Health Insurance Policy में बीमारी छुपाना पड़ सकता है भारी, इसे Fraud मानकर रद्द हो सकता है क्लेम

सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस में किसी भी बीमारी को छुपाना महंगा पड़ सकता है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि अगर आप स्वास्थ्य बीमा लेते समय सही जानकारी नहीं देते हैं, तो बीमा कंपनी क्लेम रद्द कर सकती है। इससे आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए हमेशा पूरी और सही जानकारी दें।
हेल्थ इंश्योरेंस में Pre-existing Disease छुपाने से आपका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, पॉलिसी रद्द हो सकती है और भविष्य में इंश्योरेंस मिलना भी मुश्किल हो सकता है। पूर्व शोध IRDAI की रिपोर्ट के अनुसार हर साल लगभग 8 से 10 लाख क्लेम PED या उससे जुड़ी शर्तों की वजह से रिजेक्ट हो जाते हैं।
जब आप अपना हेल्थ इंश्योरेंस कराते है, तो कंपनी आपकी पुरानी बीमारी यानी Pre-existing Disease का रिकॉर्ड मांगती है। यदि आप ऐसे मेंं झूठ बोलते है या जानकारी छुपाते हैं, तो कंपनी आपकी पॉलिसी तुरंत रद्द कर सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह 'अतुल्य विश्वास' (Uberrimae Fidei) के सिद्धांत का उल्लंघन है, जिसे बीमा कंपनी और कानून धोखाधड़ी मानते हैं।
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अगर आप यह गलती कर चुके हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी आपका क्लेम स्वीकार नहीं करेगी या आपका प्रीमियम बढ़ा देगी। आइए जानते हैं, क्लेम रिजेक्शन की सच्चाई के साथ बचने के तरीके क्या है।
Pre-existing Disease छुपाने के नुकसान
हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले Pre-existing Disease छुपाने से आपका क्लेम रद्द हो सकता है, साथ ही कुछ केस में प्रीमियम महंगा हो सकता है। इसीलिए अपनी पहले से मौजूद बीमारी को छुपाने की गलती न करें:
- हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द होने पर आपकी वर्तमान तक जमा की गई प्रीमियम राशि वापस नहीं की जाती है।
- यदि एक कंपनी PED छुपाने के कारण पॉलिसी कैंसिल करती है, तो दूसरी कंपनी आसानी से हेल्थ इंश्योरेंस नहीं देती है।
- यदि आप कंपनी से अपनी बीमारी जानबूझकर छुपाते है तो इसे बीमा कंपनी फ्रॉड मान सकती है, जिससे आपके ऊपर कानूनी कार्यवाही भी हो सकती है।
- अगर क्लेम के समय अस्पताल के रिकॉर्ड से पुरानी बीमारी का पता चलता है, तो कई कंपनी क्लेम देने से साफ मना कर सकती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवश्यक बात
सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस में किसी भी बीमारी को छुपाना महंगा पड़ सकता है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि अगर आप स्वास्थ्य बीमा लेते समय सही जानकारी नहीं देते हैं, तो बीमा कंपनी क्लेम रद्द कर सकती है। इससे आपको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसलिए हमेशा पूरी और सही जानकारी दें।
आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस केवल एक विकल्प नहीं बल्कि बड़ी जरूरत है। आमतौर पर आप किसी भी अच्छी कंपनी से बीमा ले सकते है, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले सभी विकल्पों की तुलना करना बेहद आवश्यक है। बेहतर तुलना करने के लिए आप वेटिंग पीरियड, प्रीमियम, को-पेमेंट, कवरेज और मिलने वाले लाभ को ध्यान में रख सकते है। बेहतर फैसले लेने के लिए आप भरोसेमंद प्लेटफॉर्म जैसे Policybazaar की मदद ले सकते हैं, पॉलिसीबाजार सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की तुलना करने, इंश्योरेंस खरीदने और रिन्यू कराने की सुविधा प्रदान करता है।
क्लेम रिजेक्शन की सच्चाई
हेल्थ इंश्योरेंस में क्लेम रिजेक्शन सभी बीमारियों पर लागू नहीं होता हैं। निम्न बीमारियों को छुपाने से आपको क्लेम मिलना मुश्किल हो सकता है या बहुत लंबे वेटिंग पीरियड तक रुकना पड़ सकता है:
- डायबिटीज: अगर आपने शुगर छुपाई है, तो किडनी फेलियर, हार्ट अटैक या रेटिनोपैथी (आंखों की समस्या) का क्लेम रिजेक्ट हो सकता हैं।
- हायपरटेंशन (High BP): बीपी छुपाने पर स्ट्रोक या पैरालिसिस का क्लेम नहीं मिलता है।
- अस्थमा: अगर आपने बताया नहीं हैं कि आपको सालों से साँस की दिक्कत है, तो फेफड़ों से जुड़े किसी भी गंभीर इलाज का पैसा कंपनी नहीं देगी।
- थायराइड: इसके कारण होने वाले हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी सर्जरी का क्लेम रुक सकता है।
अगर आप अपनी बीमारी को कंपनी को पहले ही बता देते है या बाद में भी बताते है, तो कंपनी निम्न शर्तों के साथ उसे स्वीकार कर लेती है:
- वेटिंग पीरियड के बाद: अगर आपने बताया है कि आपको 'पथरी' या 'मोतियाबिंद' जैसा कोई भी बीमारी है, तो कंपनी 2 से 4 साल का वेटिंग पीरियड देती है। इस समय के बाद आपको हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम आसानी से मिल सकता है।
- अन्य बीमारियाँ: ऐसी बीमारियाँ जो पॉलिसी लेने के बाद हुई हैं, जैसे डेंगू, मलेरिया, एक्सीडेंट, या अचानक हुआ अपेंडिक्स, तो उनका क्लेम मिलता है। हालांकि इसके लिए भी वेटिंग पीरियड हो सकता है।
- दुर्घटना - यदि आपके साथ दुर्भाग्यवश कोई दुर्घटना हो जाती है, तो इसके लिए हेल्थ इंश्योरेंस में कोई वेटिंग पीरियड नहीं होता है, ऐसी स्थिति में कंपनी आपका क्लेम स्वीकार करती है।
इंश्योरेंस कंपनी को कैसे पता चलता है?
बीमा कंपनी, हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम देने से पहले, मेडिकल रिपोर्ट की सहायता से पहले से मौजूद बीमारी का पता लगाती है। साथ ही, जब आप अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहे होते हैं, तो डॉक्टर आपको डिस्चार्ज समरी (Discharge Summary) देते हैं, जिससे पता चल जाता है कि बीमारी कब से है। इसके अलावा अगर आपकी उम्र 45 से ज्यादा है या आप बड़ी बीमा राशि ले रहे हैं, तो कंपनी खुद आपके टेस्ट करवाती है।
ज्यादातर मामलों में डॉक्टर की रिपोर्ट में यह जानकारी आ जाती है कि आपको बीमारी कब से हैं। यदि आप बड़ा क्लेम 2 साल के भीतर लेने की कोशिश करते हैं, तो बीमा कंपनी पुराने फैमिली डॉक्टर, पुराने अस्पताल रिकॉर्ड और यहां तक कि आपके पास के केमिस्ट शॉप पर भी पूछ सकती हैं।
क्लेम रिजेक्शन से बचने के तरीके
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय यदि आपने बीमा कंपनी से Pre-existing Disease छुपाने की गलती की है, तो पॉलिसी कराने के 15 दिन के अंदर कंपनी को मेल करके सूचित कर दें। इससे आप फ्रॉड के केस से बच सकते है, हालाँकि, इससे हो सकता है, कि आपका प्रीमियम लगभग 15% तक बढ़ जाए, लेकिन यह भविष्य में होने वाले नुकसान से बचा लेता है।
इसके अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पॉलिसी के नियम व शर्तों को ध्यान से पढ़े, प्रीमियम का भुगतान समय पर करें, सभी दस्तावेज पूरे रखें और समय रहते पॉलिसी रिन्यू कराएं। अगर आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स हो जाती है, तो आपके पिछले सभी 'वेटिंग पीरियड' के लाभ खत्म हो जाते हैं साथ ही नए क्लेम मिलने में भी दिक्कत आ सकती है। इन सभी बातों पर ध्यान देकर क्लेम रिजेक्शन से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
सभी बीमा कंपनियाँ ईमानदारी और भरोसे के साथ काम करती हैं। यदि पॉलिसीधारक अपनी पहले से मौजूद बीमारी को छुपाता है, तो इसे फ्रॉड माना जाता है। ऐसे मामले में न केवल हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, बल्कि भविष्य में किसी अन्य बीमा कंपनी से भी हेल्थ इंश्योरेंस मिलना भी कठिन हो जाता है। साथ ही, अब तक जो प्रीमियम आपने भरा है, वह वापस नहीं मिलता है। इसलिए हमेशा पॉलिसी फॉर्म में सही और पूरी जानकारी देना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम माना जाता है।
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