अफगानिस्तान में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से बाहर करने की कोशिशें बढ़ रही हैं: भारत

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जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पुनीत अग्रवाल ने कहा, ‘‘एक निकटवर्ती पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साझेदार के रूप में, देश में शांति और स्थिरता की वापसी सुनिश्चित करने की भारत की कोशिश है।’’

संयुक्त राष्ट्र/जिनेवा|  भारत ने अफगानिस्तान में सार्वजनिक जीवन से महिलाओं को बाहर किये जाने की बढ़ती कोशिशों को लेकर शुक्रवार को चिंता व्यक्त की। उसने महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पुनीत अग्रवाल ने कहा, ‘‘एक निकटवर्ती पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साझेदार के रूप में, देश में शांति और स्थिरता की वापसी सुनिश्चित करने की भारत की कोशिश है।’’

मानवाधिकार परिषद के 50वें सत्र में ‘‘अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकारों की स्थिति’’ विषय पर हुई चर्चा में उन्होंने कहा, ‘‘हम अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम के बारे में बहुत चिंतित हैं, जो अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों की भलाई को सीधे प्रभावित करता है। अफगानिस्तान में महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से बाहर करने की कोशिशें बढ़ रही हैं।’’

अग्रवाल ने कहा, ‘‘शिक्षा के अधिकार सहित महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।’’

उन्होंने पीड़ितों तथा उनके परिवारों और अफगानिस्तान में विनाशकारी भूकंप से प्रभावित लोगों के प्रति भारत की ओर से गहरी संवेदना भी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के दुख को साझा करता है और ‘‘अफगानिस्तान के सच्चे दोस्त के रूप में’’ अफगानिस्तान के लोगों के लिए दो उड़ानों के जरिये 27 टन आपातकालीन राहत सहायता भेजी है।

अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा स्थिति के कारण नागरिकों, बच्चों, लड़कियों और महिलाओं के बुनियादी अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शिक्षा और चिकित्सा देखभाल तक पहुंच में भारी बाधा उत्पन्न हुई है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अफगानिस्तान की मदद करने का भी आह्वान किया।

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