग्स लेने वाले माराडोना की सेहत पर अब असर होने लगा था। साल 2000 में उन्हें ड्रग्स की ओवरडोज हो गई थी। जिसके बाद 2004 में उन्हें हार्ट अटैक आया। 2005 में उन्हें अपनी बायपास सर्जरी करवानी पड़ी थी। 2007 में भी उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। डिएगो माराडोना को नशे की लत थी। उनकी मौत की सबसे बड़ी वजह शायद यही रही कि उन्हें 60 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। माराडोना के नशे की लत से उनकी बेटियां परेशान थीं। बीते कुछ महीने पहले उनकी दोनों बेटियां माराडोना को कोर्ट में घसीटने का प्लान बना रही थीं। बेटियों का कहना था कि पिता के नशे की लत से उन्हें कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। माराडोना सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट और शराब पीते कई बार नजर आ चुके थे। उनका परिवार उनकी भलाई चाह रहा था। मगर वो अपनी आदतों से बाज नहीं आए। इसलिए बेटियों ने इस मामले को कोर्ट में ले जाने के बारे में सोचा था। 

जब भारत आए थे माराडोना और गांगुली के साथ खेला था मैच !

माराडोना का भारत से हमेशा से खास नाता रहा है। माराडोना पहली बार दिसंबर 2008 में फुटबॉल नगरी के नाम से मशहूर कोलकाता आए थे। उनके इस्तकबाल को पूरा कोलकाता आधी रात को दमदम एयरपोर्ट के बाहर उमड़ पड़ा था। कोलकाता के लोगों का अपने प्रति इतना प्यार देखकर माराडोना अचंभित हो गए थे। माराडोना ने हैरत से कहा था कि मुझे तो पता ही नहीं था कि भारत में मेरे इतने चाहने वाले हैं। इसके बाद माराडोना दूसरी बार साल 2017 में कोलकाता आए थे। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और मौजूदा समय में बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली से माराडोना का खास लगाव था। माराडोना ने सौरव गांगुली के साथ एक चैरिटी फुटबाल मैच में भी हिस्सा लिया था। हालांकि थकावट के कारण वे ज्यादा देर तक मैदान में नहीं रहे थे। माराडोना ने कोलकाता में अपनी 12 फुट ऊंची एक प्रतिमा का भी अनावरण किया था। सचिन तेंदुलकर भी माराडोना के बड़े फैन रहे हैं।

- दीपक कुमार मिश्रा