आतंकवाद का सिर्फ जन्मदाता ही नहीं बल्कि अन्नदाता भी है पाक, इसलिए हाफिज को हुए दर्द पर बिलबिला उठा है

Hafiz Saeed

हाफिज सईद के समर्थन में अगर पाकिस्तान के राष्ट्रपति को उतरना पड़ा है तो यह एक बार फिर पुष्ट होता है कि आतंकवाद को वहाँ सरकारी समर्थन मिलता है इसीलिए आतंकवादी को दर्द हुआ तो उसे पाक के हुक्मरानों ने भी महसूस किया।

पूरी दुनिया जानती है कि आतंकवाद की फैक्ट्री कहाँ है, पूरी दुनिया जानती है कि आतंकवादियों को सबसे अच्छा प्रशिक्षण कहाँ मिलता है, पूरी दुनिया जानती है कि विश्व के अलग-अलग कोनों में आतंकवादी हमलों की योजनाएं कहां बैठकर बनाई जाती हैं, पूरी दुनिया जानती है कि बड़े से बड़ा आतंकवादी किस देश में पनाह लिये हुए मिल सकता है, पूरी दुनिया जानती है कि आतंकवाद किस देश की सरकारी नीति है, पूरी दुनिया जानती है कि आतंकवाद को प्रश्रय देने और आतंकवाद को फंडिंग करने के आरोप में किस देश पर तमाम तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं। जी हाँ हम बात कर रहे हैं आतंकिस्तान यानि पाकिस्तान की। आतंक के आका हाफिज सईद के घर के बाहर धमाका क्या हो गया पाकिस्तान को आतंकवाद का दर्द महसूस होने लगा और इस धमाके का आरोप वह भारत पर मढ़ रहा है। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की कहावत को चरितार्थ करते हुए पाकिस्तान भारत पर जो आरोप लगा रहा है उसका भारत सरकार ने कड़ा प्रतिवाद किया है।

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भारत का पलटवार

भारत ने मुंबई आतंकी हमले के मुख्य षड्यंत्रकर्ता हाफिज सईद के लाहौर स्थित आवास के पास हुए बम विस्फोट में उसका होने के पाकिस्तान के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पड़ोसी देश का ‘आधारहीन दुष्प्रचार’ बताया है इसके साथ ही इस्लामाबाद को उसकी धरती से फैलने वाले आतंकवाद के खिलाफ ‘विश्वसनीय एवं पुष्टि करने योग्य’ कार्रवाई करने की नसीहत दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ ‘आधारहीन दुष्प्रचार में शामिल होना कोई नयी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने घर को दुरुस्त करने का प्रयास करना चाहिए तथा उसकी धरती से उपजने वाले आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय एवं पुष्टि करने योग्य कदम उठाना चाहिए जहां ऐसे तत्वों को पनाहगाह मिलती हैं।

प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि जब आतंकवाद की बात आती है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान की विश्वसनीयता के बारे में बखूबी जानता है। बागची ने कहा कि यह बात उस समय भी स्पष्ट हो जाती है जब उसका (पाकिस्तान) नेतृत्व ओसामा बिन लादेन को ‘‘शहीद’’ बताता है। भारत ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान में हुए आतंकवादी हमलों में भारत का हाथ होने का कथित सबूत के दावे काल्पनिक बात हैं। दरअसल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह टिप्पणी तब की जब उनसे पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी की ओर से भारत पर लगाये गये आरोप के बारे में पूछा गया था।

पाकिस्तान के आरोप

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने भारत पर अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के विरुद्ध ‘हाइब्रिड’ युद्ध में शामिल होने और आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा कि हाफिज सईद के घर के बाहर धमाका भी भारत के समर्थन से करवाया गया था। पाकिस्तानी राष्ट्रपति के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत, पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए देश में आतंकवादी गतिविधियां करवा रहा है। दरअसल, हाफिज सईद के समर्थन में अगर पाकिस्तान के राष्ट्रपति को उतरना पड़ा है तो यह एक बार फिर पुष्ट होता है कि आतंकवाद को वहाँ सरकारी समर्थन मिलता है इसीलिए आतंकवादी को दर्द हुआ तो उसे पाक के हुक्मरानों ने भी महसूस किया।

अब पाकिस्तानी राष्ट्रपति ऐसा आरोप लगा रहे हैं तो पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसुफ क्यों पीछे रहते, उन्होंने भी बिना किसी तथ्य के आरोप लगा दिया कि लाहौर में हाफिज सईद के आवास के पास विस्फोट में भारत का हाथ है। मोईद युसुफ ने कहा था, ‘‘फारेंसिक विश्लेषण, इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जरिये हमने इसके मुख्य साजिशकर्ता की पहचान कर ली है और हमें यह बताने में कोई संदेह नहीं है कि मुख्य साजिशकर्ता रॉ से संबंधित है।’’ हम आपको याद दिला दें कि लाहौर के जौहर क्षेत्र में 23 जून को बोर्ड आफ रेवन्यू हाउसिंग सोसाइटी में मुंबई बम धमाकों के षड्यंत्रकर्ता हाफिज सईद के आवास के बाहर शक्तिशाली कार बम विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 24 अन्य घायल हो गए थे।

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ओआईसी को भी नसीहत दी

भारत ने पाकिस्तान को तो खरी-खरी सुनाई ही साथ ही इस्लामिक सहयोग संगठन को भी नसीहत दे डाली है। भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) से कहा कि वह पाकिस्तान जैसे निहित स्वार्थी तत्वों को पक्षपातपूर्ण और एकतरफा प्रस्ताव के जरिये भारत विरोधी दुष्प्रचार के लिये समूह के मंच का इस्तेमाल नहीं करने दे। दरअसल ओआईसी के महासचिव द्वारा इस समूह के विदेश मंत्रियों के परिषद के संबंधित प्रस्ताव के अनुरूप जम्मू-कश्मीर में एक शिष्टमंडल भेजने की बात कही गयी है जिसकी प्रतिक्रिया में भारतीय विदेश मंत्रालय की टिप्पणी आई है।

बहरहाल, पहले सीमा पार से आतंकवादी भेजने वाले पाकिस्तान को जब लगा कि इतनी मेहनत और खर्चे से प्रशिक्षण दिलाकर जिसको वह भेजता है वह भारत की पवित्र भूमि पर कदम रखते ही भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से उड़ा दिया जाता है तो अब वह ड्रोन-ड्रोन खेलने लग गया है। कभी गुब्बारे तो कभी ड्रोन भेजकर पाकिस्तान जो हिमाकतें कर रहा है उसका भारत एक ही पलटवार में हिसाब कर देगा। इस समय पाई-पाई को तरस रहे पाकिस्तान को चाहिए कि उसकी भलाई इसी में है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों मसूद अजहर, हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी जैसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की ‘ग्रे सूची’ से बाहर निकलना पाकिस्तान के बस की बात नहीं है क्योंकि जिस देश की सरकारी नीति ही आतंकवाद को बढ़ावा देने की रही हो वह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकता है।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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