अपने रिटायरमेंट की योजना बनाइए, दिए हुए टिप्स पर ध्यान दीजिए

  •  कमलेश पांडेय
  •  जनवरी 9, 2021   12:40
  • Like
अपने रिटायरमेंट की योजना बनाइए, दिए हुए टिप्स पर ध्यान दीजिए

आपको पता है कि किसी भी व्यक्ति के लिए प्रत्येक महीने के खर्च की एक निश्चित योजना होती है जिसमें कमी की गुंजाइश कदापि नहीं होती। हां, कतिपय आकस्मिक खर्चों के चलते वह कब और कैसे बढ जाएंगी, उन्हें रोकना मुश्किल होता है।

आजकल हरेक कामकाजी व्यक्ति एक न एक दिन अपने रोजमर्रे के काम-धंधे से अवकाश पा लेता है जिसे रिटायरमेंट कहते हैं। आमतौर पर अवकाश प्राप्ति की औसतन उम्र सीमा साठ-पैंसठ साल है। कहीं कुछ कम तो कहीं कुछ ज्यादा। यह सरकारी या निजी संस्थाओं के नियमन पर निर्भर है। हालांकि कुछ व्यक्तिगत पेशेवर जबतक स्वस्थ हैं तबतक अवकाश लेना नहीं चाहते, लेकिन सत्तर से पचहत्तर पार करते करते ऐसे लोग भी जिंदगी से थक जाते हैं और न चाहते हुए भी स्वैच्छिक अवकाश लेकर आराम करना पसंद करते हैं। बस यही से उनकी आर्थिक योजना की परीक्षा शुरू हो जाती है। इसलिए बुद्धिमान लोग बैंक बैलेंस के साथ साथ चल-अचल संपत्ति सृजन पर भी ज्यादा ध्यान देते हैं।

अमूमन, गांव और शहर की जरूरतें और प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं। इसलिए बुद्धिमान लोग उस हिसाब से भी अपनी आर्थिक योजनाएं बनाते हैं। मसलन, किसी भी गांव में जीवन गुजर-बसर के लिए कृषि योग्य भूमि, सब्जी की क्यारियां या फलों का बगान जरूरी होता है जिससे नियमित आमदनी होती रहे। कुछ लोग पशुपालन को भी प्राथमिकता देते हैं। हालांकि अब यहां भी मकान-दुकान से किराया और स्वरोजगार से आमदनी विकसित होने की संभावनाएं बलवती हुई हैं।

इसे भी पढ़ें: क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन? आम लोगों को इससे क्या होगा लाभ?

इसी प्रकार किसी भी शहर या महानगर के लिए आवासीय मकान/फ्लैट्स, दुकान, फैक्ट्री, फार्म हाऊस, होटल्स आदि का होना जरूरी है ताकि उन्हें किराया पर लगाकर भी नियमित आमदनी सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि स्कूल, कॉलेज, प्रकाशन संस्थान या व्यक्तिगत स्वामित्व वाले अन्य पेशेवर संस्थानों, एनजीओज, ट्रस्ट, कम्पनीज की संभावना किसी भी व्यक्ति की निवेश योग्यता और बचत क्षमता पर भी निर्भर करती हैं। फिर सुयोग्य और सुशिक्षित सन्तानों जैसा सुरक्षित निवेश विकल्प कुछ भी नहीं है। क्योंकि फिक्स, चालू या बचत खाता और पेंशन प्लान से रुपए-पैसे चाहे आप कितना भी जमा/इकट्ठा कर लें। लेकिन उसे यदि जरूरत या समझदारी पूर्वक खर्च करने की कला आपमें या आपकी संतान में नहीं है तो जीवन का अन्तिम कालखण्ड वाकई दुखदाई हो जाता है।

आम तौर पर महसूस किया जाता है कि कुछ लोगों के लिए यह  एक डर पैदा करने वाला उम्र का पड़ाव होता है जिसमें पहला सवाल यही उठता है कि क्या हमारी बचत पर्याप्त है? क्या हम अपने मन मुताबिक अपनी जिंदगी के शेष पल गुजार पाएंगे? यदि बीमार हो गए तो फिर क्या होगा? ये ऐसे सवाल हैं जिनका समुचित जवाब स्वतः न मिले तो सम्बन्धित व्यक्ति की उम्र अपने आप कम होती जाती है। दूसरी ओर, कुछ लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी उम्मीदों से भरी होती है, क्योंकि अब वे पर्याप्त समय मिलने के बाद अपनी सभी शेष इच्छाएं पूरी कर सकते हैं, जैसे मनपसंद जगहों की यात्रा करना, पसंदीदा शौक पालना या फिर ऐसे कामकाज निष्पादित करना, जिनके लिए पहले पर्याप्त समय नहीं था। क्योंकि हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि आखिरकार रिटायरमेंट नौकरी से ले रहे हैं, अपनी शेष जिंदगी से नहीं। इसलिए इसकी योजना पहले से बनाइए और यदि किसी कारण बस नहीं बना पाए हैं तो जो बचा है उसे सुव्यवस्थित कर लीजिए।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि उपरोक्त बातें जीवन रूपी  सिक्के के दो पहलू की तरह हैं, जिसमें चित्त या पट्ट होना नीयति और व्यक्तिगत समझदारी पर निर्भर है। फिर भी यदि आप रिटायरमेंट के लिए पहले से योजना बनाने में चूक गए हैं तो  अब जीवन को वित्तीय रूप से सहेजने और सुरक्षित करने की योजना पर शीघ्र अमल कीजिए, अन्यथा रोजमर्रे की समस्याएं आप पर हावी पड़ जाएंगी। कहना न होगा कि भले ही आप की वित्तीय स्थिति बेहद अच्छी हो, लेकिन लंबी अवधि के लिए रुपए-पैसों का प्रबंधन करना और अपने विभिन्न खर्चों पर लगाम रखना किसी भी व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। खासकर रिटायरमेंट के बाद तो इन बातों का ध्यान रखना और भी आवश्यक होता है, क्योंकि आप इन्हें ध्यान में रखकर ही बेहतर तरीके से अपना वित्तीय प्रबंधन कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: साल 2020 में इन योजनाओं को लेकर आई मोदी सरकार, आमजन को हो रहा सीधा फायदा

# जानिए, आपको क्या करना चाहिए।

आपको पता है कि किसी भी व्यक्ति के लिए प्रत्येक महीने के खर्च की एक निश्चित योजना होती है जिसमें कमी की गुंजाइश कदापि नहीं होती। हां, कतिपय आकस्मिक खर्चों के चलते वह कब और कैसे बढ जाएंगी, उन्हें रोकना मुश्किल होता है। लिहाजा आप उन निवेश विकल्पों में अपने पैसे लगाएं जिनसे आपको अपना घर खर्च पूरा करने के लिए नियमित रिटर्न मिलेगा। यदि आपने फिक्स्ड डिपॉजिट या डेट-ओरिएंटेड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया है तो अपने टैक्स बोझ को भी जानिए-समझिए और सरकारी की बदलती आर्थिक नीतियों के मद्देनजर ऐसे निवेश विकल्पों को चुनिए जो कि टैक्स कम करने के बाद महंगाई दर से ज्यादा रिटर्न देते हों। इसके अलावा, छोटी अवधि की अपनी जरूरतों के लिए भी लगने वाले पैसों को आप डेट फंड में लगाएं और मनमाफिक उसका उपयोग सुनिश्चित करें।

यही नहीं, दीर्घ अवधि की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने निवेश पोर्टफोलियों में से शेष/बाकी विकल्पों के साथ इक्विटी फंड को भी जरूर रखें। यदि आप ऐसा करेंगे तो चिकित्सीय आपातकाल, स्वास्थ्य जांच और आकस्मिक खर्चों (घर की मरम्मत, आदि) से भी एकबारगी जूझ सकते हैं। इसलिए इन सभी के लिए आप अलग से आपात फंड बनाएं तो बेहतर रहेगा। इसके अलावा, आप अपनी वसीयत भी तैयार कीजिए ताकि आपके अचानक गुजर जाने के बाद किसी को कोई समस्या नहीं होगी। हां, यदि आपने पहले ही कोई वसीयत बनाई हुई है तो साल में कम से कम एक बार उसकी समीक्षा अवश्य करें और यह सुनिश्चित करें कि आपकी संपत्ति (भौतिक और वित्तीय दोनों) की सूची सामयिक है और प्रत्येक संपत्ति के लिए आपकी नॉमिनी का नाम स्पष्ट लिख हुआ है। ऐसा करके आप एक बेहतर अभिभावक होने का परिचय दे सकते हैं।

# समझिए, आपको क्या नहीं करना चाहिए।

मेरी सलाह मानेंगे तो आपको अपना काम करते रहना चाहिए, उन्हें करना बिल्कुल न छोड़े। क्योंकि अब आपके लिए पूरे वक्त की नौकरी करना जरूरी नहीं है, बल्कि आप एक कंसल्टंट या फ्रीलांसर के तौर पर भी अपना काम जारी रख सकते हैं। ध्यान रखिए कि ऐसा करने से न सिर्फ आपको सुनिश्चित आय मिलेगी, बल्कि आपको मानसिक और शारीरिक तौर पर भी सक्रिय रखेगी जो कि अवकाश प्राप्ति के बाद बेहद जरूरी होता है। यही नहीं, अपनी सुनिश्चित आय के लिए आप कई पेंशन प्लान खरीदने से बचें, क्योंकि इन प्लानस पर महंगाई की मार अक्सर पड़ती है एवं इनमें किए हुए निवेश पर लॉक-इन पीरियड भी होता है। इसलिए हमेशा ख्याल रखिए कि टैक्स लगने वाले डेट निवेश विकल्पों में अपनी बड़ी पूंजी कभी न लगाएं। इससे आपका जोखिम बढ़ जाएगा। यही नहीं, पूंजी घाटे के जोखिम वाले निवेश विकल्पों में भी ज्यादा पैसा लगाने से आप बचें।कुल मिलाकर इक्विटी में निवेश कुल पोर्टफोलियो का 25 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। साथ यही यह भी याद रखें कि एक ही तरह के निवेश विकल्प या फंड में पैसा बिल्कुल न लगाएं। क्योंकि इससे आपको क्षति हो सकती है। आपको यह मालूम होना चाहिए कि लंबी अवधि में विविधीकरण वाले पोर्टफोलियो के साथ कम जोखिम जुड़ा होता है। इसलिए सभी निवेश विकल्पों में नॉमिनी का नाम लिखना न भूलें। अन्यथा आपके गुजर जाने के बाद आपके उत्तराधिकारी को परेशानी हो सकती है।

# देखिए, अपना निजी बजट ऐसे बनाएं।

किसी भी व्यक्ति का निजी बजट बनाना आसान काम है, लेकिन यह एक उबाऊ काम है, इसलिए अधिकांश लोग इसमें दिलचस्पी नहीं लेते। लेकिन जो नहीं लेते, उनका आर्थिक भविष्य प्रायः मजबूत नहीं होता। क्योंकि भले ही शुरुआत में आपको अपनी आय के हर स्रोत और सम्भावित खर्च की पूरी सूची बनानी पड़ती है। लेकिन, आप जब एक बार अपनी सूची बना लेंगे, तब खर्चों में बदलाव करना और अपने अनुमानित बजट पर नजर रखना बेहद आसान हो जाएगा।

लिहाजा, सबसे पहले आपको महीने के कुल खर्च का हिसाब किताब लगाना है। क्योंकि इनमें से कुछ ऐसे खर्च होंगे जिन्हें आपको हर महीने करना ही करना होता है, जैसे सोसाइटी फीस, नगरपालिका टैक्स, बिजली उपभोग शुल्क, पेपर, दूध, दाई आदि। निःसन्देह, इनको लेकर आप कुछ अधिक बदलाव नहीं कर पाएंगे। क्योंकि इनमें से ज्यादातर खर्च बढ़ते-घटते रहते हैं जो आपकी मासिक या सालाना आय पर निर्भर होते हैं। इसलिए इन पर लगाम लगाई जा सकती है। ऐसे खर्चों में खाना, उपभोगी सेवाएं, कपड़े, मनोरंजन और यात्रा आदि शामिल हैं, जो बजट के बाहर भी जा सकते हैं। अतः इन खर्चों पर नियंत्रण पाने के लिए आप समझदारी से काम लें, अन्यथा खुला हाथ किसी के लिए भी अहितकर ही होता है।

बेहतर होगा कि आप आय के सभी स्रोतों यथा- पेंशन, निवेश, ब्याज, आदि को जोड़ लें। फिर कुल आय में आपको महीने में होने वाले सभी खर्च को कम-ज्यादा करना होगा। इस काम को करने के लिए आप स्प्रेडशीट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि अपनी सही वित्तीय हालत जानने में आपको सहूलियत हो। इसके लिए आपको अनुमानित बजट और असली व्यय के अंतर के साथ अपनी आय की तालिका बनानी होगी। उसमें वेतन, पेंशन, किराए से होने वाली आय, मिला हुआ ब्याज, कारोबार से होने वाली आय, अन्य आय को जोड़कर कुल आय बनानी होगी। फिर अपने खर्चे, जैसे- खाना, उपभोग खर्च (बिजली, गैस, पानी, आदि), वेतन (परिचर, ड्राइवर, आदि), बीमा (स्वास्थ्य, कार और आदि), मोबाइल, लैंडलाइन, इंटरनेट, डीटीएच/केबल शुल्क, यात्रा और परिवहन, छुट्टियां, आराम और मनोरंजन, कपड़े, तोहफे, बच्चों की शिक्षा/कर्ज, दूसरे कर्ज, नगरपालिका टैक्स, सोसाइटी फीस, अन्य/मरम्मत/आपात खर्च के कुल खर्च को जोड़ना होगा और फिर महीने की बचत पर गौर फ़रमाना होगा जो अनुमानित और वास्तविक दोनों होगा।

इसे भी पढ़ें: किसान उदय योजना: सरकारी पंप सेट से सिंचाई करना होगा आसान

याद रखिए कि अगर महीने की बचत का आंकड़ा ऋणात्मक है तो आप अपनी आय से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इसलिए सावधान हो जाइए। ऐसे में आपके पास तीन विकल्प शेष हैं- पहला, खर्च कम करें; दूसरा, आय बढ़ाएं; और तीसरा, दोनों करें। तीसरा विकल्प ज्यादा श्रेयष्कर होगा। बेशक, जब आप अपना निजी बजट बना लेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि आपको गुजारे के लिए न्यूनतम कितनी रकम चाहिए। ऐसे में वित्तीय अनुशासन पालें और बचत करने के बारे में सोचें। हमेशा सोच-समझकर ही पैसा निकालें, क्योंकि जितनी पूंजी आप निवेशित रखेंगे, उतनी ही आपकी संपत्ति में बढ़ोतरी होगी।

आम तौर पर ज्यादातर रिटायर हुए लोगों के पास आय के दो ही स्रोत होते हैं-पहला, पेंशन प्लान और दूसरा पहले से पैसे लगाए हुए निवेश विकल्पों, यथा- म्युचुअल फंड्स, स्टॉक और शेयर, फिक्स्ड डिपॉजिट, अनुइटी, आदि से होने वाली आय। साथ ही, यदि आपने प्रॉपर्टी में भी निवेश किया हो तो उससे आपको किराया मिलता होगा। इसलिए, किसी भी रिटायर व्यक्ति के लिए ये जरूरी है कि आप अपनी आय-व्यय पर सतत नजर रखें। अगर आपके पास अतिरिक्त आय है तो उसे निवेश करें ताकि वक्त के साथ आपकी बचत में भी बढ़ोतरी जारी रहे जो आपके वक्त ए जरूरत पर काम आवे।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







एफआईआर होने के बाद आपके पास क्या है कानूनी रास्ते

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  जनवरी 21, 2021   18:31
  • Like
एफआईआर होने के बाद आपके पास क्या है कानूनी रास्ते

खुदा-न-खास्ता अगर आपका नाम भी किसी एफआईआर में दर्ज हो जाता है या फिर आपके किसी संबंधी परिचित का नाम एफआईआर में दर्ज हो जाता है, तो इससे घबराने की बजाय आप यह विचार करें कि आपके पास भी कानून द्वारा उपलब्ध कई रास्ते हैं, जिनका प्रयोग आप कर सकते हैं।

कहते हैं कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। ऐसे में अगर पुलिस के पास कोई मामला आ जाए, तो उन मामलों पर संज्ञान लेकर कई बार पुलिस एफआईआर दर्ज कर लेती है। अब जिन व्यक्तियों के नाम एफआईआर (फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट / प्राथमिकी) में दर्ज होते हैं, पुलिस यह कोशिश करती है कि वह उन व्यक्तियों को तत्काल गिरफ्तार करे या फिर उन्हें समन देकर उनसे पूछताछ करें।

खुदा-न-खास्ता अगर आपका नाम भी किसी एफआईआर में दर्ज हो जाता है या फिर आपके किसी संबंधी परिचित का नाम एफआईआर में दर्ज हो जाता है, तो इससे घबराने की बजाय आप यह विचार करें कि आपके पास भी कानून द्वारा उपलब्ध कई रास्ते हैं, जिनका प्रयोग आप कर सकते हैं।

आइए देखते हैं...

इसे भी पढ़ें: क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन? आम लोगों को इससे क्या होगा लाभ?

एफआईआर अगर झूठी है तो?

अब इस संभावना पर विचार कीजिए कि आप पर दर्ज प्राथमिकी अगर झूठी है, तो आप क्या कर सकते हैं! जाहिर तौर पर कानून के दुरुपयोग करने वाले लोगों की संख्या समाज में कुछ कम नहीं है। कई बार तो कुछ पुलिसकर्मी खुद भी तमाम मामलों में इंवॉल्व होकर लोगों को फंसाने और परेशान करने का कार्य करते हैं।

ऐसे में अगर कोई झूठी प्राथमिकी आप पर दर्ज हो गयी है, तो आप भारतीय दंड संहिता में वर्णित धारा 482 के तहत उस प्राथमिकी को चैलेंज कर सकते हैं। इसके लिए आपको हाई कोर्ट का रुख करना होगा और अगर आपने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द कराने की याचिका दायर कर दी, तो पुलिस आप के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है।

हाँ! इसमें आपको एक वकील की मदद ज़रूर लेनी पड़ेगी और एक एप्लीकेशन के माध्यम से अपनी बेगुनाही के सबूत देकर एफआईआर रद्द कराने की याचिका हाईकोर्ट में दायर कर सकते हैं। जाहिर तौर पर इसमें तमाम डाक्यूमेंट्स आप लगा सकते हैं, तो अपनी बेगुनाही के लिए जवाब पेश कर सकते हैं। हालांकि यह टालमटोल का मामला नहीं दिखना चाहिए और आपके पक्ष में मजबूत सबूत नजर आना चाहिए, तभी आपकी एफआईआर रद्द हो सकती है।

अगर प्राथमिकी रद्द नहीं होती है और गिरफ्तारी की तलवार लटकती है तो क्या करें?

मान लीजिए कि FIR रद्द कराने का विकल्प आप के संबंध में काम नहीं आता है तो भी आप कानून की मदद ले सकते हैं, और इसमें पुलिसकर्मी अपनी मनमानी नहीं कर सकते हैं।

इसमें पुलिस अगर आपको किसी स्थान से गिरफ्तार करती है तो जल्द से जल्द आपके किसी रिश्तेदार को उसे सूचित करना होगा कि आप की गिरफ्तारी अमुक अस्थान से की गई है और अमुक स्थान पर आपको रखा गया है। अगर आपका कोई रिश्तेदार शहर से बाहर है तो भी 8 से 12 घंटे के भीतर पुलिस को टेलीग्राम के माध्यम से करीबी को सूचना देना अनिवार्य है। पुलिस को अपने रोजनामचे (डायरी) में इसका पूरा विवरण, पुलिस अधिकारी का नाम, जिसकी अभिरक्षा में आपको रखा गया है, उसे दर्ज करना होगा।

साथ ही गिरफ्तारी के 48 घंटे के भीतर ही डॉक्टरों द्वारा आप की चिकित्सा जांच कराना भी अनिवार्य है। इसके अलावा आपको आपके वकील से मिलने की परमिशन भी दी जाएगी। हालांकि वकील आपसे पूरी पूछताछ के दौरान मौजूद नहीं रहेगा।

इसे भी पढ़ें: किसान उदय योजना: सरकारी पंप सेट से सिंचाई करना होगा आसान

गिरफ्तारी के दौरान आप पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए और आप के सम्मान की रक्षा की जानी चाहिए। इस प्रकार के दिशा निर्देश पुलिस को पहले से ज्ञात होते हैं।

खासकर महिलाओं की तलाशी सिर्फ और सिर्फ महिला पुलिसकर्मियों द्वारा ही शालीनता के साथ ली जाएगी। महिलाओं को सूर्यास्त के बाद, और सूर्योदय के पहले किसी हालत में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। हथकड़ी या बेड़ी का प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है।

गिरफ्तारी के बाद भी आप को पर्याप्त कानूनी अधिकार दिए गए हैं और उसमें से सबसे महत्वपूर्ण यह है कि 24 घंटे के भीतर आपको संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा और आपको अपने वकील से मिलने की परमिशन भी दी जाएगी। जाहिर तौर पर यह तमाम जानकारियां आपको नहीं होती हैं और इस वजह से आप एफआईआर में अपना या अपने किसी संबंधी का नाम देखकर घबरा जाते हैं। कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि अगर आपको समस्त प्रक्रियाओं की जानकारी हो, तो आप इन मामलों को कहीं बेहतर ढंग से अंजाम तक पहुंचा सकते हैं। 

वैसे बेहतर यही समझना है कि पुलिस और प्रशासन हमारे लिए, हमारी सुरक्षा के लिए ही बनाए गए हैं। इस बात को जानकर, ऐसे किसी कार्य से खुद ही दूर रहना समझदारी है, जहाँ पुलिस को आपके ऊपर प्राथमिकी दर्ज करना पड़े। वैसे, ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि अगर संयोगवश आपका नाम कहीं आ भी जाता है, तो पुलिस को उसकी कार्रवाई करने दें और उसमें बाधा उत्पन्न करने की बजाय सहयोग करने का प्रयत्न करें। साथ ही उपलब्ध कानूनी उपचारों के माध्यम से आगे की प्रक्रिया जारी रखें।

-मिथिलेश कुमार सिंह







कोरोना वैक्सीन के लिए जरूरी है Co-Win ऐप, कराना होगा रजिस्ट्रेशन, यहां जानें सब कुछ

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 18, 2021   16:54
  • Like
कोरोना वैक्सीन के लिए जरूरी है Co-Win ऐप, कराना होगा रजिस्ट्रेशन, यहां जानें सब कुछ

तो सबसे पहले आपको बता दें कि को भी Co-Win ऐप है? सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत में कोरोना टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए Co-Win ऐप विकसित किया गया है। कोरोना वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस ऐप की मदद ली जाएगी।

भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में निर्मित दो कोरोना वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए लॉन्च कर दिया है। एक सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशिल्ड है दूसरी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन। इन दोनों टीकों ने भारत के आत्मनिर्भर बनने की राह को और भी मजबूत किया है। कोरोना के टीकाकरण अभियान के पहले चरण में लगभग 3 करोड़ फ्रंटलाइन वॉरियर्स को पहला डोज दिया जाएगा। भारत के इस कदम को लेकर विश्व में हर तरफ वाहवाही हो रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही आम लोगों के लिए भी कोरोना वैक्सीन शुरू की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम लोगों तक यह वैक्सीन कैसे पहुंचेगी। सरकार इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। सरकार ने Co-Win ऐप शुरू किया है जिसके जरिए आम लोग भी आसानी से टीका लगवा सकते हैं। आज हम आपको बताते हैं Co-Win ऐप के बारे में और आखिर यह ऐप आपको टीकाकरण में कैसे मदद करेगा इसके बारे में भी...

इसे भी पढ़ें: क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन? आम लोगों को इससे क्या होगा लाभ?

तो सबसे पहले आपको बता दें कि को भी Co-Win ऐप है? सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत में कोरोना टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए Co-Win ऐप विकसित किया गया है। कोरोना वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस ऐप की मदद ली जाएगी। आम लोग इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवा कर कोरोना का टीका आसानी से ले सकेंगे। इस ऐप पर टीकाकरण केंद्र से लेकर टीका लेने वाले लोगों तक की पूरी सूची होगी। इस ऐप के जरिए टीकाकरण प्रक्रिया की पूरी तरह से ट्रैकिंग की जाएगी। कुल मिलाकर अगर कम शब्दों में कहें तो Co-Win ऐप पर भारत में लगाए जाने वाले टीके को लेकर पूरा लेखा-जोखा रहेगा। Co-WIN ऐप को पांच मॉड्यूल में बांटा गया है। पहला है प्रशासनिक मॉड्यूल, दूसरा रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल, तीसरा वैक्सीनेशन मॉड्यूल, चौथा लाभान्वित स्वीकृति मॉड्यूल और पांचवां हैं रिपोर्ट मॉड्यूल।

एक बात स्पष्ट कर दें कि Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही आप कोरोना का टीका लगवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपनी आईडी दिखानी होगी। आपको बता दें कि रजिस्ट्रेशन के लिए  कोई भी फोटो आईडी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप इन आईडी का इस्तेमाल कर सकते है।

आधार कार्ड, 

वोटर आईडी कार्ड

ड्राइविंग लाइसेंस,

पैन कार्ड,

मनरेगा जॉब कार्ड,

पासपोर्ट 

पेंशन दस्तावेज फोटो के साथ,

बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटो वाली पासबुक

सांसद, विधायक, एमएलसी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र 

स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड

सेवा पहचान पत्र

इसे भी पढ़ें: साल 2020 में इन योजनाओं को लेकर आई मोदी सरकार, आमजन को हो रहा सीधा फायदा

अब आपको यह बताते है कि Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन कैसे करा सकते हैं। सबसे पहले आपको गूगल प्ले स्टोर में जाकर Co-Win ऐप डाउनलोड करना होगा। ध्यान रहे कि आपको Co-Win ऐप  डाउनलोड करना है। वर्तमान में गूगल प्ले स्टोर पर Co-Win ऐप के ही नाम से कई फर्जी ऐप मौजूद है। ऐसे ऐप को इंस्टॉल करने से बचें। रिपोर्ट के मुताबिक Co-Win ऐप एंड्रॉयड, आईओएस और KaiOS, सभी प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेगा। नोकिया फोन और जिओ फोन इस्तेमाल करने वाले लोग भी Co-Win ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। 

ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन से पहले Co-Win ऐप पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस बताई जाएगी। रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको अपनी फोटो आईडी देनी होगी। बिना फोटो आईडी के रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको अपना मोबाइल नंबर भी रजिस्टर्ड करवाना होगा। रजिस्टर्ड मोबाइल पर ही रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद एक SMS आएगा। इस SMS में वैक्सीनेशन की तारीख, पता और समय बताया जाएगा। आपको यह भी बता दें कि जिस फोटो आईडी के जरिए आपने Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवाया है उसे टीका लगाते समय भी ले जाना जरूरी है। Co-Win ऐप या फिर मैसेज के जरिए ही आपको डोज की दूसरी तिथि बताई जाएगी।

- अंकित सिंह







कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  जनवरी 16, 2021   15:57
  • Like
कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी।

मौजूदा कोविड-19  महामारी के मद्देनजर भारतीय बाजार में खुदरा और साथ ही संस्थागत प्लेयर्स पर बोझ को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में कई उपाय किए गए हैं। RBI ने हाल ही में 27 मार्च, 2020 को एक कोविद-19 नियामक पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें भारत भर के उधारदाताओं को सभी किश्तों के भुगतान पर तीन महीने- 1 मार्च, 2020 और 31 मई, 2020 (मोरेटोरियम पीरियड) के बीच की मोहलत देने की अनुमति थी। 

यह स्टेटमेंट विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीतियों को निर्धारित करता है, जो COVID-19 की वजह से वित्तीय स्थितियों की मुश्किलों को सीधे संबोधित करता है। इसमें शामिल हैं: (i) सिस्टम में तरलता का विस्तार से यह सुनिश्चित करना कि वित्तीय बाजार और संस्थान COVID से संबंधित अव्यवस्थाओं के सामने सामान्य रूप से कार्य करने में सक्षम हैं; (ii) मौद्रिक संचरण को सुदृढ़ करना ताकि आसान शर्तों पर बैंक ऋण प्रवाह उन लोगों के लिए बने रहे जो महामारी से प्रभावित रहे हैं; (iii) COVID-19 व्यवधानों के कारण पुनर्भुगतान के दबावों को कम करने और कार्यशील पूंजी तक पहुंच में वित्तीय तनाव कम करना और (iv) महामारी की शुरुआत और इसके प्रसार के साथ उच्च अस्थिरता को देखते हुए बाजारों के कामकाज में सुधार।

इसे भी पढ़ें: क्या है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन? आम लोगों को इससे क्या होगा लाभ?

नियामक पैकेज के तहत कुछ उपाय:

1. लक्षित दीर्घकालिक परिचालन संचालन (Targeted Long Term Repos Operations (TLTROs)

भारत में COVID-19 की शुरुआत और तेजी से प्रसार ने घरेलू इक्विटी, बॉन्ड और विदेशी मुद्रा बाजारों में बड़े बिकवाली को उत्साहित किया है। रिडेम्पशन प्रेशर के तेज होने से कॉरपोरेट बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और डिबेंचर जैसे इंस्ट्रूमेंट्स पर लिक्विडिटी प्रीमियर बढ़ गए हैं। COVID-19 प्रकोप के साथ व्यापारिक गतिविधि के कमज़ोर होने के साथ, इन उपकरणों के लिए वित्तीय स्थितियां, जो उपयोग की जाती हैं, बैंक क्रेडिट में मंदी की स्थिति में कार्यशील पूंजी तक पहुंचने के लिए इसे सख्त कर दिया गया है।

बैंकों को प्राथमिक बाज़ार निर्गमों से अपने सक्षम उपकरणों के वृद्धिशील होल्डिंग्स के पचास प्रतिशत और द्वितीयक बाजार से शेष पचास प्रतिशत का अधिग्रहण करना होगा, जिसमें म्यूचुअल फंड और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां शामिल हैं। इस सुविधा के तहत बैंकों द्वारा किए गए निवेश को परिपक्वता (HTM) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यहां तक कि कुल निवेश का 25 प्रतिशत से अधिक HTM पोर्टफोलियो में शामिल करने की अनुमति होगी। 

2. नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio)

बैंकिंग प्रणाली में तरलता पर्याप्त बनी हुई है, जैसा कि 1-25 मार्च, 2020 के दौरान दैनिक औसत आधार पर 2.86 लाख करोड़ के ऑर्डर के एलएएफ के रिवर्स रेपो परिचालन के तहत बैंकिंग प्रणाली से अधिशेष के अवशोषण में परिलक्षित होता है। हालाँकि, इस तरलता का वितरण वित्तीय प्रणाली में अत्यधिक विषम है और बैंकिंग प्रणाली के भीतर भी ऐसा ही है।

COVID-19 के कारण होने वाले व्यवधान पर बैंकों की मदद करने के लिए एकमुश्त उपाय के रूप में, सभी बैंकों के नकदी आरक्षित अनुपात (CRR) को 100 आधार अंकों की घटाकर शुद्ध मांग और समय देनदारियों (एनडीटीएल) के 3.0 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 के रिपोर्टिंग पखवाड़े से लिया गया है। सीआरआर में यह कमी सम्पूर्ण बैंकिंग प्रणाली में लगभग 1,37,000 करोड़ की प्राथमिक तरलता को अतिरिक्त एसएलआर की होल्डिंग्स के संबंध में घटकों की देयताओं के अनुपात में जारी करेगी। यह वितरण 26 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाली एक वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध होगा।

इसके अलावा, कर्मचारियों की सामाजिक दूरी और परिणामस्वरूप बैंकों द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों का संज्ञान लेते हुए, पहले दिन से प्रभावी दैनिक सीआरआर बैलेंस रखरखाव की आवश्यकता को 90 प्रतिशत से घटाकर 80 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 से लिया गया है। 

3. सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility)

सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) के तहत, बैंक वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में 2 प्रतिशत तक की कटौती करके अपने विवेक पर रातोंरात उधार ले सकते हैं।

TLTRO, CRR और MSF से संबंधित ये तीन उपाय सिस्टम में कुल 3.74 लाख करोड़ की तरलता को इंजेक्ट करेंगे।

4. मौद्रिक नीति दर गलियारे का चौड़ीकरण (Widening of the Monetary Policy Rate Corridor)

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी। सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) की दर पॉलिसी रेपो दर से 25 बीपीएस ऊपर रहेगी।

इस तरह के प्रयास वास्तविक अर्थव्यवस्था के वित्तीय तनाव के संचरण को रोकेंगे और व्यवहार्य व्यवसायों की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे और इन असाधारण रूप से परेशान समय में उधारकर्ताओं को राहत प्रदान करेंगे।

इसे भी पढ़ें: साल 2020 में इन योजनाओं को लेकर आई मोदी सरकार, आमजन को हो रहा सीधा फायदा

5. सावधि ऋण पर अधिस्थगन (Moratorium on Term Loans)

सभी वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, छोटे वित्त बैंकों और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों सहित), सहकारी बैंक, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान और NBFC (आवास वित्त कंपनियों और सूक्ष्म-वित्त संस्थानों सहित) ("ऋण देने वाली संस्थाएं)" को 1 मार्च, 2020 तक बकाया सभी सावधि ऋणों के संबंध में किश्तों के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत देने की अनुमति दी गई। 

6. कार्यशील पूंजी सुविधाओं पर ब्याज का स्थगितकरण (Deferment of Interest on Working Capital Facilities)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजीगत सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाओं को 1 मार्च, 2020 तक बकाया ऐसी सभी सुविधाओं के संबंध में ब्याज के भुगतान पर तीन महीने की छूट देने की अनुमति दी जा रही है। ब्याज का भुगतान आस्थगित अवधि की समाप्ति के बाद किया जाएगा।

उधारकर्ताओं को COVID-19 की वजह से उत्पन्न आर्थिक गिरावट से सक्षम बनाने के लिए विशेष रूप से अधिस्थगन / स्थगन प्रदान किया जा रहा है।

7. वर्किंग कैपिटल फाइनेंसिंग में आसानी (Easing of Working Capital Financing)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजी सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाएं मार्जिन को कम करके और / या उधारकर्ताओं के लिए कार्यशील पूंजी चक्र को आश्वस्त करके ड्राइंग पावर को रिकलकुलेट कर सकती हैं। उधारकर्ताओं के लिए विशेष रूप से COVID-19 से आर्थिक गिरावट की वजह से दी गई क्रेडिट शर्तों में इस तरह के बदलाव को उधारकर्ता की वित्तीय कठिनाइयों के कारण दी गई रियायतों के रूप में नहीं माना जाएगा।

8. नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) के कार्यान्वयन को स्थगित करना (Deferment of Implementation of Net Stable Funding Ratio (NSFR)

वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के वर्षों में किए गए सुधारों के हिस्से के रूप में, बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन (BCBS) ने नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) की शुरुआत की थी, जो बैंकों को फंडिंग के पर्याप्त स्थिर स्रोतों के लिए अपनी गतिविधियों की फंडिंग को भविष्य के वित्त पोषण के तनाव के जोखिम को कम करने के लिए बैंकों की आवश्यकता के हिसाब से जोखिम को कम करता है।  

- जे. पी. शुक्ला







This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept