Nicolas Maduro का भारत कनेक्शन! सत्य साईं बाबा के भक्त कैसे बने वेनेजुएला के राष्ट्रपति?

माधुरो का जन्म 23 नवंबर 1962 को वेनेजुएला के राजधानी काराकस में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता मजदूर संगठनों से ही जुड़े थे। जिससे सामाजिक असमानता और श्रमिक अधिकारियों के मुद्दों, माधुरों ने बचपन से ही गरीबी देखी है।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति माधुरो को आज दुनिया का विवाद और सख्त शासक के रूप में जानती है। लेकिन सत्ता के शिखर तक पहुंचने से पहले उनका जीवन बेहद साधारण और संघर्षों से भरा रहा है। उनकी कहानी केवल राजनीतिक तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें मेहनतकश जीवन ट्रेड यूनियन आंदोलन और भारत के एक आध्यात्मिक गुरु से जुड़ा अनोखा विश्वास भी शामिल है। माधुरो का जन्म 23 नवंबर 1962 को वेनेजुएला के राजधानी काराकस में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता मजदूर संगठनों से ही जुड़े थे। जिससे सामाजिक असमानता और श्रमिक अधिकारियों के मुद्दों, माधुरों ने बचपन से ही गरीबी देखी है। आर्थिक परिस्थितियों के चलते वह उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाए और युवा व्यवस्था में ही रोजगार की तलाश में निकल पड़े। इसी दौरान उन्होंने काराकास में बस ड्राइवर के रूप में काम करना शुरू किया। काराकास की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर बस चलाते हुए मादुर को आम लोगों की परेशानियों को बेहद करीबी से समझने का मौका मिला।
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2023 में शावेज के निधन के बाद माधुरों को उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी चुना गया। उसी साल में हुए राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने बेहद करीबी मुकाबलों में जीत हासिल की और वेनेजुला के राष्ट्रपति बन गए। हालांकि उनके शासनकाल की पहचान आर्थिक संकट, महंगाई, खाद संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जुड़ गई। राजनीति के अलावा निकोल्स मादुर की एक और पहचान है जिसने खासकर भारत में लोगों का ध्यान खींचा है।
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गिरफ्तार किए गए वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर एक रोचक पहलू सामने आया है। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मादुरो दिवंगत भारतीय आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साई बाबा के भक्त रहे हैं। वे कैथोलिक परिवार में पले-बढ़े थे, लेकिन उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के प्रभाव में आकर साईं बाबा के अनुयायी बने। साल 2005 में मादुरो और फ्लोरेस भारत आए थे और पुट्टपर्थी में साईं बाबा से मुलाकात की थी। उस समय फ्लोरेस पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ की वकील थीं और मादुरो संसद के स्पीकर थे। बाद में मादुरो विदेश मंत्री बने। साईं बाबा के निधन पर वेनेजुएला की संसद ने शोक प्रस्ताव पास किया और एक दिन का राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया गया।
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राष्ट्रपति कार्यालय में साई बाबा की तस्वीर
मादुरो के राष्ट्रपति कार्यालय में साई बाबा की तस्वीर भी लगी रही है। उनके शासन में साईं संगठन को वेनेजुएला में काम करने की अनुमति मिली। अब जब मादुरो अमेरिका की कुख्यात जेल में बंद है, उनके पुराने आध्यात्मिक विश्वास फिर चर्चा में है।
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