Afghanistan Earthquake | धराशायी होने से बाल-बाल बचा अफगानिस्तान! हिंदू कुश में 126 KM नीचे हिली धरती, 5.3 की तीव्रता से कांपे लोग

Earthquake
ANI
रेनू तिवारी । Oct 1 2026 9:56AM

गुरुवार तड़के जब दुनिया सोकर उठ ही रही थी, तभी अफगानिस्तान की धरती में अचानक एक भयानक हलचल हुई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, गुरुवार सुबह 6:59:20 बजे (IST) अफगानिस्तान का हिंदू कुश इलाका 5.3 की तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप के झटकों से दहल उठा।

गुरुवार तड़के जब दुनिया सोकर उठ ही रही थी, तभी अफगानिस्तान की धरती में अचानक एक भयानक हलचल हुई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, गुरुवार सुबह 6:59:20 बजे (IST) अफगानिस्तान का हिंदू कुश इलाका 5.3 की तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप के झटकों से दहल उठा। भूकंप का केंद्र काबुल से लगभग 165 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में 35.981 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 68.700 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। राहत की बात यह रही कि इस भूकंप का केंद्र जमीन से 126 किलोमीटर गहराई (Deep Focus Earthquake) में था, जिसके कारण सतह पर बड़े पैमाने पर तबाही होने से बच गई।

NCS के अनुसार, भूकंप ज़मीन के नीचे 126 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका केंद्र अफ़गानिस्तान में, देश की राजधानी काबुल से लगभग 165 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप की निगरानी करने वाली एजेंसी द्वारा जारी कोऑर्डिनेट्स के अनुसार, इसका केंद्र 35.981 N अक्षांश और 68.700 E देशांतर पर था। अपने अपडेट में NCS ने कहा, "भूकंप की तीव्रता: 5.3, समय: 01/10/2026 06:59:20 IST, अक्षांश: 35.981 N, देशांतर: 68.700 E, गहराई: 126 किमी, स्थान: अफ़गानिस्तान।"

अब तक किसी नुकसान या हताहत होने की जानकारी नहीं मिली है
NCS द्वारा जारी जानकारी भूकंप की तीव्रता, समय, गहराई और स्थान की पुष्टि करती है। हालाँकि, अब तक मिली जानकारी में भूकंप के बाद किसी के हताहत होने, ढाँचे को नुकसान पहुँचने या अन्य प्रभावों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। यह पता लगाने के लिए कि क्या भूकंप से कोई नुकसान हुआ है या आबादी वाले इलाकों में इसके तेज़ झटके महसूस किए गए, अफ़गान अधिकारियों या भूकंप की निगरानी करने वाली एजेंसियों से और जानकारी की ज़रूरत होगी।

हिंदू कुश इलाका अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के आसपास भूकंप के लिहाज़ से सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक है। हिंदू कुश-पामिर बेल्ट में अलग-अलग गहराई पर भूकंप आते रहते हैं, जिनमें कम गहराई वाले झटकों से लेकर बहुत ज़्यादा गहराई वाली भूकंपीय घटनाएँ शामिल हैं। इस इलाके की जटिल भू-संरचना का सीधा संबंध भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच चल रही टक्कर से है। इन विशाल प्लेटों की लगातार हलचल ने हिमालय और उसके आस-पास के पहाड़ी इलाकों को आकार दिया है, साथ ही इस पूरे इलाके में ज़बरदस्त भूकंपीय गतिविधियाँ भी पैदा की हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में भूकंप का खतरा क्यों ज़्यादा है?
यहाँ यह ध्यान देना ज़रूरी है कि अफ़ग़ानिस्तान में भूकंप और झटकों का खतरा बहुत ज़्यादा है क्योंकि यह दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक में स्थित है, जहाँ भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं। इस टकराव से पैदा होने वाले भारी दबाव के कारण पृथ्वी की ऊपरी परत (क्रस्ट) में दरारें पड़ जाती हैं और उसमें मोड़ आ जाते हैं। हिंदू कुश पहाड़ों में, इस प्रक्रिया के कारण लिथोस्फीयर (पृथ्वी की बाहरी परत) के कुछ हिस्से मेंटल (पृथ्वी की मध्य परत) में गहराई तक धंस जाते हैं। गौरतलब है कि उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के पामीर-हिंदू कुश इलाके में अक्सर तेज़ भूकंप आते हैं, जिनमें से कुछ 200 किलोमीटर तक की गहराई पर आते हैं - ऐसी घटना दुनिया भर में बहुत कम देखने को मिलती है।

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